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बच्चा हर वक्त मांगता है मोबाइल? इन आसान तरीकों से धीरे-धीरे कम करें स्क्रीन टाइम की आदत

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 25 Jul, 2026 02:09 PM
बच्चा हर वक्त मांगता है मोबाइल? इन आसान तरीकों से धीरे-धीरे कम करें स्क्रीन टाइम की आदत

 नारी  डेस्क : आज के डिजिटल दौर में मोबाइल, टैबलेट और टीवी बच्चों की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। कई बच्चे खाना खाते समय फोन मांगते हैं, रोने पर मोबाइल देखकर शांत हो जाते हैं या फिर दिनभर स्क्रीन देखने की जिद करते हैं। शुरुआत में यह आदत माता-पिता को आसान समाधान लग सकती है, लेकिन धीरे-धीरे यही बच्चों की दिनचर्या का हिस्सा बन जाती है। बच्चों में स्क्रीन टाइम की आदत एक दिन में नहीं बनती, इसलिए इसे खत्म करने में भी समय लगता है। अचानक मोबाइल छीन लेने से बच्चा परेशान हो सकता है और गुस्सा भी कर सकता है। ऐसे में जरूरत है कि प्यार और समझदारी के साथ धीरे-धीरे उनकी स्क्रीन पर निर्भरता कम की जाए।

अचानक मोबाइल बंद न करें, धीरे-धीरे कम करें स्क्रीन टाइम

अगर बच्चा रोजाना कई घंटे मोबाइल देखता है, तो उसे एकदम से फोन देना बंद न करें। अचानक बदलाव करने से बच्चा ज्यादा जिद कर सकता है। बेहतर होगा कि धीरे-धीरे स्क्रीन टाइम कम किया जाए। उदाहरण के लिए, अगर बच्चा रोज 4 घंटे मोबाइल देखता है, तो हर हफ्ते 15 से 20 मिनट तक समय कम करने की कोशिश करें। धीरे-धीरे बच्चा नई आदत को स्वीकार करने लगेगा और उसे परेशानी भी कम होगी।

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खाने के समय मोबाइल देने की आदत बदलें

कई माता-पिता बच्चों को खाना खिलाने के लिए मोबाइल या टीवी का सहारा लेते हैं। इससे बच्चा आसानी से खाना तो खा लेता है, लेकिन धीरे-धीरे उसे बिना स्क्रीन के खाना खाने की आदत नहीं रहती। कोशिश करें कि परिवार के सभी सदस्य साथ बैठकर खाना खाएं और उस दौरान मोबाइल या टीवी से दूरी बनाएं। इससे बच्चे का ध्यान खाने और परिवार के साथ बातचीत पर रहेगा।

मोबाइल की जगह दें नई और मजेदार एक्टिविटी

बच्चों का ध्यान स्क्रीन से हटाने के लिए उन्हें ऐसे कामों में व्यस्त करें, जिनमें उन्हें खुशी मिले। रंग भरने वाली किताबें, पजल, ब्लॉक्स, ड्राइंग, कहानी पढ़ना या आउटडोर गेम्स जैसे विकल्प बच्चों के लिए काफी अच्छे हो सकते हैं। जब बच्चा किसी रचनात्मक या मजेदार गतिविधि में व्यस्त रहेगा, तो धीरे-धीरे उसकी मोबाइल देखने की इच्छा कम होने लगेगी।

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बच्चों के सामने खुद भी कम करें फोन का इस्तेमाल

बच्चे अपने माता-पिता को देखकर बहुत कुछ सीखते हैं। अगर घर में बड़े लोग हर समय मोबाइल में व्यस्त रहेंगे, तो बच्चे भी उसी आदत को अपनाएंगे। इसलिए माता-पिता को खुद भी स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण रखना चाहिए। घर में कुछ समय ऐसा तय करें जब सभी लोग मोबाइल से दूर रहकर एक-दूसरे के साथ समय बिताएं।

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बच्चे को फोन दें तो सिर्फ जरूरत के लिए

छोटी उम्र में बच्चों को अपना फोन दे देना उनकी आदतों को प्रभावित कर सकता है। फोन मिलने के बाद बच्चे अक्सर पढ़ाई या जरूरत के काम की बजाय गेम्स, वीडियो और रील्स में ज्यादा समय बिताने लगते हैं। अगर कभी फोन देना जरूरी हो, तो कोशिश करें कि उसका इस्तेमाल किसी खास काम के लिए ही हो और समय भी तय हो। इससे बच्चे को स्क्रीन के सही इस्तेमाल की समझ आएगी।

गुस्से की बजाय धैर्य से समझाएं

जब बच्चा मोबाइल के लिए जिद करे या गुस्सा करे, तो तुरंत डांटने या फोन छीनने से समस्या बढ़ सकती है। बच्चे को प्यार से समझाएं कि ज्यादा स्क्रीन देखने से क्या नुकसान हो सकते हैं और उसे दूसरे मजेदार विकल्प दें। याद रखें कि स्क्रीन की आदत धीरे-धीरे बनी है, इसलिए इसे बदलने में भी समय लगेगा। माता-पिता के धैर्य और सही तरीके से बच्चों का स्क्रीन टाइम कम किया जा सकता है और उन्हें स्वस्थ दिनचर्या की ओर बढ़ाया जा सकता है।
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