
नारी डेस्क: बिज़नेस की पढ़ाई कर रहे यशवेंद्र सिंह सिर्फ़ 10 दिन पहले ही अमेरिका से घर लौटे थे और अपने परिवार के साथ समय बिताना चाहते थे। लेकिन इसके बजाय, शनिवार को उनके परिवार वाले और दोस्त सफ़दरजंग अस्पताल के बाहर खड़े होकर 20 साल के यशवेंद्र का शव घर ले जाने का इंतज़ार कर रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि सिस्टम की लापरवाही की वजह से उनकी मौत हुई। सिंह के साथ मौजूद महिला जो यूनिवर्सिटी में उनकी दोस्त बनी थी के लिए कुछ स्थानीय लोग फ़रिश्ते बनकर आए, वे नाले में उतरे और उसे सुरक्षित बाहर निकाला।

खुले नाले में गिरी कार
यशवेंद्र एक नेशनल-लेवल के बास्केटबॉल खिलाड़ी और गोल्ड मेडलिस्ट भी थे। उनकी मौत से उनके स्कूल, दोस्तों और परिवार को गहरा सदमा लगा है। पुलिस के मुताबिक यशवेंद्र और उनकी दोस्त सुबह वसंत कुंज जा रहे थे। नांगल देवात सिग्नल के पास तीखा मोड़ लेते समय कार ने कंट्रोल खो गया। पुलिस का मानना है कि हाल ही में हुई बारिश की वजह से सड़क पर फिसलन थी, जिसने इस हादसे में बड़ी भूमिका निभाई। गाड़ी रास्ते से हटकर सड़क किनारे एक पेड़ से टकराई और फिर बिना ढके नाले में जा गिरी, जिससे वह पलट गई। टक्कर इतनी ज़ोरदार थी कि कार की छत पिचक गई और यशवेंद्र अंदर ही फंस गया।
ब्रिगेडियर का बेटा था यशवेंद्र
इमरजेंसी कॉल मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और कार को नाले से बाहर निकालने की कोशिश की। यशवेंद्र को तुरंत पास के अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर उसे बचा नहीं सके। हादसे में घायल हुई उसकी साथी बच गई और उसे भी इलाज के लिए ले जाया गया। यशवेंद्र कोलकाता में तैनात भारतीय सेना के एक ब्रिगेडियर का बेटा था। वह हादसे से करीब दस दिन पहले ही अमेरिका से दिल्ली लौटा था और अपने नाना के साथ रह रहा था, जिनका उस समय कैंसर का इलाज चल रहा था। उन्होंने 2024 में दिल्ली के संस्कृति स्कूल से अपनी 12वीं की पढ़ाई पूरी की थी। स्कूल ने उन्हें एक प्रतिभाशाली एथलीट के तौर पर याद करते हुए शोक संदेश जारी किया, जिसमें उनकी बेहतरीन टीमवर्क, अनुशासन और खेल भावना की तारीफ़ की गई। स्कूल ने कहा कि बास्केटबॉल कोर्ट और स्कूल कम्युनिटी में उनकी मौजूदगी ने उन्हें जानने वालों पर गहरी छाप छोड़ी थी।

लापरवाही ने ली होनहार छात्र की जान
नांगल देवत इलाके के पास रहने वाले लोगों का कहना है कि उन्हें इस हादसे से हैरानी नहीं हुई, क्योंकि वहां मौजूद खुला नाला लंबे समय से खतरे की वजह बना हुआ था। निवासियों का दावा है कि पहले भी दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी से इस खुले नाले के बारे में शिकायतें की गई थीं, लेकिन इस समस्या को कभी ठीक से हल नहीं किया गया। यशवेंद्र सिंह की मौत उनके परिवार, दोस्तों और उस कम्युनिटी के लिए एक बहुत बड़ा सदमा है जो उन्हें एक होनहार छात्र और एथलीट के तौर पर जानती थी। गीली सड़कों और असुरक्षित, खुले नाले की वजह से एक छोटी सी, रोज़मर्रा की ड्राइव जानलेवा साबित हुई।।