नारी डेस्क : किडनी फेल होने के बाद कई मरीजों को नियमित रूप से डायलिसिस कराना पड़ता है। ऐसे में लोगों के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या डायलिसिस के बाद किडनी दोबारा ठीक हो सकती है? अगर डायलिसिस बंद कर दिया जाए तो क्या होगा और डायलिसिस पर रहने वाला मरीज कितने समय तक जीवित रह सकता है? दरअसल, किडनी का काम शरीर से विषैले पदार्थों और अतिरिक्त तरल पदार्थ को बाहर निकालकर शरीर का संतुलन बनाए रखना होता है। जब किडनी यह कार्य करने में असमर्थ हो जाती है, तब डायलिसिस की मदद ली जाती है। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार डायलिसिस किडनी की बीमारी का इलाज नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी जीवनरक्षक प्रक्रिया है जो किडनी के काम को अस्थायी रूप से पूरा करती है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि किन परिस्थितियों में किडनी दोबारा काम करने लगती है और कब मरीज को लंबे समय तक डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ सकती है।
क्या डायलिसिस के बाद किडनी ठीक हो जाती है?
AIIMS के प्रोफेसर के अनुसार, इसका जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि मरीज को एक्यूट (Acute) या क्रॉनिक (Chronic) किडनी फेल्योर है। अगर किसी कारण से अचानक किडनी ने काम करना बंद कर दिया है (Acute Kidney Injury), तो सही इलाज और कुछ समय तक डायलिसिस की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे मामलों में कई मरीजों की किडनी दोबारा सामान्य रूप से काम करने लगती है। वहीं, क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) में स्थिति अलग होती है। यदि किडनी स्थायी रूप से खराब हो चुकी है और मरीज नियमित डायलिसिस पर है, तो केवल डायलिसिस से किडनी ठीक नहीं होती। ऐसे मरीजों के लिए लंबे समय तक डायलिसिस जारी रखना पड़ता है या फिर किडनी ट्रांसप्लांट ही स्थायी उपचार का विकल्प हो सकता है।

डायलिसिस बंद करने पर क्या होता है?
डॉक्टरों के अनुसार, जिन मरीजों की किडनी पूरी तरह काम करना बंद कर चुकी है, उनके लिए डायलिसिस जीवनरक्षक प्रक्रिया होती है। यदि ऐसे मरीज बिना चिकित्सकीय सलाह के डायलिसिस बंद कर दें, तो शरीर में विषैले पदार्थ और अतिरिक्त तरल पदार्थ जमा होने लगते हैं। इससे गंभीर जटिलताएं पैदा हो सकती हैं और जान का खतरा भी बढ़ सकता है।
डायलिसिस पर मरीज कितने साल तक जी सकता है?
विशेषज्ञों का कहना है कि इसका कोई निश्चित जवाब नहीं है। यह पूरी तरह मरीज की स्वास्थ्य स्थिति, उपचार और देखभाल पर निर्भर करता है। AIIMS में ऐसे कई मरीज हैं जो 15 वर्ष या उससे अधिक समय से नियमित डायलिसिस करवा रहे हैं। वहीं, कुछ देशों में मरीज 20–25 वर्ष या उससे भी अधिक समय तक डायलिसिस के साथ स्वस्थ जीवन जीते देखे गए हैं।

इन 3 बातों पर निर्भर करती है मरीज की उम्र
मरीज की मेडिकल स्थिति
अगर मरीज को किडनी की बीमारी के साथ हार्ट डिजीज, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या अन्य गंभीर बीमारियां भी हैं, तो इसका असर उसकी सेहत और जीवनकाल पर पड़ सकता है।
नियमित इलाज और आर्थिक स्थिति
डायलिसिस एक लंबी और महंगी प्रक्रिया हो सकती है। यदि मरीज समय पर और नियमित डायलिसिस कराता है तथा डॉक्टर की सलाह के अनुसार इलाज जारी रखता है, तो लंबे समय तक स्वस्थ जीवन जीने की संभावना बढ़ सकती है।
मरीज की इच्छाशक्ति
विशेषज्ञों के अनुसार, मानसिक रूप से मजबूत रहना भी बेहद जरूरी है। कई मरीज वर्षों तक सप्ताह में दो या तीन बार डायलिसिस करवाते हुए सामान्य जीवन जीते हैं। सकारात्मक सोच, परिवार का सहयोग और इलाज के प्रति अनुशासन मरीज की जीवन गुणवत्ता को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।