
नारी डेस्क : ओडिशा के पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर भारत के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में से एक है। हर साल निकलने वाली विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा में लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं। इस मंदिर से जुड़ी कई प्राचीन परंपराएं और लोक-मान्यताएं आज भी लोगों के बीच प्रचलित हैं। इन्हीं में से एक मान्यता यह भी है कि अविवाहित कपल्स (प्रेमी-प्रेमिका) को भगवान जगन्नाथ के एक साथ दर्शन नहीं करने चाहिए। हालांकि, यह जानना जरूरी है कि यह एक लोक-मान्यता है, न कि मंदिर का आधिकारिक नियम।
क्या है एक साथ दर्शन न करने की मान्यता?
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यदि कोई अविवाहित प्रेमी-प्रेमिका भगवान जगन्नाथ के गर्भगृह में एक साथ दर्शन करते हैं, तो उनके रिश्ते में दूरियां आ सकती हैं या विवाह में बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसी वजह से कई श्रद्धालु आज भी इस परंपरा का सम्मान करते हुए अलग-अलग दर्शन करना पसंद करते हैं। हालांकि, इस मान्यता का समर्थन करने वाला कोई आधिकारिक धार्मिक नियम या शास्त्रीय प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

राधा रानी की कथा से जुड़ी है यह मान्यता
लोक-कथाओं के अनुसार, एक बार राधा रानी भगवान श्रीकृष्ण (जगन्नाथ स्वरूप) के दर्शन के लिए पुरी पहुंचीं। कहा जाता है कि मंदिर में उन्हें प्रवेश की अनुमति नहीं मिली, जिससे वे दुखी हो गईं। इसके बाद उन्होंने यह श्राप दिया कि जो भी अविवाहित प्रेमी-प्रेमिका यहां एक साथ दर्शन करेंगे, उनका प्रेम सफल नहीं होगा। इसी लोक-कथा के आधार पर यह मान्यता आज भी कई लोगों के बीच प्रचलित है। हालांकि, इस कथा का उल्लेख सभी प्रामाणिक धार्मिक ग्रंथों में नहीं मिलता और इसे मुख्यतः लोक-परंपरा के रूप में देखा जाता है।
क्या मंदिर प्रशासन ने लगाया है कोई प्रतिबंध?
नहीं। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक नियम या प्रतिबंध नहीं है, जिसमें अविवाहित कपल्स के एक साथ दर्शन करने पर रोक लगाई गई हो। यानी मंदिर में प्रवेश और दर्शन को लेकर यह पूरी तरह श्रद्धालुओं की व्यक्तिगत आस्था और विश्वास का विषय है। जो लोग इस लोक-मान्यता को मानते हैं, वे उसका पालन करते हैं, जबकि कई श्रद्धालु बिना किसी रोक-टोक के एक साथ दर्शन भी करते हैं।

रथ यात्रा का धार्मिक महत्व
जगन्नाथ रथ यात्रा दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक मानी जाती है। इस दौरान भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा अपने भव्य रथों पर सवार होकर श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर तक यात्रा करते हैं। इस दिव्य उत्सव में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु शामिल होकर भगवान के दर्शन और रथ खींचने का सौभाग्य प्राप्त करते हैं।