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खाना खाने के बाद क्यों आती हैं खट्टी डकारें? जानिए इसके पीछे छिपे कारण

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 13 Jul, 2026 11:29 AM
खाना खाने के बाद क्यों आती हैं खट्टी डकारें? जानिए इसके पीछे छिपे कारण

नारी डेस्क: खाना खाने के बाद कभी-कभार खट्टी डकार आना आम बात हो सकती है, खासकर अगर आपने ज्यादा मसालेदार या भारी भोजन किया हो। लेकिन यदि यह समस्या लगभग रोज होने लगे, साथ में सीने में जलन, मुंह में खट्टापन या पेट में भारीपन भी महसूस हो, तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लगातार खट्टी डकारें पाचन तंत्र से जुड़ी किसी समस्या का संकेत हो सकती हैं और समय रहते इसकी वजह जानना जरूरी होता है।

क्या किसी विटामिन या मिनरल की कमी से आती हैं खट्टी डकारें?

अक्सर लोगों को लगता है कि खट्टी डकारें शरीर में किसी खास विटामिन या मिनरल की कमी का संकेत होती हैं, लेकिन ऐसा पूरी तरह सही नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार खट्टी डकारें किसी एक पोषक तत्व की कमी का सीधा लक्षण नहीं मानी जातीं। हालांकि, कुछ विटामिन और मिनरल की कमी पाचन प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है, जिससे एसिडिटी, अपच या गैस जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

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पेट का एसिड बनता है सबसे बड़ी वजह

खट्टी डकारों का सबसे आम कारण पेट में बनने वाला एसिड है। जब पेट का एसिड भोजन नली (इसोफेगस) की ओर वापस आने लगता है, तो खट्टी डकार, सीने में जलन और मुंह में खट्टापन महसूस हो सकता है। यदि यह समस्या बार-बार होती है, तो यह गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज (GERD) का संकेत भी हो सकती है, जिसके लिए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी होता है।

इन आदतों से भी बढ़ सकती है परेशानी

गलत खानपान और जीवनशैली भी खट्टी डकारों की बड़ी वजह बन सकती है। जरूरत से ज्यादा भोजन करना, बहुत मसालेदार, तला-भुना या तैलीय खाना खाना पेट में एसिड बनने की संभावना बढ़ा देता है। इसके अलावा बहुत जल्दी-जल्दी खाना खाने या खाते समय ज्यादा हवा निगलने से गैस बन सकती है, जिससे डकारें अधिक आने लगती हैं।

खाना खाते ही लेटना पड़ सकता है भारी

कई लोगों की आदत होती है कि खाना खाने के तुरंत बाद बिस्तर पर लेट जाते हैं। ऐसा करने से पेट का एसिड ऊपर की ओर लौट सकता है, जिससे खट्टी डकारें और सीने में जलन की समस्या बढ़ जाती है। इसलिए भोजन के बाद कुछ समय तक सीधे बैठना या हल्की-फुल्की वॉक करना बेहतर माना जाता है।

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तनाव भी बन सकता है कारण

लगातार तनाव, चिंता और मानसिक दबाव का असर केवल दिमाग पर ही नहीं, बल्कि पाचन तंत्र पर भी पड़ता है। तनाव के कारण पाचन प्रक्रिया धीमी हो सकती है और एसिडिटी या अपच की समस्या बढ़ सकती है, जिससे खट्टी डकारें आने की संभावना भी बढ़ जाती है।

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क्या पोषक तत्वों की कमी का भी होता है असर?

हालांकि खट्टी डकारें सीधे तौर पर किसी विटामिन या मिनरल की कमी से नहीं होतीं, लेकिन विटामिन बी समूह, मैग्नीशियम और कुछ अन्य पोषक तत्वों की कमी पाचन स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। यदि लंबे समय से पाचन संबंधी परेशानी बनी हुई है, तो डॉक्टर की सलाह पर आवश्यक जांच कराना और सही इलाज कराना बेहतर रहता है।

खट्टी डकारों से बचने के आसान उपाय

खट्टी डकारों की समस्या से बचने के लिए भोजन हमेशा धीरे-धीरे और अच्छी तरह चबाकर खाना चाहिए। तला-भुना, अधिक मसालेदार और ज्यादा तैलीय भोजन सीमित मात्रा में लें। एक बार में बहुत अधिक खाने की बजाय थोड़ी-थोड़ी मात्रा में कई बार भोजन करना बेहतर होता है। साथ ही खाना खाने के तुरंत बाद लेटने से बचें और नियमित रूप से हल्की शारीरिक गतिविधि तथा संतुलित जीवनशैली अपनाएं।

कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

यदि खट्टी डकारों के साथ लगातार सीने में तेज जलन, निगलने में परेशानी, बार-बार उल्टी, वजन कम होना या लंबे समय तक एसिडिटी की शिकायत बनी रहे, तो बिना देरी किए डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। समय पर जांच और सही उपचार से गंभीर पाचन संबंधी समस्याओं से बचा जा सकता है।  

 

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