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केस अपने पक्ष में कराने के लिए जज की कुर्सी पर किया टोटका, CCTV में कैद हुई महिला की हरकत

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 14 Jul, 2026 11:45 AM
केस अपने पक्ष में कराने के लिए जज की कुर्सी पर किया टोटका, CCTV में कैद हुई महिला की हरकत

नारी डेस्क:  कर्नाटक के चिक्काबल्लापुर जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक 65 वर्षीय महिला पर अदालत में चल रहे अपने सिविल विवाद का फैसला प्रभावित करने के इरादे से कथित तौर पर काला जादू या टोटका करने का आरोप लगा है। महिला की पूरी हरकत कोर्ट परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई, जिसके आधार पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। यह मामला अब पूरे राज्य में चर्चा का विषय बना हुआ है।

CCTV फुटेज से सामने आई पूरी घटना

जानकारी के अनुसार, आरोपी महिला की पहचान चिक्काबल्लापुर शहर के वलसन्ना बीड़ी इलाके की रहने वाली मंजुला के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि वह अदालत परिसर में पहुंची और 'फर्स्ट एडिशनल सीनियर सिविल जज एवं ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास (JMFC)' की अदालत में दाखिल हुई। आरोप है कि महिला ने जज की कुर्सी के पास और उसके ऊपर अभिमंत्रित बताए जा रहे सफेद सरसों के दाने छिड़के। माना जा रहा है कि उसने यह सब इस विश्वास के साथ किया कि इससे अदालत का फैसला उसके पक्ष में आ सकता है।हालांकि उसकी यह पूरी गतिविधि कोर्ट परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हो गई।

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कोर्ट प्रशासन ने दर्ज कराई शिकायत

जब अदालत के अधिकारियों ने सीसीटीवी फुटेज की जांच की तो महिला की संदिग्ध गतिविधि सामने आई। इसके बाद कोर्ट के चीफ एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर नेत्रा ने स्थानीय पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद चिक्काबल्लापुर टाउन पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और उपलब्ध वीडियो फुटेज के आधार पर महिला की पहचान कर उसे गिरफ्तार कर लिया।

किस कानून के तहत हुई कार्रवाई

पुलिस ने मंजुला के खिलाफ 'कर्नाटक अमानवीय कुप्रथाओं और काले जादू की रोकथाम और उन्मूलन अधिनियम, 2017' के तहत मामला दर्ज किया है। यह कानून राज्य में अंधविश्वास, काले जादू और ऐसी किसी भी गतिविधि पर रोक लगाने के उद्देश्य से बनाया गया है, जिन्हें शोषणकारी, अमानवीय या समाज के लिए हानिकारक माना जाता है। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।

सिविल केस से जुड़ा बताया जा रहा है मामला

प्रारंभिक जांच में पुलिस को संदेह है कि महिला किसी सिविल विवाद में पक्षकार थी। जांच अधिकारियों का मानना है कि उसने अदालत की कार्यवाही या फैसले को अपने पक्ष में प्रभावित करने की उम्मीद से यह कथित अनुष्ठान किया। हालांकि पुलिस अभी इस बात की पुष्टि करने में जुटी है कि महिला किस मामले में अदालत आई थी और उसके इस कथित टोटके का उस सिविल विवाद से क्या संबंध था।

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14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजी गई

गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने महिला को अदालत में पेश किया। सुनवाई के बाद कोर्ट ने उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। इस दौरान पुलिस मामले से जुड़े सभी तथ्यों की जांच कर रही है और यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस कथित घटना में किसी अन्य व्यक्ति की भी कोई भूमिका थी या नहीं।

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पुलिस कई पहलुओं से कर रही जांच

जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि महिला ने कथित तौर पर जिन वस्तुओं का इस्तेमाल किया, वे कहां से लाई गई थीं और क्या किसी ने उसे ऐसा करने की सलाह दी थी। इसके अलावा पुलिस यह भी जांच कर रही है कि यह पूरी घटना पूर्व नियोजित थी या महिला ने व्यक्तिगत अंधविश्वास के कारण यह कदम उठाया।

CCTV बना सबसे बड़ा सबूत

इस पूरे मामले में सबसे अहम भूमिका कोर्ट परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की रही। अगर फुटेज रिकॉर्ड न होती तो संभवतः घटना की जानकारी सामने नहीं आ पाती। पुलिस ने भी माना है कि वीडियो रिकॉर्डिंग की मदद से आरोपी की पहचान करना और उसके खिलाफ कार्रवाई करना आसान हो गया। कर्नाटक सरकार ने वर्ष 2017 में 'कर्नाटक अमानवीय कुप्रथाओं और काले जादू की रोकथाम एवं उन्मूलन अधिनियम' लागू किया था। इस कानून का उद्देश्य समाज में अंधविश्वास और काले जादू जैसी प्रथाओं पर रोक लगाना तथा लोगों को इनके नाम पर होने वाले शोषण से बचाना है। यदि कोई व्यक्ति ऐसी प्रतिबंधित गतिविधियों को बढ़ावा देता है या उनमें शामिल पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का फोकस इस बात पर है कि कथित टोटके के पीछे वास्तविक उद्देश्य क्या था और क्या इस घटना से जुड़ा कोई अन्य पहलू भी सामने आता है।
  
  

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