नारी डेस्क: समुद्री क्रूज यात्राओं को आम तौर पर आरामदायक और विलासितापूर्ण छुट्टियों के रूप में प्रचारित किया जाता है, लेकिन सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए ये जहाज यह समझने का भी महत्वपूर्ण माध्यम हैं कि संक्रामक बीमारियां किस तरह तेजी से फैल सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, क्रूज जहाज अस्थायी तैरते शहरों की तरह होते हैं जहां हजारों लोग कई दिन तक एक ही जगह पर रहते, खाते, घूमते और मनोरंजन करते हैं। रेस्तरां, थिएटर, लिफ्ट, केबिन, रसोईघर, जल प्रणाली और बंद सामुदायिक स्थान संक्रमण के प्रसार को आसान बना देते हैं। एक बार कोई संक्रमण जहाज पर पहुंच जाए तो उसे रोकना बेहद कठिन हो सकता है।

'डायमंड प्रिंसेस' जहाज में फैला था संक्रमित
'डायमंड प्रिंसेस' जहाज से कोविड 19 का प्रसार इसका सबसे चर्चित उदाहरण माना जाता है। वर्ष 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान 'डायमंड प्रिंसेस' जहाज पर 619 यात्री और चालक दल के सदस्य संक्रमित पाए गए थे। विशेषज्ञों के अनुसार, क्रूज जहाजों से सबसे अधिक जुड़ी बीमारी नॉरोवायरस है, जिसे आम बोलचाल में ''वोमिटिंग बग'' भी कहा जाता है। पूर्व में प्रकाशित अध्ययनों की समीक्षा में शोधकर्ताओं को क्रूज जहाजों पर नॉरोवायरस संक्रमण के 127 मामले मिले। इनमें से कई मामले दूषित भोजन, संक्रमित सतहों और व्यक्ति से व्यक्ति में संक्रमण फैलने से जुड़े थे। अमेरिका से प्राप्त हालिया एक रिपोर्ट के अनुसार भी नॉरोवायरस जहाजों पर बहुत तेजी से फैल सकता है।
कितने दिनों तक एक साथ रहने से बढ़ता है वायरस
विशेषज्ञों का कहना है कि जहाजों पर भोजन व्यवस्था संक्रमण फैलाने में बड़ी भूमिका निभाती है। बुफे शैली में भोजन परोसना, साझा बर्तनों का इस्तेमाल और बड़ी संख्या में लोगों का एक ही सतह को छूना पेट संबंधी संक्रमणों के प्रसार को आसान बना देता है। यदि कोई व्यक्ति संक्रमित है लेकिन उसमें अभी लक्षण दिखाई नहीं दे रहे, तो भी वह भोजन या सतहों को संक्रमित कर सकता है। जहाज की बनावट भी इस समस्या को बढ़ाती है। यात्री भोजन कक्षों, बार, थिएटर, गलियारों, स्पा और लिफ्ट जैसे स्थानों पर लगातार एक-दूसरे के संपर्क में रहते हैं। चालक दल के सदस्य भी साझा आवासों में रहते और काम करते हैं, जिससे संक्रमण यात्रियों और कर्मचारियों के बीच आसानी से फैल सकता है।

वेंटिलेशन भी है एक और कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, वेंटिलेशन यानी हवा के आवागमन की व्यवस्था भी बेहद महत्वपूर्ण है। हालांकि क्रूज जहाज पूरी तरह बंद नहीं होते, लेकिन लोग लंबे समय तक बंद और भीड़भाड़ वाले स्थानों में रहते हैं। यदि वेंटिलेशन प्रणाली पर्याप्त प्रभावी न हो तो संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। अध्ययनों में पाया गया है कि ताजी हवा का पर्याप्त प्रवाह, विशेष फिल्टर और वायु शुद्धिकरण तकनीक यात्रियों को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लेजियोनैरेज बीमारी बैक्टीरिया से होने वाला गंभीर फेफड़ों का संक्रमण है। यह आम तौर पर व्यक्ति से व्यक्ति में नहीं फैलता, बल्कि दूषित जल प्रणालियों, हॉट टब या शॉवर से निकलने वाली सूक्ष्म बूंदों के जरिए फैल सकता है। एक मामले में क्रूज यात्रियों में फैला संक्रमण जहाज के व्हर्लपूल स्पा से जुड़ा पाया गया था।
इस तरह बच सकते हैं वायरस से
कोविड-19 और इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारियां बंद स्थानों और भीड़ में तेजी से फैलती हैं, जबकि नॉरोवायरस भोजन और सतहों के जरिए तेजी से फैलता है। वहीं हंटावायरस जैसे संक्रमण अपेक्षाकृत दुर्लभ हैं, लेकिन सीमित जगहों में रहने से उनका प्रसार भी आसान हो सकता है। विशेषज्ञों ने यात्रियों को सलाह दी है कि यात्रा से पहले यह सुनिश्चित करें कि क्रूज कंपनी के पास बीमारी की रिपोर्टिंग, सफाई और पृथकवास संबंधी स्पष्ट नीतियां हों। नियमित टीकाकरण अद्यतन होना चाहिए और बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं तथा पहले से बीमार लोगों को यात्रा से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। यात्रा के दौरान साबुन और पानी से हाथ धोना नॉरोवायरस जैसे संक्रमणों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका बताया गया है। केवल हैंड सैनिटाइजर पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं माना जाता। यदि किसी यात्री को अस्वस्थता महसूस हो, तो उसे बुफे और भीड़भाड़ वाले स्थानों से बचना चाहिए तथा लक्षण छिपाने के बजाय तुरंत जानकारी देनी चाहिए। क्रूज जहाज यह याद दिलाते हैं कि सार्वजनिक स्वास्थ्य केवल कीटाणुओं से नहीं, बल्कि डिजाइन और साझा वातावरण से भी प्रभावित होता है।