नारी डेस्क: अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर महिलाओं की उपलब्धियों और अधिकारों की चर्चा अक्सर होती है, लेकिन उनकी सबसे बड़ी चुनौती – स्वास्थ्य – पर बहुत कम ध्यान दिया जाता है। ग्लोबल रिपोर्ट्स और रिसर्च बताते हैं कि दुनिया भर में महिलाएं पुरुषों की तुलना में ज्यादा उम्र तक जीवित रहती हैं, लेकिन उनका जीवन कई साल बीमारियों और तकलीफों के बीच गुजरता है।
महिलाओं की लंबी उम्र और बीमारी का जुड़ाव
BMJ और यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन की स्टडीज के अनुसार, महिलाएं पुरुषों से ज्यादा लंबी उम्र जीती हैं, लेकिन उनके शरीर में बीमारियों का बोझ अधिक होता है। साल 2024 की एक स्टडी में लगभग 30 साल के हेल्थ डेटा का विश्लेषण किया गया, जिसमें पाया गया कि यह अंतर किशोरावस्था से ही शुरू हो जाता है और उम्र बढ़ने के साथ बढ़ता रहता है। साधारण भाषा में कहें तो पुरुष अक्सर हार्ट अटैक, गंभीर इंफेक्शन या एक्सीडेंट जैसी जानलेवा बीमारियों से असमय मृत्यु का शिकार हो जाते हैं। जबकि महिलाएं लंबे समय तक जीवित रहती हैं, लेकिन उनका जीवन दर्द, थकान और दवाइयों के सहारे गुजरता है।

महिलाओं में आम बीमारियां
महिलाओं में जो बीमारियां ज्यादा देखी जाती हैं, वे जानलेवा नहीं होतीं, लेकिन शरीर को कमजोर कर देती हैं। इनमें शामिल हैं
आर्थराइटिस और हड्डियों का दर्द – उम्र बढ़ने के साथ जोड़ों में सूजन और दर्द महिलाओं को रोजमर्रा के कामों में परेशानी देता है।
माइग्रेन और सिरदर्द – हार्मोनल बदलाव और तनाव की वजह से अक्सर महिलाओं को माइग्रेन की समस्या होती है।
पीठ दर्द – घर और ऑफिस की जिम्मेदारियों के चलते लंबे समय तक बैठे रहने या भारी सामान उठाने से पीठ में दर्द बढ़ता है।
मेंटल हेल्थ इश्यूज – एंजायटी, डिप्रेशन और तनाव जैसी समस्याएं महिलाओं में ज्यादा देखी जाती हैं।
इन बीमारियों की वजह से महिलाएं अपनी लंबी उम्र का एक बड़ा हिस्सा असहज और बीमारियों के बीच बिताती हैं।

पुरुषों में जानलेवा बीमारियों का खतरा
पुरुषों में ज्यादा जानलेवा बीमारियां देखने को मिलती हैं। इनमें हार्ट अटैक, शराब और धूम्रपान से जुड़ी बीमारियां, फेफड़ों की समस्याएं और सड़क दुर्घटनाएं शामिल हैं। यही कारण है कि पुरुषों की औसत उम्र महिलाओं की तुलना में कम होती है।
लड़कियों में स्वास्थ्य समस्याओं की शुरुआत
यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन की शोधकर्ता लुइसा सोरियो फ्लोर बताती हैं कि यह अंतर 10-12 साल की उम्र से ही दिखाई देने लगता है। हार्मोनल बदलाव और सामाजिक दबाव की वजह से लड़कियों में मानसिक स्वास्थ्य और शारीरिक दर्द की शिकायतें लड़कों से पहले शुरू हो जाती हैं। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, ये छोटी-छोटी तकलीफें जमा होती जाती हैं और महिलाओं का शरीर पुरुषों के मुकाबले ज्यादा कमजोर हो जाता है।
महिलाओं को लंबी उम्र का जैविक वरदान
महिलाओं को लंबी उम्र का लाभ उनके शरीर में मौजूद एस्ट्रोजन हार्मोन देता है, जो मेनोपॉज तक उनके दिल की सुरक्षा करता है। लेकिन सामाजिक जिम्मेदारियों और परिवार की देखभाल की वजह से महिलाएं अक्सर अपनी सेहत को नजरअंदाज कर देती हैं। छोटी बीमारियों का इलाज न करने की वजह से ये समय के साथ क्रोनिक डिजीज में बदल जाती हैं। यही कारण है कि महिलाओं को उम्रदराज होने पर भी लगातार बीमारियों से जूझना पड़ता है।

जेंडर-विशेष स्वास्थ्य योजनाओं की जरूरत
वैज्ञानिकों का कहना है कि अब समय आ गया है कि सरकारें और डॉक्टर महिलाओं और पुरुषों के स्वास्थ्य को अलग-अलग नजरिए से देखें। महिलाओं के लिए ऐसी स्वास्थ्य योजनाएं बनानी चाहिए जो उनकी पुरानी बीमारियों और क्रोनिक हेल्थ इश्यूज पर ध्यान दें। पुरुषों के लिए ऐसी रणनीतियां बनानी चाहिए जो उन्हें रिस्क लेने वाली आदतों, दिल की बीमारियों और एक्सीडेंट से बचा सकें। बिना जेंडर-स्पेसिफिक हेल्थ स्ट्रेटेजी के यह अंतर नहीं मिटाया जा सकता। महिलाओं को कुदरत ने लंबी उम्र तो दी है, लेकिन उस उम्र को खुशहाल और स्वस्थ बनाने के लिए उन्हें अपनी सेहत को प्राथमिकता देनी होगी। सिर्फ जीवित रहना ही काफी नहीं, बल्कि बीमारियों से मुक्त और सेहतमंद जीवन जीना जरूरी है।
घर, ऑफिस और समाज की जिम्मेदारियों के बीच महिलाओं को अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखना चाहिए, ताकि उनकी लंबी उम्र वास्तव में सुखद और सक्रिय हो।