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नींबू और मिर्च को फ्रिज में साथ क्यों नहीं रखना चाहिए?

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 06 Mar, 2026 03:15 PM
नींबू और मिर्च को फ्रिज में साथ क्यों नहीं रखना चाहिए?

नारी डेस्क: प्रसिद्ध कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने हाल ही में अपने प्रवचन में नींबू और मिर्च को फ्रिज में एक साथ रखने से बचने की सलाह दी है। उनका मानना है कि इन दोनों को अलग-अलग रखना घर में शांति और सकारात्मकता बनाए रखने के लिए जरूरी है। देवकीनंदन ठाकुर के अनुसार, नींबू और मिर्च दोनों ही तीव्र प्रकृति की चीजें हैं। धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, ये दोनों ऊर्जा से जुड़ी वस्तुएं हैं। जब इन्हें एक साथ रखा जाता है, तो यह घर में अशांति और क्लेश का कारण बन सकता है। इसलिए इन्हें अलग-अलग डिब्बे या स्थानों पर रखना उचित माना जाता है। उन्होंने इसे समझाने के लिए उदाहरण दिया कि मिर्च खाने पर शरीर में तुरंत तीखापन महसूस होता है, जबकि नींबू पीने पर खट्टापन तेज लगता है। दोनों की प्रकृति अलग-अलग प्रतिक्रिया देती है और प्रतीकात्मक रूप से घर के माहौल पर भी इसका असर पड़ सकता है।

फ्रिज में अलग रखने की सलाह क्यों दी?

आजकल अधिकतर घरों में फ्रिज मौजूद हैं और लोग सब्जियां और फल अक्सर एक ही जगह पर रख देते हैं। छोटी टोकरी या डलिया में लोग अक्सर मिर्च और नींबू दोनों एक साथ डाल देते हैं। देवकीनंदन ठाकुर ने ऐसी आदत से बचने की सलाह दी। उनके अनुसार, यदि नींबू और मिर्च को एक साथ रखा जाए, तो कभी-कभी घर में अनावश्यक तनाव, वाद-विवाद और क्लेश की स्थिति बन सकती है। इसलिए सावधानी के तौर पर इन्हें अलग-अलग रखना बेहतर माना जाता है।

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फ्रिज और पारंपरिक जीवनशैली पर प्रभाव

देवकीनंदन ठाकुर ने प्रवचन में आधुनिक जीवनशैली का भी जिक्र किया। पहले लोग मटके में पानी पीते थे, जो शरीर के लिए प्राकृतिक और आरामदायक माना जाता था। आजकल फ्रिज के आने से यह परंपरा धीरे-धीरे खत्म हो रही है। उनका कहना है कि मटके का पानी शरीर को संतुलित और ठंडक देता है, जबकि फ्रिज का अत्यधिक ठंडा पानी कई बार स्वास्थ्य के लिए परेशानी पैदा कर सकता है।

धार्मिक और पारंपरिक मान्यताएं

भारतीय परंपराओं में नींबू और मिर्च को अलग रखने की सलाह घर की सकारात्मक ऊर्जा और शांति से जोड़कर देखी जाती है। कुछ लोग इसे आस्था के रूप में मानते हैं, जबकि अन्य इसे परंपरा का हिस्सा मानते हैं। हालांकि इस बात का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, फिर भी यह मान्यता जीवन को अनुशासित और संतुलित रखने का संदेश देती है।  

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