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कोडवा परंपरा से हुई Rashmika- Vijay की शादी, जिसमें दूल्हे के परिवार को मिलते हैं 12 पत्थर

  • Edited By Vandana,
  • Updated: 28 Feb, 2026 08:22 PM
कोडवा परंपरा से हुई Rashmika- Vijay की शादी, जिसमें दूल्हे के परिवार को मिलते हैं 12 पत्थर

नारी डेस्कः तेलुगु स्टार विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना, दोनों अब ऑफिशियल कपल बन गए हैं। दोनों की वेडिंग तस्वीरें इस समय सोशल मीडिया में खूब वायरल हो रही हैं। जहां एक ओर कपल की टेंपल ज्वैलरी के चर्चे हो रहे हैं वहीं शादी के रीति-रिवाज और कोडवा परंपरा पर भी बात हो रही हैं। 

रश्मिका, कोडागु ज़िले (कुर्ग) के विराज पेटा की रहने वाली हैं। आमतौर पर कर्नाटक के कोडागु (कुर्ग) क्षेत्र में लोग कोडवा परंपरा से विवाह करते हैं और यहां के लोगों को भी कोडवा कहा जाता है। रश्मिका भी कोडागु से संबंध रखती हैं तो इसलिए ये अंदाजा लगाया जा रहा है कि ये शादी इसी परंपरा से हुई होगी हालांकि कपल ने पब्लिकली नहीं बताया कि उनकी शादी किस परंपरा के अनुसार संपन्न हुई है। 
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कोडवा विवाह क्या होता?

कोडवा विवाह, सामान्य हिन्दू विवाह से काफी अलग होता है। जैसे हिंदू विवाह में पंडित के मंत्रोच्चारण, मंगलसूत्र बांधना जैसे कई वैदिक अनुष्ठान होते हैं लेकिन कोडवा परंपरा में पंडित दिखाई नहीं देते। घर के बड़े-बुज़ुर्ग ही विवाह संपन्न कराते हैं। विवाह मंडप में एक दीप जलाया जाता है और पित्रों की पूजा की जाती है। कोडवा क्लैन डॉट कॉम के अनुसार, कोडवा विवाह आम तौर पर दो दिन चलता है।

पहला दिन- पंडाल और तैयारियां

पहले दिन दूल्हा और दुल्हन का परिवार विवाह वाली जगह पर पहुंचते हैं और शादी का पंडाल लगाया जाता है। पंडाल को आम, केले के पत्ते और कटहल की टहनियों से सजाया जाता है। एक तेलुगु विद्वान के मुताबिक, पंडाल के खंभे भी ऐसे पेड़ों की लकड़ी से बनाए जाते हैं जिनसे दूध जैसा रस निकलता हो। इसके बाद विवाह का भोज तैयार करने वाले लोग और परिवारिक सदस्य सब मिलकर काम करते हैं। इस पूरी प्रक्रिया को 'ऊर कोडुओ', 'पंदाल पनी' या 'तेरनेबेप्पो' कहा जाता है। कहा जाता है कि कोडवा परंपरा में शादी के भोज में सूअर का मांस परोसना अनिवार्य माना जाता है।
तेलुगु विद्वान के मुताबिक, शादी में नॉन-वेज खाना ज़रूर होता है, खासकर सूअर का मांस।"
 

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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दूसरे दिन को मंगला कहा जाता है...

सुबह दूल्हे के चेहरे को दूध लगाकर शेविंग करवाई जाती है उसके बाद मंगल स्नान, जिसमें दूल्हे की मां और दो विवाहित महिलाएं शामिल होती हैं। इसके बाद दूल्हा कुप्पया (परंपरागत कोडवा पोशाक) पहनता है और कमर में कद्र-कत्थी (कमर में धारण की जाने वाली परंपरागत तलवार) रखता है हालांकि विजय की जो तस्वीरें वायरल हुई हैं उसमें वह कोडवा पोशाक पहने नहीं दिखे। वह कमर में सोने की कमरबंद और ऊपर लाल कपड़ा पहने दिखे थे।

दुल्हन मंगल स्नान के बाद चूड़ियां और सुनहरी किनारी वाली लाल रंग की साड़ी पहनती हैं। विवाह मंडप के रास्ते को केले के तनों और फूलों से सजाया जाता है और फिर दुल्हन या दूल्हे का मामा एक ही वार में तलवार से इन तनों को काटता है, हालांकि कुछ जगह पर ये रस्म दूल्हा करता है।कटाई के बाद दूल्हा–दुल्हन मंडप के चारों ओर तीन परिक्रमा करते हैं और पूर्व दिशा की ओर बैठते हैं।

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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आशीर्वाद की रस्म

इसके बाद आशीर्वाद की रस्में होती हैं। पहले मां, फिर पिता और फिर बाकी बड़े बुज़ुर्ग आशीर्वाद देते हैं। इसके बाद दुल्हन दूल्हे को दूध, उपहार और सोना–चांदी–तांबे के सिक्कों वाला थैला देती है। दोनों फूलों की माला बदलते हैं। इसके बाद बुज़ुर्ग उस दीपक के सामने घोषणा करते हैं, "अब दुल्हन की ज़िम्मेदारी दूल्हे को सौंपी जाती है।"
 

दूल्हे के घरवालों को 12 पत्थर देने की रस्म

फिर दुल्हन के घरवाले, दूल्हे के घरवालों को 12 कंकड़/पत्थर देते हैं, जिसका मतबल है, "हम दुल्हन के सभी अधिकार आपको सौंपते हैं।"दूल्हे के घरवाले 11 कंकड़ रख लेते हैं और एक छोड़ देते हैं, जिसका अर्थ है कि आवश्यकता पड़ने पर दुल्हन पर उनका अधिकार रहेग। उसके बाद दूल्हा दुल्हन को लेकर विवाह मंडप से निकलता है। कोडवा शादी में मंगलसूत्र बेहद छोटा होता है।पहले महिलाओं को भोजन परोसा जाता है ये भी कोडवा परंपरा का ही हिस्सा है। शाम को दुल्हन गंगा पूजा करती है और उसके पैरों में पारंपरिक पायल पहनाई जाती है। दुल्हन कुएं में सुपारी, बेलपत्र, अक्षत, नारियल के टुकड़े पानी में डालकर पूजा करती है और उसी पानी को एक घड़े में भरकर लाती है। वो घड़ा विवाह दीपक के सामने रखा जाता है, जिसका अर्थ है कि दुल्हन अब अपने ससुराल में गृहलक्ष्मी के रूप में प्रवेश कर चुकी है।

अंतिम रस्म 'कोम्बारेक कोतुवावो

शादी की अंतिम रस्म 'कोम्बारेक कोतुवावो' होती है। दूल्हा दुल्हन को अपने कमरे में आमंत्रित करता है, दुल्हन के चेहरे से घूंघट हटाता है और उसे गोल्ड वेडिंग बैंड भेंट करता है और इस तरह ये विवाह संस्कार संपन्न होता है। 

नोटः सारी जानकारी इंटरनेट के माध्यम से साझा की गई है।
 

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