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कहीं बरसते हैं लड्डू ताे कहीं चलती है लाठियां...  जिंदगी में एक बार जरूर देखें यहां की होली

  • Edited By vasudha,
  • Updated: 24 Feb, 2026 08:31 PM
कहीं बरसते हैं लड्डू ताे कहीं चलती है लाठियां...  जिंदगी में एक बार जरूर देखें यहां की होली

नारी डेस्क:  बरसाना, वृंदावन और मथुरा में दुनिया भर में मशहूर होली का जश्न देखने के लिए देश-विदेश से हजारों भक्त और टूरिस्ट ब्रज इलाके में पहुंचने लगे हैं। मंगलवार को पारंपरिक त्योहारों की रस्मों के साथ औपचारिक शुरुआत हुई। बरसाना की महिलाओं के ग्रुप नंदगांव आए और मशहूर लट्ठमार होली का न्योता दिया। इस पारंपरिक लेन-देन के साथ, इलाके में फाग (होली) का जश्न आधिकारिक तौर पर शुरू हो गया। बाद में शाम को, मशहूर श्री राधा रानी मंदिर (लाडली जी मंदिर) के आंगन में लड्डू प्रसाद बांटा गया, जिसमें भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। 

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सदियों पुरानी है होली की परंपरा

आने वालों ने सदियों पुरानी परंपराओं को देखकर गहरी खुशी जताई। मुंबई से एक भक्त ने कहा- “हम मुंबई से आए हैं, और यहां आकर बहुत अच्छा लग रहा है। सब कुछ बहुत खूबसूरत लग रहा है। इन सेलिब्रेशन को देखना बहुत अच्छा लग रहा है।” एक और विज़िटर ने इस अनुभव को “खुशी और रूहानी खुशी से भरा” बताया, और कहा कि हर किसी को इसे कम से कम एक बार देखना चाहिए। अधिकारियों ने तीर्थयात्रियों की भारी भीड़ को मैनेज करने के लिए पूरे इंतज़ाम किए हैं।  भीड़भाड़ रोकने के लिए एंट्री और एग्जिट के लिए अलग-अलग रास्ते बनाए गए हैं, जबकि भक्तों को आसानी से दर्शन पक्का करने के लिए रेगुलेटेड तरीके से मंदिरों तक पहुंचने दिया जा रहा है।


जिंदगी में एक बार जरूर देखें मथुरा-वृंदावन की होली

मथुरा और ब्रज क्षेत्र की होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि परंपरा, भक्ति और उत्साह का अनोखा संगम है। यहां होली कई दिनों तक अलग-अलग अंदाज़ में खेली जाती है। क्योंकि यह भगवान श्रीकृष्ण और राधा से जुड़ी लीलाओं पर आधारित है। यहां की होली में भक्ति, संगीत, नृत्य और परंपरा का अनोखा मेल देखने को मिलता है। अगर आप जिंदगी में एक बार “असली ब्रज की होली” देखना चाहते हैं, तो मथुरा-वृंदावन की होली जरूर अनुभव करें। 

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लठमार होली को दूर- दूर से देखने आते हैं लोग 

यह होली सबसे ज्यादा चर्चित है। परंपरा के अनुसार, यहां महिलाएं पुरुषों को लाठी से मजाकिया अंदाज में मारती हैं और पुरुष ढाल से बचाव करते हैं। यह आयोजन राधा रानी मंदिर के पास होता है और देश-विदेश से लोग इसे देखने आते हैं। बरसाना के बाद नंदगांव में होली खेली जाती है। यहां पुरुष और महिलाएं रंग-गुलाल के साथ पारंपरिक गीतों और नृत्य का आनंद लेते हैं। माहौल पूरी तरह भक्तिमय और उत्साह से भरा होता है।


फूलों की होली – बांके बिहारी मंदिर

वृंदावन के इस प्रसिद्ध मंदिर में रंगों की जगह फूलों से होली खेली जाती है। पुजारी और भक्त एक-दूसरे पर फूल बरसाते हैं। यह दृश्य बेहद सुंदर और मनमोहक होता है। वृंदावन में कुछ सालों से विधवाओं द्वारा होली खेलने की परंपरा शुरू हुई है। यह सामाजिक बदलाव और खुशियों की नई शुरुआत का प्रतीक मानी जाती है। यह होली से कुछ दिन पहले मनाई जाती है। इस दिन मंदिरों में भगवान को गुलाल अर्पित किया जाता है और भक्त रंगों के साथ उत्सव मनाते हैं।
 

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