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सबसे बड़ी सजा है अकेलापन, जीवनसाथी के बाद डिप्रेशन और तनाव में जी रहे हमारे देश के बुजुर्ग

  • Edited By vasudha,
  • Updated: 18 Mar, 2026 10:30 AM
सबसे बड़ी सजा है अकेलापन, जीवनसाथी के बाद डिप्रेशन और तनाव में जी रहे हमारे देश के बुजुर्ग

नारी डेस्क: आजकल कई लोग किसी कारणवश अकेले (Solo Aging) जीवन जी रहे हैं। ऐसे में उम्र बढ़ने के साथ मानसिक और शारीरिक सेहत से जुड़ी चुनौतियां बढ़ सकती हैं। खासकर जब साथ में कोई जीवनसाथी या करीबी सपोर्ट सिस्टम न हो, तो इसका असर सीधे स्वास्थ्य पर पड़ता है। इजरायल की बार-इलान यूनिवर्सिटी के एक शोध ने खुलासा किया है कि भारत में जीवनसाथी को खोने वाले (विधवा/विधुर) बुजुर्गों की सेहत व 'हेल्दी एजिंग' पर इसका गहरा नकारात्मक असर पड़ रहा है। 

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क्यों बढ़ती हैं समस्याएं?

अकेलापन और भावनात्मक खालीपन: अकेले रहने से धीरे-धीरे लोनलीनेस (Loneliness) बढ़ने लगती है। इससे मन में उदासी और खालीपन महसूस होता है।

डिप्रेशन और मानसिक तनाव: लगातार अकेलेपन के कारण अवसाद (Depression) और चिंता (Anxiety) का खतरा बढ़ जाता है। बात करने या अपनी भावनाएं साझा करने वाला कोई न हो तो समस्या और गहरी हो सकती है।

शारीरिक गतिविधि में कमी: अकेले रहने वाले लोग अक्सर कम एक्टिव हो जाते हैं, जिससे वजन बढ़ना, कमजोरी, हड्डियों और मांसपेशियों में दर्द जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। 

हेल्थ का ध्यान कम रखना: कई बार अकेले व्यक्ति अपनी सेहत को नजरअंदाज करने लगते हैं समय पर खाना, दवा या चेकअप नहीं कराते।


एकाकी जीवन बिता रहे हैं कई लोग

महिलाओं के लिए अकेला जीवन ज्यादा समस्याएं लेकर आता है। स्टडी में 45 साल से अधिक उम्र के लोग शामिल किए गए। अध्ययन से पता चला कि अकेलापन जीवन में कई बड़े बदलाव लाता है। रिपोर्ट में शामिल करीब 64,500 नागरिकों में से 23% बिना जीवनसाथी के रह रहे हैं। दो हजार नागरिक तो बिना किसी परिवार या मित्र के एकाकी जीवन बिता रहे हैं। करीब 11% ने बताया कि वे सामाजिक गतिविधियों में शामिल होने से बचते हैं। इनमें से अधिकतर बिना जीवनसाथी के हैं। इससे उनकी इम्यूनिटी कमजोर होने लगती है,  नींद की समस्या बढ़ती है।  हार्ट और ब्लड प्रेशर से जुड़ी दिक्कतें आती है। याददाश्त और फोकस में कमी होती है। 

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खुद को हेल्दी रखने के टिप्स 

सोशल कनेक्शन बनाए रखें: परिवार, दोस्तों या पड़ोसियों से नियमित बातचीत करें। फोन, वीडियो कॉल या ग्रुप एक्टिविटी मददगार होती है।

एक्टिव लाइफस्टाइल अपनाएं: रोजाना वॉक, योग या हल्की एक्सरसाइज करें।

रूटीन बनाएं: समय पर खाना, सोना और उठना एक सही दिनचर्या मानसिक स्थिरता देती है।

 हॉबी अपनाएं: पढ़ना, संगीत, गार्डनिंग या कोई नया कौशल सीखना मन को व्यस्त और खुश रखता है।

जरूरत पड़े तो मदद लें: अगर ज्यादा उदासी या तनाव महसूस हो, तो डॉक्टर या काउंसलर से बात करें।
 

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