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बैसाखी के लिए 2238 सिख तीर्थयात्री पहुंचे पाकिस्तान, करेंगे ननकाना साहिब के दर्शन

  • Edited By Monika,
  • Updated: 11 Apr, 2026 07:39 PM
बैसाखी के लिए 2238 सिख तीर्थयात्री पहुंचे पाकिस्तान, करेंगे ननकाना साहिब के दर्शन

नारी डेस्क : बैसाखी पर्व (खालसा स्थापना दिवस) के अवसर पर शुक्रवार को भारत से करीब 2,238 सिख तीर्थयात्री अटारी-वाघा बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान पहुंचे। यह 10 दिवसीय धार्मिक यात्रा श्रद्धा और आस्था का एक बड़ा उदाहरण मानी जा रही है, जिसमें श्रद्धालु सिख धर्म से जुड़े कई ऐतिहासिक और पवित्र गुरुद्वारों के दर्शन करेंगे।

ननकाना साहिब से लेकर करतारपुर साहिब तक यात्रा

इस धार्मिक जत्थे में शामिल श्रद्धालु पाकिस्तान के प्रमुख गुरुद्वारों में मत्था टेकेंगे, जिनमें शामिल हैं, 
गुरुद्वारा ननकाना साहिब (गुरु नानक देव जी का जन्मस्थान)
गुरुद्वारा पंजा साहिब (हसन अब्दाल)
गुरुद्वारा करतारपुर साहिब (गुरु नानक देव जी का अंतिम विश्राम स्थल)
गुरुद्वारा सच्चा सौदा साहिब (फारूकाबाद)
गुरुद्वारा डेरा साहिब (लाहौर)
गुरुद्वारा रोरी साहिब (एमिनाबाद)

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यात्रा का कार्यक्रम

जानकारी के अनुसार, तीर्थयात्री ननकाना साहिब में दो दिन ठहरने के बाद हसन अब्दाल स्थित गुरुद्वारा पंजा साहिब के लिए रवाना होंगे। वहीं, 14 अप्रैल को यहां बैसाखी का मुख्य समारोह आयोजित किया जाएगा। इसके बाद यह जत्था 19 अप्रैल को भारत वापस लौटेगा।

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वीजा और व्यवस्थाएं

पाकिस्तान उच्चायोग ने इस यात्रा के लिए 2,800 से अधिक वीजा जारी किए थे। पाकिस्तान की ओर से श्रद्धालुओं के स्वागत, लंगर सेवा और परिवहन की विशेष व्यवस्था की गई है, ताकि तीर्थयात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

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SGPC का जत्था भी शामिल

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने भी स्वर्ण मंदिर परिसर से लगभग 1,763 तीर्थयात्रियों का जत्था भेजा है। इस दल का नेतृत्व SGPC के पदाधिकारियों द्वारा किया जा रहा है। SGPC के अधिकारियों ने दोनों देशों की सरकारों से करतारपुर कॉरिडोर को फिर से खोलने की अपील की है, जो 2025 से बंद है। उनका कहना है कि इससे श्रद्धालुओं को धार्मिक स्थलों तक पहुंचने में आसानी होगी।

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जानें बैसाखी सिख धर्म में क्यों विशेष है

बैसाखी सिख धर्म में विशेष महत्व रखती है क्योंकि इसी दिन 1699 में गुरु गोविंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। 1950 के नेहरू-लियाकत समझौते के तहत सिख तीर्थयात्रियों को कुछ विशेष धार्मिक अवसरों पर पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारों के दर्शन की अनुमति दी गई है। हालांकि, 2025 के घटनाक्रमों के बाद सीमा पार यात्रा पर कई प्रतिबंध लगाए गए थे, फिर भी यह जत्था अब तक का सबसे बड़ा सिख तीर्थयात्रा समूह माना जा रहा है।

बैसाखी के इस पावन अवसर पर भारत से पाकिस्तान तक पहुंची यह तीर्थयात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारत-पाकिस्तान के बीच सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जुड़ाव को भी दर्शाती है।

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