नारी डेस्क: मशहूर कॉमेडियन और यूट्यूबर समय रैना ने हाल ही में चौंकाने वाला खुलासा किया है। ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ विवाद के बाद उन्हें न सिर्फ भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा, बल्कि उनकी मानसिक और शारीरिक सेहत पर भी इसका गहरा असर पड़ा। लगातार ट्रोलिंग, कानूनी परेशानियों और करीब 8 करोड़ रुपये के नुकसान के चलते समय को एंग्जायटी अटैक आने लगे थे। उन्होंने यह भी बताया कि इस दौरान उन्हें नींद की गोलियां तक लेनी पड़ीं। यह मामला एक बार फिर इस बात को उजागर करता है कि मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज करना कितना भारी पड़ सकता है। आइए जानते हैं एंग्जायटी अटैक क्या होता है, इसके लक्षण क्या हैं और इससे कैसे बचा जा सकता है।
क्या होता है एंग्जायटी अटैक?
एंग्जायटी अटैक यानी चिंता का दौरा एक मानसिक स्वास्थ्य समस्या है, जिसमें व्यक्ति को अचानक तेज डर, घबराहट और बेचैनी महसूस होती है, जबकि कोई वास्तविक खतरा मौजूद नहीं होता। यह स्थिति अक्सर पैनिक अटैक जैसी लगती है और कुछ ही मिनटों में अपने चरम पर पहुंच जाती है। आमतौर पर यह 5 से 30 मिनट तक रहता है, लेकिन इसका असर लंबे समय तक महसूस हो सकता है। कई बार लोग इसे हार्ट अटैक समझकर घबरा जाते हैं।

एंग्जायटी अटैक के लक्षण
एंग्जायटी अटैक के दौरान शरीर और दिमाग दोनों प्रभावित होते हैं। इसके प्रमुख लक्षण हैं
अचानक घबराहट और डर का बढ़ जाना
दिल की धड़कन तेज होना
सांस लेने में दिक्कत
सीने में दर्द या जकड़न
चक्कर आना या बेहोशी जैसा महसूस होना
पसीना आना और हाथ-पैर कांपना
ऐसा लगना कि कुछ बुरा होने वाला है
विशेषज्ञों के अनुसार, ये लक्षण इतने तीव्र हो सकते हैं कि व्यक्ति को हार्ट अटैक का भ्रम हो जाता है।
क्यों आते हैं एंग्जायटी अटैक?
एंग्जायटी अटैक के पीछे कई कारण हो सकते हैं
अत्यधिक तनाव और काम का दबाव
आर्थिक या पारिवारिक समस्याएं
किसी पुरानी दर्दनाक घटना (ट्रॉमा) का असर
ज्यादा कैफीन या कुछ दवाओं का सेवन
नींद की कमी और अनियमित दिनचर्या
मस्तिष्क में रसायनों का असंतुलन
आनुवांशिक (जेनेटिक) कारण।

एंग्जायटी अटैक से बचाव के उपाय
मनोचिकित्सकों के अनुसार, सही जीवनशैली अपनाकर इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
ब्रीदिंग एक्सरसाइज: धीरे-धीरे गहरी सांस लेने से दिमाग शांत होता है और घबराहट कम होती है।
योग और मेडिटेशन: नियमित योग और ध्यान तनाव को कम करने में बेहद असरदार हैं।
हेल्दी लाइफस्टाइल: पर्याप्त नींद लें, कैफीन का सेवन कम करें और रोजाना एक्सरसाइज करें।
खुद को व्यस्त रखें: म्यूजिक, पढ़ाई या पसंदीदा गतिविधियों में समय बिताने से मन शांत रहता है।
अटैक आने पर क्या करें?
तुरंत किसी शांत जगह पर बैठ जाएं
गहरी और धीमी सांस लें
खुद को समझाएं कि यह स्थिति अस्थायी है
किसी करीबी व्यक्ति से बात करें।

कब लें डॉक्टर की मदद?
अगर एंग्जायटी अटैक बार-बार आने लगें या आपकी रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगे, तो तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करें।
कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) सबसे प्रभावी इलाज माना जाता है
जरूरत पड़ने पर डॉक्टर दवाएं भी दे सकते हैं
बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेना नुकसानदायक हो सकता है।
एंग्जायटी अटैक जानलेवा नहीं होता, लेकिन इसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। सही समय पर पहचान, इलाज और अपनों का साथ आपको इस समस्या से बाहर निकाल सकता है।