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आखिर क्यों पहनती हैं अनुष्का शर्मा तुलसी की कंठी? जानिए इसके धारण करने के नियम

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 09 Jun, 2026 09:59 AM
आखिर क्यों पहनती हैं अनुष्का शर्मा तुलसी की कंठी? जानिए इसके धारण करने के नियम

नारी डेस्क:  आईपीएल 2026 के फाइनल के बाद जब रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की जीत का जश्न मनाया जा रहा था, तब मैदान पर विराट कोहली के साथ नजर आईं अभिनेत्री अनुष्का शर्मा भी चर्चा में आ गईं। हालांकि इस बार लोगों का ध्यान उनके आउटफिट से ज्यादा उनके गले में पहनी हुई तुलसी की कंठी माला पर गया। सोशल मीडिया पर अनुष्का की तस्वीरें वायरल होने के बाद कई लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर तुलसी की माला का धार्मिक महत्व क्या है और इसे धारण करने से कौन-कौन से लाभ मिलते हैं।

क्यों खास मानी जाती है तुलसी की माला

सनातन धर्म में तुलसी को बेहद पवित्र और पूजनीय माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तुलसी का सीधा संबंध भगवान विष्णु और भगवान श्रीकृष्ण से माना जाता है। यही वजह है कि तुलसी की माला धारण करना केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि भगवान के प्रति श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक भी माना जाता है। मान्यता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और नियमों के साथ तुलसी की कंठी माला धारण करता है, उस पर भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की विशेष कृपा बनी रहती है।

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तुलसी की माला कितने प्रकार की होती है

धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं के अनुसार तुलसी की माला मुख्य रूप से दो प्रकार की मानी जाती है

रामा तुलसी माला

रामा तुलसी के पौधे से तैयार की गई माला को रामा तुलसी माला कहा जाता है। इसका रंग अपेक्षाकृत हल्का होता है और इसे शांति तथा सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है।

श्यामा तुलसी माला

श्यामा तुलसी से बनी माला का रंग थोड़ा गहरा होता है। वैष्णव परंपरा में इसे विशेष महत्व दिया जाता है और इसे भगवान कृष्ण की भक्ति से जोड़कर देखा जाता है।

तुलसी की माला पहनने के आध्यात्मिक लाभ

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तुलसी की माला धारण करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। माना जाता है कि यह माला भय, चिंता और नकारात्मक विचारों को दूर करने में सहायक होती है। कई श्रद्धालुओं का विश्वास है कि तुलसी की माला पहनने से मन में शांति बनी रहती है और ईश्वर के प्रति आस्था मजबूत होती है। नियमित रूप से इसे धारण करने से ध्यान और एकाग्रता में भी सुधार महसूस किया जा सकता है।

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मानसिक शांति और सकारात्मक सोच में मददगार

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव और मानसिक दबाव आम हो गए हैं। ऐसे में कई लोग आध्यात्मिक साधना और धार्मिक प्रतीकों के माध्यम से मानसिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश करते हैं। तुलसी की माला को भी इसी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इसे पहनने से मन शांत रहता है और व्यक्ति के भीतर सकारात्मक सोच विकसित होती है।

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आयुर्वेदिक दृष्टि से भी मानी जाती है उपयोगी

तुलसी को आयुर्वेद में औषधीय गुणों से भरपूर पौधा माना गया है। इसमें कई ऐसे प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माने जाते हैं। हालांकि तुलसी की माला पहनने से होने वाले स्वास्थ्य लाभों को लेकर वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं, लेकिन पारंपरिक मान्यताओं में इसे शरीर और मन दोनों के लिए लाभदायक माना जाता है।

तुलसी की माला धारण करने के नियम

धार्मिक परंपराओं के अनुसार तुलसी की माला धारण करने से पहले उसे गंगाजल से शुद्ध करना शुभ माना जाता है। इसके बाद विधि-विधान से भगवान विष्णु या श्रीकृष्ण का स्मरण कर माला धारण की जाती है।

इन दिनों पहनना माना जाता है शुभ

तुलसी की माला को सोमवार, गुरुवार, एकादशी या पूर्णिमा के दिन धारण करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

खानपान और आचरण का रखें ध्यान

तुलसी की माला धारण करने वाले व्यक्ति को सात्विक जीवनशैली अपनाने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मांसाहार, नशा और गलत आचरण से दूर रहना चाहिए।

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इन परिस्थितियों में उतारने की सलाह

परंपरागत मान्यताओं के अनुसार शौच जाने, अंतिम संस्कार में शामिल होने या वैवाहिक संबंध बनाने से पहले तुलसी की माला उतार देना उचित माना जाता है। अन्य धातुओं की माला के साथ न पहनें धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तुलसी की माला को अन्य धातु की मालाओं के साथ पहनने से बचना चाहिए। इसे अलग और सम्मानपूर्वक धारण करना शुभ माना जाता है।

श्रद्धा और आस्था का प्रतीक है तुलसी की माला

तुलसी की कंठी माला केवल एक धार्मिक आभूषण नहीं है, बल्कि यह भक्ति, अनुशासन और आध्यात्मिक जीवन का प्रतीक मानी जाती है। अनुष्का शर्मा की तस्वीरों के बाद भले ही इसकी चर्चा फिर से तेज हो गई हो, लेकिन सनातन परंपरा में तुलसी की माला का महत्व सदियों से बना हुआ है।इसे धारण करने से पहले इसके नियमों और धार्मिक मान्यताओं को समझना भी उतना ही जरूरी है, ताकि इसकी पवित्रता और महत्व को बनाए रखा जा सके।
    
 

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