15 JULWEDNESDAY2026 11:18:36 AM
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किसी ने बेची जमीन तो किसी की गई नौकरी, Cancer patient बच्चे के लिए सब कुछ दांव पर लगा रहे Parents

  • Edited By vasudha,
  • Updated: 15 Jul, 2026 10:44 AM
किसी ने बेची जमीन तो किसी की गई नौकरी, Cancer patient बच्चे के लिए सब कुछ दांव पर लगा रहे Parents

नारी डेस्क: जब किसी बच्चे को कैंसर का पता चलता है, तो पूरा परिवार प्रभावित होता है। माता-पिता के लिए देखभाल की बढ़ती ज़रूरतों और मानसिक तनाव के कारण काम और परिवार की ज़िम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाना मुश्किल हो सकता है।  बच्चों के कैंसर का इलाज, कैंसर के प्रकार के आधार पर अलग-अलग तरीकों से और अलग-अलग समय तक चलता है, जिसके चलते पूरे परिवार को संघर्ष करना पड़ता है।  दिल्ली एम्स के अध्ययन में के मुताबिक अपने कैंसर पीड़ित बच्चों को जिंदगी देने की जद्दोजहद में एक चौथाई से अधिक (26.6%) माता-पिता की नौकरी छिन गई।

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माता- पिता की छूट गई नौकरी

 अपने घर-गांव से सैकड़ों किलोमीटर दूर अनजान शहर में बच्चे का इलाज कराने की मजबूरी का नतीजा यह हुआ कि कइयों की नौकरी चली गई तो 26.8 प्रतिशत परिवारों को अपनी जमीन-गहने बेचने पड़े।शोध के अनुसार, अपने शहर और कस्बे के नजदीक इलाज की सुविधा नहीं होने से कैंसर पीड़ित 77.1% बच्चों के अभिभावकों को उपचार के लिए बाहर जाना पड़ता है। इस कारण बहुत से माता-पिता का रोजगार छूट गया।


कैंसर से खराब हुआ बच्चों का भविष्य

एम्स स्थित इंस्टीट्यूट रोटरी कैंसर हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने 1048 कैंसर पीड़ित बच्चों और उनके परिवार की आर्थिक एवं सामाजिक स्थितियों का अध्ययन किया है। इसमें पाया गया कि 25% से ज्यादा माता-पिता को इलाज के लिए   कर्ज लेना पड़ा । 47 % के करीब परिवारों की पूरी जमापूंजी इलाज कराने में खत्म हो गई। अध्ययन में शामिल 50.9% बच्चों के इलाज में औसतन तीन लाख रुपये खर्च हुए। अचछी बात यह है कि  की बात यह है कि बच्चों में कैंसर ठीक होने की दर 80% से अधिक है, मगर विस्थापन के कारण 85% बच्चों की पढ़ाई बाधित हुई और 3.1% बच्चे ठीक होने के बाद भी कभी स्कूल नहीं लौट पाए।

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सालों चलता है कैंसर का इलाज

बच्चों में होने वाले सबसे आम कैंसर, 'एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया' के लिए इलाज आमतौर पर ढाई साल तक चलता है। ठीक हाेने के बाद भी बच्चों को अक्सर कई तरह की गंभीर बाद की समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जैसे कि न्यूरोकॉग्निटिव (दिमाग और सोचने-समझने से जुड़ी), मस्कुलोस्केलेटल (मांसपेशियों और हड्डियों से जुड़ी) और मनोवैज्ञानिक समस्याएं। इस तरह, कैंसर से पीड़ित बच्चे की देखभाल करने से इलाज खत्म होने के लंबे समय बाद भी देखभाल की कई अतिरिक्त ज़रूरतें बनी रहती हैं।  स्वस्थ बच्चों के माता-पिता की तुलना में, कैंसर जैसी गंभीर और लंबे समय तक चलने वाली बीमारी वाले बच्चों के माता-पिता में पेरेंटिंग से जुड़ा तनाव ज़्यादा देखा गया है। 


आर्थिक और मानसिक परेशानी झेलते हैं माता- पिता

अध्ययनों से पता चला है कि इससे रोजगार में कमी और काम से गैर-हाज़िरी जैसी समस्याएं होती हैं, साथ ही बिना सहयोग करने वाले एम्प्लॉयर और फ्लेक्सिबल नौकरी न मिल पाने जैसी दिक्कतें भी आती हैं । कैंसर से पीड़ित बच्चों के माता-पिता में बच्चे के इलाज के दौरान बहुत ज़्यादा मानसिक तनाव (जैसे एंग्जायटी, डिप्रेशन और पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस के लक्षण) देखा गया है। हाल के वर्षों में माता-पिता की मानसिक और सामाजिक भलाई पर आर्थिक तंगी के असर पर ज़ोर दिया गया है। आज, बीमारी के पूरे दौर में आर्थिक बोझ का आकलन करना बचपन के कैंसर से प्रभावित परिवारों के लिए मानसिक और सामाजिक सहयोग का एक अहम हिस्सा माना जाता है 

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