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मुगल बेगमों से लेकर राजघरानों की महारानियों तक, जानिए क्या थे उनके स्किन और हेयर केयर के देसी सीक्रेट

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 20 Jul, 2026 04:25 PM
मुगल बेगमों से लेकर राजघरानों की महारानियों तक, जानिए क्या थे उनके स्किन और हेयर केयर के देसी सीक्रेट

नारी डेस्क: आज के दौर में खूबसूरत त्वचा और घने बालों के लिए लोग महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स और स्किन ट्रीटमेंट का सहारा लेते हैं। लेकिन सदियों पहले, जब न तो आधुनिक कॉस्मेटिक्स थे और न ही ब्यूटी क्लीनिक, तब भी राजघरानों की महिलाएं अपनी दमकती त्वचा और लंबे, घने बालों के लिए जानी जाती थीं। मुगल बेगम नूरजहां, जयपुर की महारानी गायत्री देवी, मेवाड़ की रानी पद्मावती और दक्षिण भारत के राजघरानों की महिलाओं की खूबसूरती के पीछे प्रकृति से जुड़े ऐसे घरेलू नुस्खे थे, जिनमें फूल, जड़ी-बूटियां, चंदन, दूध, केसर और आयुर्वेदिक सामग्री का खास महत्व था।

नूरजहां की खूबसूरती का राज था गुलाब

मुगल बादशाह जहांगीर की बेगम नूरजहां अपनी खूबसूरती, शाही अंदाज और नफासत के लिए मशहूर थीं। कहा जाता है कि उन्हें फूलों और खुशबू से खास लगाव था। ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, गुलाब के इत्र (रोज अत्तर) की खोज का श्रेय भी नूरजहां को दिया जाता है। माना जाता है कि जब गुलाब जल तैयार किया जा रहा था, तब पानी की सतह पर तैरती सुगंधित तेल की परत को अलग किया गया और वहीं से गुलाब के इत्र की शुरुआत हुई। नूरजहां नियमित रूप से गुलाब जल चेहरे पर लगाती थीं और नहाने के पानी में गुलाब की पंखुड़ियां डालती थीं। इससे उनकी त्वचा तरोताजा रहती थी और शरीर से प्राकृतिक खुशबू आती थी।

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मुगल बेगमों के ब्यूटी सीक्रेट

मुगल शाही परिवार में प्राकृतिक चीजों से सौंदर्य की देखभाल की परंपरा थी। गुलाब, चमेली और केवड़ा जैसे फूलों से बने इत्र का इस्तेमाल किया जाता था। नहाने के पानी में फूलों की पंखुड़ियां डाली जाती थीं। बालों के लिए जड़ी-बूटियों से युक्त प्राकृतिक तेल लगाए जाते थे। बालों की कंडीशनिंग के लिए मेहंदी का इस्तेमाल किया जाता था।आंखों की सुंदरता बढ़ाने के लिए सुरमा लगाया जाता था। स्टीम बाथ (भाप स्नान) भी उनकी स्किन केयर रूटीन का हिस्सा माना जाता था।

रानी पद्मावती का आयुर्वेदिक स्किन केयर

लोककथाओं और साहित्य में मेवाड़ की रानी पद्मावती की सुंदरता का उल्लेख मिलता है। माना जाता है कि उनकी त्वचा की देखभाल पूरी तरह प्राकृतिक और आयुर्वेदिक तरीकों से होती थी। बताया जाता है कि वह नियमित रूप से बेसन, हल्दी, चंदन, केसर, गुलाब जल और दूध से बने उबटन का इस्तेमाल करती थीं। इन प्राकृतिक सामग्रियों से त्वचा की सफाई, नमी और चमक बनाए रखने में मदद मिलती थी।

महारानी गायत्री देवी का सिंपल लेकिन एलिगेंट ब्यूटी रूटीन

जयपुर राजघराने की महारानी गायत्री देवी को दुनिया की सबसे खूबसूरत महिलाओं में गिना जाता था। उनकी खूबसूरती का राज भारी मेकअप नहीं, बल्कि सादगी और नियमित स्किन केयर था। वह त्वचा को साफ और मॉइश्चराइज रखने पर विशेष ध्यान देती थीं। धूप से बचाव, संतुलित खानपान और नियमित दिनचर्या उनके ब्यूटी रूटीन का अहम हिस्सा थे। मेकअप के नाम पर वह हल्का आईलाइनर और सॉफ्ट लिपस्टिक लगाती थीं। उनके खुले कंधे तक लंबे बाल और क्लासिक बन हेयरस्टाइल उनकी पहचान बन चुके थे।

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राजपूत रानियों के घरेलू स्किन केयर नुस्खे

राजस्थान की गर्म और शुष्क जलवायु को देखते हुए राजपूत रानियां त्वचा को हाइड्रेट रखने पर खास ध्यान देती थीं। वे साबुन की जगह बेसन, हल्दी, चंदन, दही, दूध, केसर और गुलाब जल से बने उबटन का इस्तेमाल करती थीं। गर्मी में चंदन का लेप त्वचा को ठंडक देने के लिए लगाया जाता था, जबकि सर्दियों में देसी घी, तिल का तेल और बादाम का तेल त्वचा को नमी देने के लिए उपयोग किया जाता था।

बालों की देखभाल भी थी खास

राजपूत घरानों में बालों की मजबूती और चमक बनाए रखने के लिए प्राकृतिक तेलों का इस्तेमाल किया जाता था। तिल, सरसों और नारियल के तेल में आंवला, भृंगराज, गुड़हल और मेथी जैसी जड़ी-बूटियां मिलाकर बालों में लगाया जाता था। वहीं, बाल धोने के लिए रीठा, शिकाकाई और आंवला का प्रयोग किया जाता था।

त्रावणकोर राजघराने का हेयर केयर रूटीन

दक्षिण भारत के त्रावणकोर राजघराने में भी प्राकृतिक हेयर केयर की समृद्ध परंपरा थी। महिलाएं नारियल तेल में करी पत्ता, भृंगराज, गुड़हल और आंवला मिलाकर तैयार तेल का इस्तेमाल करती थीं। इससे बाल लंबे, घने और मजबूत बने रहते थे। बालों को साफ करने के लिए शिकाकाई, रीठा और आंवला का उपयोग किया जाता था, जबकि चेहरे के लिए चावल का आटा, हरी मूंग, हल्दी, चंदन, दूध और गुलाब जल से बने फेस पैक लगाए जाते थे।

मौसम के अनुसार बदलता था स्किन केयर रूटीन

राजघरानों में मौसम के हिसाब से त्वचा की देखभाल करने की परंपरा भी थी। गर्मी में चंदन, गुलाब जल और ठंडी तासीर वाली सामग्री का इस्तेमाल होता था। बरसात में त्वचा की गहराई से सफाई पर ध्यान दिया जाता था। सर्दियों में घी, तिल का तेल और बादाम के तेल से त्वचा को पोषण और नमी दी जाती थी।

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आज भी लोकप्रिय हैं ये देसी नुस्खे

राजघरानों की महिलाओं के ये ब्यूटी सीक्रेट पूरी तरह प्राकृतिक चीजों पर आधारित थे। आज भी उबटन, गुलाब जल, चंदन, आंवला, रीठा, शिकाकाई और हर्बल तेल जैसे कई पारंपरिक उपाय स्किन और हेयर केयर रूटीन का हिस्सा बने हुए हैं।

नोट: यह लेख ऐतिहासिक मान्यताओं, लोककथाओं और विभिन्न प्रकाशित स्रोतों में वर्णित जानकारियों पर आधारित है। इन पारंपरिक उपायों के प्रभाव व्यक्ति की त्वचा, बालों और स्वास्थ्य के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। किसी भी नए घरेलू उपाय को अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित रहेगा।
  
 
 
 

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