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अपने जन्मस्थान पर पहुंचे भगवान जगन्नाथ,  बलभद्र और देवी सुभद्रा, आज निभाई जाएगी  'अडपा मंडप बिजे' की रस्म

  • Edited By vasudha,
  • Updated: 18 Jul, 2026 10:25 AM
अपने जन्मस्थान पर पहुंचे भगवान जगन्नाथ,  बलभद्र और देवी सुभद्रा, आज निभाई जाएगी  'अडपा मंडप बिजे' की रस्म

नारी डेस्क:  भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के तीनों रथ शुक्रवार को पुरी में गुंडिचा मंदिर के सामने पहुंचे, जिससे रथ यात्रा का जुलूस पूरा हुआ। वहीं, शनिवार को 'अडपा मंडप बिजे' की पवित्र रस्म होनी है। रथ यात्रा के पहले दिन तीनों रथ गुंडिचा मंदिर नहीं पहुंच पाए थे, इसलिए शुक्रवार को फिर से रथ खींचने का काम शुरू हुआ। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) के मुख्य प्रशासक अरबिंद कुमार पाधी ने कहा "गुरुवार को रथ खींचने का काम शुरू हुआ था, लेकिन तीनों रथ पहले दिन नहीं पहुँच पाए क्योंकि रथ थोड़ी देर से शुरू हुए थे। जब रथ खींचने का काम फिर से शुरू हुआ, तो लाखों भक्तों ने दर्शन किए।"
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ओडिशा के पुलिस महानिदेशक वाई बी खुरानिया ने कहा कि दर्शन के लिए पुरी में लाखों भक्त जमा हुए थे और इस मौके के लिए पुलिस के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। उन्होंने भक्तों से पुलिस की सलाह मानने और अधिकारियों का सहयोग करने की अपील की। ​​खुरानिया ने बुजुर्ग भक्तों, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं वाले लोगों और जिन्हें चलने में कठिनाई होती है, उन्हें भी सलाह दी कि वे यात्रा पर निकलने से पहले अपनी शारीरिक क्षमता की जांच कर लें। जगन्नाथ मंदिर के सेवक रामकृष्ण दास महापात्र ने कहा कि जो भक्त पहले दिन रथों के यात्रा पूरी न कर पाने के कारण निराश थे, वे अब खुश हैं। शुक्रवार को तीनों रथ अपनी मंज़िल पर पहुंच गए।

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शनिवार को 'अडापा मंडप बिजे' की रस्म होगी, जिसके तहत देवी-देवताओं को औपचारिक रूप से गुंडिचा मंदिर ले जाया जाएगा। 'अडापा मंडप बिजे' (Adapa Mandap Bije) रथ यात्रा के दौरान होने वाला एक बेहद पवित्र अनुष्ठान है। इसके तहत, भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा को उनके रथों से उतारकर 'गुंडिचा मंदिर' के गर्भगृह (जिसे अडापा मंडप भी कहा जाता है) में ससम्मान प्रवेश कराया जाता है।अडापा मंडप को भगवान जगन्नाथ का जन्मस्थान माना जाता है। गुंडिचा मंदिर में रहने के दौरान, जगन्नाथ मंदिर के सभी दैनिक अनुष्ठान यहां किए जाते हैं।  हिंदू पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जो भक्त इस पवित्र स्थान पर तीनों देवताओं के दर्शन करते हैं, उनके सैकड़ों जन्मों के पाप धुल जाते हैं और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है।
 

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