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बच्चे को बुखार में नहलाना चाहिए या नहीं? डॉक्टर से जानें Fever Care के जरूरी नियम

  • Edited By Monika,
  • Updated: 18 Jul, 2026 11:57 AM
बच्चे को बुखार में नहलाना चाहिए या नहीं? डॉक्टर से जानें Fever Care के जरूरी नियम

नारी डेस्क : बच्चे को बुखार हो जाए तो माता-पिता की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। ऐसे समय में कई पैरेंट्स यह मान लेते हैं कि बुखार के दौरान बच्चे को नहलाने से उसकी तबीयत और खराब हो सकती है। वहीं कुछ लोग बच्चे को कई दिनों तक नहीं नहलाते और उसकी डाइट में भी कई तरह के बदलाव कर देते हैं। लेकिन क्या वास्तव में ऐसा करना सही है? डॉक्टर के मुताबिक, बुखार के दौरान बच्चे की देखभाल सही तरीके से करना सबसे ज्यादा जरूरी है। आइए जानते हैं कि बुखार में बच्चे को नहलाना चाहिए या नहीं और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

क्या बुखार में बच्चे को नहलाना चाहिए?

डॉक्टर बताते हैं कि बुखार होने का नहाने से कोई सीधा संबंध नहीं है। अगर बच्चे की तबीयत ज्यादा गंभीर नहीं है और वह सामान्य रूप से एक्टिव है, तो उसे रोजाना हल्के गुनगुने या सामान्य तापमान के पानी से नहलाया जा सकता है। नहलाने से शरीर साफ रहता है, बच्चा तरोताजा महसूस करता है और उसे आराम भी मिलता है। इसके अलावा शरीर का तापमान संतुलित रखने में भी मदद मिल सकती है। हालांकि, बहुत ठंडे पानी से नहलाने या बर्फ की पट्टियां लगाने से बचना चाहिए। अगर बच्चे को तेज ठंड लग रही हो, वह बहुत कमजोर महसूस कर रहा हो या डॉक्टर ने मना किया हो, तो पहले डॉक्टर की सलाह लें।

बुखार में बच्चे का ऐसे रखें ध्यान

बच्चे को ज्यादा कपड़े न पहनाएं

अक्सर माता-पिता सोचते हैं कि बच्चे को ज्यादा कपड़े पहनाने से पसीना आएगा और बुखार उतर जाएगा। लेकिन यह धारणा सही नहीं है। जरूरत से ज्यादा कपड़े पहनाने से शरीर की गर्मी बाहर नहीं निकल पाती, जिससे बुखार और बढ़ सकता है। बच्चे को हल्के और आरामदायक कपड़े पहनाएं तथा उसे हवादार कमरे में रखें।

बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक न दें

कई लोग मेडिकल स्टोर से खुद ही एंटीबायोटिक दवा खरीदकर बच्चे को दे देते हैं। यह बहुत बड़ी गलती हो सकती है। एंटीबायोटिक दवाएं केवल बैक्टीरियल संक्रमण में असर करती हैं। अधिकांश बच्चों में बुखार वायरल संक्रमण की वजह से होता है, जिसमें एंटीबायोटिक फायदा नहीं करती। बिना जरूरत एंटीबायोटिक देने से शरीर में दवा के प्रति रेजिस्टेंस विकसित हो सकता है, जिससे भविष्य में इलाज मुश्किल हो सकता है।

बच्चे का खाना बंद न करें

बुखार के दौरान कई पैरेंट्स बच्चे का सामान्य खाना बंद कर देते हैं और केवल उबला या हल्का भोजन देने लगते हैं। जबकि अगर बच्चा खाने की स्थिति में है, तो उसे उसकी उम्र के अनुसार पौष्टिक और संतुलित आहार देना चाहिए। बुखार के समय शरीर को संक्रमण से लड़ने के लिए अधिक ऊर्जा की जरूरत होती है। इसलिए बच्चे को पर्याप्त कैलोरी, प्रोटीन और पोषण देना जरूरी है।

बच्चे को हाइड्रेटेड रखें

बुखार के दौरान शरीर में पानी की कमी जल्दी हो सकती है। इसलिए बच्चे को पर्याप्त मात्रा में पानी, दूध, सूप, नारियल पानी (उम्र के अनुसार) या डॉक्टर की सलाह के अनुसार तरल पदार्थ देते रहें। छोटे बच्चों में बार-बार स्तनपान या फॉर्मूला फीड जारी रखें।

बुखार में कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?

अगर बच्चे में निम्न में से कोई भी लक्षण दिखाई दें, तो बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करें।
3 महीने से कम उम्र के बच्चे को बुखार हो।
बुखार 102°F (38.9°C) या उससे अधिक हो और लगातार बना रहे।
बच्चा बहुत सुस्त हो जाए या बार-बार बेहोशी जैसी स्थिति बने।
सांस लेने में तकलीफ हो।
बार-बार उल्टी या दौरे (सीजर) आएं।
बच्चा कुछ भी खाने-पीने से मना कर दे।
शरीर में पानी की कमी के लक्षण दिखाई दें, जैसे बहुत कम पेशाब आना या मुंह सूखना।

बुखार होने पर बच्चे को नहलाना पूरी तरह से गलत नहीं है। यदि बच्चा सहज महसूस कर रहा है, तो उसे सामान्य या हल्के गुनगुने पानी से नहलाया जा सकता है। सबसे जरूरी बात यह है कि बच्चे को आरामदायक वातावरण दें, पर्याप्त तरल पदार्थ और पौष्टिक भोजन खिलाएं तथा बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा, खासकर एंटीबायोटिक, न दें। यदि बुखार लंबे समय तक रहे या बच्चे की हालत बिगड़ती दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

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