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बरसात के मौसम में क्यों कमजोर पड़ जाता है पाचन तंत्र? एक्सपर्ट से जानिए

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 08 Jul, 2026 05:14 PM
बरसात के मौसम में क्यों कमजोर पड़ जाता है पाचन तंत्र? एक्सपर्ट से जानिए

नारी डेस्क: बारिश का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है, लेकिन इसके साथ कई स्वास्थ्य समस्याएं भी लेकर आता है। इस दौरान डेंगू, मलेरिया और वायरल संक्रमण का खतरा तो बढ़ता ही है, साथ ही बड़ी संख्या में लोग गैस, अपच, पेट फूलना, एसिडिटी, दस्त और फूड पॉइजनिंग जैसी पाचन संबंधी परेशानियों का भी सामना करते हैं। कई लोगों को लगता है कि मानसून आते ही उनका पाचन तंत्र कमजोर हो गया है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी वजह सिर्फ पाचन शक्ति का कम होना नहीं, बल्कि मौसम, खानपान और संक्रमण से जुड़े कई कारण होते हैं।

आखिर बारिश में पाचन क्यों प्रभावित होता है

गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के दौरान वातावरण में नमी बढ़ जाती है, जिसका असर शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली पर भी पड़ता है। इस मौसम में भोजन को पचने में अपेक्षाकृत अधिक समय लग सकता है। यही वजह है कि सामान्य मात्रा में खाना खाने के बाद भी पेट भारी लगना, गैस बनना या पेट फूलने जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं।

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हवा में बढ़ी नमी भी बनती है वजह

विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश के मौसम में वातावरण में नमी का स्तर बढ़ जाता है। इससे शरीर का मेटाबॉलिज्म कुछ लोगों में थोड़ा धीमा महसूस हो सकता है, जिसका असर पाचन प्रक्रिया पर भी पड़ता है। ऐसे में भोजन देर से पचता है और कई लोगों को खाने के बाद पेट भरा-भरा महसूस होता है। कुछ लोगों को गैस, अपच और एसिडिटी जैसी समस्याएं भी अधिक होने लगती हैं।

तला-भुना और मसालेदार खाना बढ़ा देता है परेशानी

मानसून में चाय के साथ पकौड़े, समोसे, कचौड़ी, चाट और अन्य तले-भुने स्नैक्स खाने का चलन काफी बढ़ जाता है। हालांकि, ये खाद्य पदार्थ पहले से ही पचने में भारी होते हैं। अधिक तेल और मसालों वाले भोजन का सेवन करने से एसिडिटी, अपच और एसिड रिफ्लक्स की समस्या बढ़ सकती है। एसिड रिफ्लक्स की स्थिति में पेट का एसिड भोजन नली तक पहुंच जाता है, जिससे सीने और गले में जलन महसूस हो सकती है।

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गंदा पानी और दूषित भोजन भी बढ़ाते हैं खतरा

बारिश के दौरान पानी का दूषित होना एक बड़ी समस्या है। कई बार बारिश का पानी पीने के पानी या खाद्य पदार्थों के संपर्क में आ जाता है, जिससे उनमें बैक्टीरिया, वायरस और परजीवी (पैरासाइट्स) पनप सकते हैं। इसके अलावा फल और सब्जियां भी गंदे पानी के संपर्क में आ सकती हैं। बाहर रखा हुआ भोजन या साफ-सफाई के बिना तैयार किया गया खाना इस मौसम में जल्दी खराब हो सकता है। यही कारण है कि मानसून में दस्त, उल्टी, पेट दर्द, फूड पॉइजनिंग और पेट के संक्रमण के मामले बढ़ जाते हैं।

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मानसून में पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें

बारिश के मौसम में हमेशा ताजा और घर का बना भोजन खाने की कोशिश करें। लंबे समय तक रखा हुआ या बासी खाना खाने से बचें। पीने के लिए साफ और सुरक्षित पानी का इस्तेमाल करें। यदि संभव हो तो पानी उबालकर या फिल्टर करके ही पिएं। फल और सब्जियों को अच्छी तरह धोने के बाद ही उपयोग करें। बाहर का खुला या अस्वच्छ भोजन खाने से बचें। इसके अलावा हल्का, संतुलित और आसानी से पचने वाला भोजन चुनना इस मौसम में अधिक फायदेमंद माना जाता है।

किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए

अगर पेट दर्द, लगातार दस्त, बार-बार उल्टी, तेज बुखार, मल में खून या शरीर में पानी की कमी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इन्हें सामान्य अपच समझकर नजरअंदाज न करें। ऐसी स्थिति में जल्द से जल्द डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है, क्योंकि यह गंभीर संक्रमण का संकेत भी हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून में पाचन तंत्र स्थायी रूप से कमजोर नहीं होता, बल्कि मौसम, खानपान और संक्रमण के बढ़े हुए खतरे की वजह से पाचन संबंधी समस्याएं ज्यादा देखने को मिलती हैं। यदि इस मौसम में साफ-सफाई का ध्यान रखा जाए, ताजा भोजन खाया जाए और पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पानी पिया जाए, तो इन समस्याओं के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यदि आपको लगातार पाचन संबंधी परेशानी, तेज दर्द, उल्टी, दस्त या अन्य गंभीर लक्षण महसूस हों, तो स्वयं इलाज करने के बजाय डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।
 


 

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