
नारी डेस्क : कई बार जो चीज़ आज हमें बिल्कुल आम और साधारण लगती है, उसका इतिहास बेहद खास और दिलचस्प होता है। अनानास (Pineapple) भी ऐसी ही एक चीज़ है। आज यह बाजार में आसानी से मिलने वाला एक सामान्य फल है, लेकिन एक समय ऐसा था जब इसे अमीरी, शाही ठाठ-बाट और प्रतिष्ठा का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता था। यही वजह है कि दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित टेनिस टूर्नामेंट विंबलडन (Wimbledon) की ट्रॉफी के शीर्ष पर भी अनानास बना हुआ है। अगर आपने कभी इस ट्रॉफी को गौर से देखा हो, तो शायद आपकी नजर उस अनोखे अनानास पर पड़ी होगी। लेकिन आखिर इसे ट्रॉफी के ऊपर क्यों लगाया गया? इसके पीछे छिपी कहानी आपको जरूर हैरान कर देगी।

कभी शान और अमीरी की पहचान था अनानास
17वीं और 18वीं सदी के ब्रिटेन में अनानास बेहद दुर्लभ फल माना जाता था। उस समय इसे उगाना और विदेशों से मंगवाना इतना महंगा था कि एक अनानास की कीमत आज के समय में हजारों पाउंड के बराबर हो सकती थी। इतना ही नहीं, अमीर परिवार अपनी शान दिखाने के लिए अनानास खरीदते भी नहीं थे, बल्कि किराए पर लेते थे। वे इसे अपने डिनर टेबल पर सिर्फ मेहमानों को दिखाने के लिए सजाते थे। कई बार उस अनानास को खाया भी नहीं जाता था। उसका मकसद केवल यह बताना होता था कि परिवार कितना संपन्न और प्रतिष्ठित है।
क्यों लगाया गया विंबलडन ट्रॉफी पर अनानास?
जब विंबलडन की प्रतिष्ठित ट्रॉफी को डिजाइन किया गया, तब अनानास ब्रिटिश समाज में धन, सम्मान, प्रतिष्ठा और शाही ठाठ-बाट का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता था। इसलिए दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित टेनिस टूर्नामेंट की ट्रॉफी के शीर्ष पर अनानास को जगह दी गई। उस दौर में अनानास अपने आप में किसी ट्रॉफी से कम नहीं माना जाता था। यही वजह है कि विंबलडन ट्रॉफी के ऊपर आज भी अनानास बना हुआ है, जो केवल एक सजावटी डिजाइन नहीं बल्कि ब्रिटिश इतिहास और परंपरा का प्रतीक है।

आज भी कायम है यह परंपरा
समय के साथ अनानास आम फल बन गया, लेकिन विंबलडन ट्रॉफी पर बना यह अनानास आज भी उसी ऐतिहासिक विरासत और प्रतिष्ठा की याद दिलाता है। यह इस बात का प्रतीक है कि विंबलडन केवल एक टेनिस टूर्नामेंट नहीं, बल्कि सदियों पुरानी परंपराओं और गौरव का भी प्रतिनिधित्व करता है।