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आज है अधिक मास की कृष्ण जन्माष्टमी, इस दिन ये उपाय करने से सभी मनोकामना होती है पूरी

  • Edited By vasudha,
  • Updated: 08 Jun, 2026 07:53 AM
आज है अधिक मास की कृष्ण जन्माष्टमी, इस दिन ये उपाय करने से सभी मनोकामना होती है पूरी

नारी डेस्क: आज का दिन कई मायनों में बेहद खास है, यह दिन पूरी तरह श्रीकृष्ण को समर्पित माना गया है। आज अधिक मास की कृष्ण जन्माष्टमी है। धार्मिक मान्यता है कि, जो भी व्यक्ति इस दिन पूरी श्रद्धा के साथ व्रत रखने और लड्डू गोपाल की पूजा विधिवत करता है उसे सभी पापों से मुक्ति मिलती है। अधिक मास यानी पुरुषोत्तम मास के दौरान पड़ने वाली मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का विशेष महत्व है। इस बार यह और भी खास इसलिए है क्योंकि यह पूरा महीना भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है।

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ये है शुभ मुहूर्त

 श्रीकृष्ण का जन्म द्वापर युग में भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मध्य रात्रि में हुआ था, लेकिन हर महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भी भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाया जाता है।  इस दिन के तीन शुभ मुहूर्त हैं पहला ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 05:23 बजे, अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:52 बजे से दोपहर 12:48 बजे तक, सायंकाल संध्या मुहूर्त: शाम 7:18 बजे। 


पूज करने के नियम

इस दिन विधि-विधान से भगवान कृष्ण की पूजा करने से भक्तों के सारे दुःख दूर होते हैं। कृष्ण पक्ष की अष्टमी को सुबह ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान आदि कर भगवान कृष्ण की पूजा करनी चाहिए।  भगवान कृष्ण की विधिवत पूजा कर उन्हें फूल, अक्षत, तुलसी दल, आदि चढ़ाना चाहिए. इसके बाद धूप और द्वीप जलाकर बाल-गोपाल की आरती करनी चाहिए। इस दिन भगवान श्री कृष्ण को मेवा, माखन मिश्री का भोग लगाकर प्रसाद लोगों को वितरित करें।
 

 संतान सुख के लिए करें व्रत 

हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार मासिक जन्माष्टमी का व्रत रखने और विधि विधान से बाल गोपाल श्री कृष्ण की पूजा करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है. इस दिन भगवान कृष्ण की पूजा अर्चना करने संतान के कष्ट भी दूर होते हैं।  मासिक जन्माष्टमी को भगवान श्री कृष्ण की पूजा और व्रत से घर में सुख शांति का वास होता है. इससे नकारात्मकता बाहर जाती है और घर मे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। 

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आज के दिन पढ़ें ये मंत्र

 हरे कृष्ण महामंत्र

“हरे कृष्ण हरे कृष्ण
कृष्ण कृष्ण हरे हरे
हरे राम हरे राम
राम राम हरे हरे॥”


श्रीकृष्ण लीलामृत मंत्र

“आदौ देवकी देव गर्भजननं, गोपी गृहे वर्धनम्।
माया पूजनिकासु ताप हरणं गोवर्धनोधरणम्।।
कंसच्छेदनं कौरवादिहननं, कुंतीसुपाजालनम्।
एतद् श्रीमद्भागवतम् पुराण कथितं श्रीकृष्ण लीलामृतम्।।”


जन्माष्टमी विशेष वंदना श्लोक

"सच्चिदानन्दरूपाय विश्वोत्पत्त्यादिहेतवे।तापत्रयविनाशाय श्रीकृष्णाय वयं नुमः॥"

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