
नारी डेस्क: बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं। सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने हाल ही में हुए NEET पेपर लीक के विरोध में छात्रों के आंदोलन और उसके बाद सामने आए घटनाक्रम पर अपनी राय रखी है। वीडियो में उन्होंने छात्रों की आवाज को लोकतंत्र की ताकत बताया, लेकिन साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने वालों की भी कड़ी आलोचना की।
छात्रों के आंदोलन को बताया लोकतंत्र की जीत
अपने वीडियो में अनुपम खेर ने कहा कि छात्रों ने अपनी बात शांतिपूर्ण और ईमानदारी से रखी, जिसके बाद उनकी मांगों पर कार्रवाई हुई। उनके मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित किया कि लोकतंत्र में जनता की आवाज सुनी जाती है। उन्होंने कहा कि यदि कुछ फैसले पहले ही ले लिए गए होते तो शायद स्थिति इतनी आगे नहीं बढ़ती। हालांकि, आखिरकार समाधान निकलना लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत है। उनका मानना है कि अब आंदोलन समाप्त हो चुका है और देश को आगे बढ़ने की दिशा में काम करना चाहिए।
'देश किसी एक आंदोलन पर नहीं रुक सकता'
वीडियो में अनुपम खेर ने कहा कि किसी भी आंदोलन का उद्देश्य समाधान निकालना होना चाहिए और जब समाधान मिल जाए तो आगे बढ़ना जरूरी होता है। उन्होंने कहा कि देश किसी एक मुद्दे या आंदोलन पर हमेशा नहीं रुक सकता। अब समय है कि सभी लोग भविष्य की ओर देखें और देश के विकास में अपना योगदान दें।
पीएम मोदी के खिलाफ अपशब्दों पर जताई नाराजगी
अपने संदेश के दौरान अनुपम खेर ने उस पहलू पर भी बात की, जिसने उन्हें सबसे ज्यादा दुखी किया। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर कुछ लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए जिस तरह की अभद्र और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया, वह बेहद निराशाजनक था। उनके अनुसार, लोकतंत्र में किसी भी नेता से असहमति जताना, सवाल पूछना और सरकार की आलोचना करना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन विरोध के दौरान भाषा की मर्यादा बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।
'जब तर्क खत्म होते हैं, तब गालियां शुरू हो जाती हैं'
अनुपम खेर ने कहा कि स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान संवाद और तर्क से होती है। उनका मानना है कि जब बहस तथ्यों और विचारों पर आधारित होती है, तभी उसका सकारात्मक परिणाम निकलता है। लेकिन जब तर्कों की जगह अपशब्द और गालियां ले लेती हैं, तो बहस का स्तर गिर जाता है और केवल शोर-शराबा रह जाता है। उन्होंने कहा कि यह केवल किसी एक व्यक्ति या राजनीतिक दल का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह उस सामाजिक संस्कृति का सवाल है जिसे हम आने वाली पीढ़ियों के लिए छोड़कर जाना चाहते हैं।

वीडियो पर लोगों की मिल रही अलग-अलग प्रतिक्रियाएं
अनुपम खेर के इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग उनके बयान का समर्थन कर रहे हैं और लोकतांत्रिक मर्यादा में संवाद की बात से सहमत नजर आ रहे हैं, जबकि कुछ यूजर्स उनके विचारों से असहमति भी जता रहे हैं। फिलहाल उनका यह वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है और चर्चा का विषय बना हुआ है।