नारी डेस्क: आजकल खराब लाइफस्टाइल और अनहेल्दी खानपान के कारण फैटी लिवर की समस्या तेजी से बढ़ रही है। यह बीमारी अक्सर शुरुआत में बिना किसी बड़े लक्षण के होती है, इसलिए कई लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते। लेकिन अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो यह आगे चलकर लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए जरूरी है कि फैटी लिवर से जुड़े कुछ आम भ्रम और सच्चाई को समझा जाए।
फैटी लिवर क्या होता है?
फैटी लिवर वह स्थिति है, जब लिवर में जरूरत से ज्यादा फैट जमा होने लगता है। शुरुआत में इसका कोई खास लक्षण नहीं दिखता, इसलिए कई बार यह बीमारी लंबे समय तक छिपी रहती है। जब तक इसके लक्षण साफ दिखाई देते हैं, तब तक लिवर को काफी नुकसान हो चुका होता है। इसलिए समय रहते इसकी पहचान और इलाज बहुत जरूरी है।

क्या फैटी लिवर सिर्फ शराब पीने वालों को होता है?
अक्सर लोग मानते हैं कि फैटी लिवर केवल शराब पीने की वजह से होता है। लेकिन यह पूरी तरह सच नहीं है। आजकल कई लोगों में नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) भी देखने को मिलती है। इसका मतलब है कि जो लोग शराब नहीं पीते, उन्हें भी फैटी लिवर हो सकता है। डॉक्टरों के अनुसार मोटापा, इंसुलिन रेजिस्टेंस, अनहेल्दी डाइट और जेनेटिक कारण भी इसके पीछे बड़ी वजह हो सकते हैं। भारत में करीब 30 से 40 प्रतिशत लोगों में NAFLD की समस्या पाई जाती है।
क्या सामान्य वजन वालों को फैटी लिवर नहीं होता?
यह भी एक आम मिथक है कि अगर किसी व्यक्ति का वजन सामान्य है तो उसे फैटी लिवर नहीं हो सकता। लेकिन डॉक्टर बताते हैं कि कई दुबले-पतले लोगों में भी यह समस्या देखी जाती है। इसे लीन NAFLD कहा जाता है। असल में शरीर के अंदर अंगों के आसपास जमा होने वाला विसरल फैट बाहर से दिखाई नहीं देता, लेकिन यह लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है।
क्या ब्लड टेस्ट सामान्य आने पर सब ठीक होता है?
कई लोग सोचते हैं कि अगर ब्लड टेस्ट में लिवर एंजाइम सामान्य आए हैं, तो उन्हें कोई समस्या नहीं है। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार फैटी लिवर के शुरुआती चरण में ALT और AST जैसे लिवर एंजाइम सामान्य भी रह सकते हैं। इसलिए केवल एक टेस्ट के आधार पर पूरी तरह निश्चिंत होना सही नहीं है।
क्या फैटी लिवर मामूली बीमारी है?
कुछ लोग फैटी लिवर को हल्की समस्या मानते हैं और सोचते हैं कि यह अपने आप ठीक हो जाएगी। हालांकि शुरुआती स्टेज में इसे कंट्रोल किया जा सकता है, लेकिन अगर लंबे समय तक इसे नजरअंदाज किया जाए तो यह गंभीर बीमारी बन सकती है। समय के साथ यह नॉन-अल्कोहोलिक स्टीटोहेपेटाइटिस (NASH), फाइब्रोसिस और सिरोसिस जैसी खतरनाक स्थितियों में बदल सकता है। इतना ही नहीं, इससे लिवर फेलियर और लिवर कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है।
फैटी लिवर के शुरुआती संकेत
फैटी लिवर के लक्षण अक्सर हल्के होते हैं, इसलिए लोग उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। जैसे
लगातार थकान महसूस होना
पेट के दाहिने हिस्से में भारीपन
गर्दन के आसपास त्वचा का काला पड़ना
पेट के आसपास अचानक चर्बी बढ़ना
इन संकेतों को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
सिर्फ चीनी ही नहीं, ये कारण भी जिम्मेदार
कई लोग सोचते हैं कि फैटी लिवर सिर्फ ज्यादा मीठा खाने से होता है। लेकिन इसके पीछे कई अन्य कारण भी हो सकते हैं, जैसे

ज्यादा रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट खाना
शारीरिक गतिविधि की कमी
ज्यादा तनाव
खराब नींद
अनियमित खानपान
ये सभी चीजें फैटी लिवर का खतरा बढ़ा सकती हैं।
फैटी लिवर से बचने के लिए क्या करें?
डॉक्टरों के अनुसार फैटी लिवर के इलाज में सिर्फ दवाइयों पर निर्भर रहना सही नहीं है। इसके लिए लाइफस्टाइल में बदलाव सबसे जरूरी है।
शरीर का वजन 7 से 10 प्रतिशत तक कम करें
रोजाना एक्सरसाइज या वॉक करें
संतुलित और हेल्दी डाइट लें
पर्याप्त नींद लें
प्रोसेस्ड और जंक फूड कम खाएं

इसके अलावा समय-समय पर हेल्थ चेकअप करवाना भी जरूरी है।
फैटी लिवर एक ऐसी समस्या है, जिसे लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन सही समय पर ध्यान देकर और लाइफस्टाइल में बदलाव करके इसे काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। इसलिए अगर शरीर में लगातार थकान, पेट में भारीपन या वजन बढ़ने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें।