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Nari

Housewife के हक में High Court! घर संभालना भी काम, उन्हें बेकार कहना गलत

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 25 Feb, 2026 06:47 PM
Housewife के हक में High Court! घर संभालना भी काम, उन्हें बेकार कहना गलत

नारी डेस्क:  अक्सर लोग हाउसवाइफ को वो सम्मान नहीं देते तो काम करने वाली वर्किंग वुमेन को दिया जाता है। घर संभालने वाली महिलाओं को अक्सर बेकार, खाली या फ्री रहने वाली महिला तक कहा जाता है हालांकि उनकी ड्यूटी चौबीस घंटे सातों दिन की रहती हैं। हाउस वाइफ की इस दिन रात मेहनत के हक में दिल्ली हाईकोर्ट भी खड़ा है। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांत शर्मा ने हाल ही में एक अहम फैसला सुनाते हुए महिलाओं के घरेलू योगदान को समान सम्मान देने की बात कही है। उन्होंने कहा कि घर संभालना, बच्चों को बड़ा करना, परिवार का समर्थन करना और पति के करियर के अनुसार अपने आप को ढालना  ये सभी काम के समान हैं, भले ही इनसे कोई वेतन न मिलता हो।

गैर-रोजगार महिलाओं को आलसी न माना जाए

अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल इस आधार पर कि कोई महिला नौकरी नहीं कर रही है, उसे आलसी या  बेकार मानना न्यायसंगत नहीं है। न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा कि घरेलू काम भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कोई ऑफिस या व्यवसायिक काम। यह काम परिवार की आधारशिला है और समाज के लिए अनिवार्य योगदान देता है।

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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भरण-पोषण देने से इनकार करना गलत दृष्टिकोण

कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर महिला कमाने में सक्षम है, तो केवल इसलिए उसे भरण-पोषण से इनकार करना गलत है। यह दृष्टिकोण  संगठित और न्यायसंगत नहीं माना गया। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा की आवश्यकता होती है, खासकर उन महिलाओं को जिन्होंने वर्षों तक परिवार बनाने और उसे संभालने में योगदान दिया है।

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कानून महिलाओं की सुरक्षा करता है

न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि कानून का उद्देश्य उन पत्नी और माताओं की सुरक्षा करना है, जिन्होंने अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा परिवार के निर्माण और पालन-पोषण में खर्च किया। ताकि वे आर्थिक रूप से असहाय न रहें और उनके जीवन की नींव खो न जाए। इस फैसले से यह संदेश मिलता है कि घरेलू काम को भी काम का दर्जा दिया जाना चाहिए। महिलाओं के योगदान को नज़रअंदाज़ करना या उन्हें केवल कमाने की क्षमता के आधार पर आंकना अन्यायपूर्ण है। कानून यह सुनिश्चित करता है कि महिलाओं को सम्मान, सुरक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता मिले।  

 

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