नारी डेस्क: मुंबई/ जालंधर(वंदना डालिया): भारत में सोना सदियों से न केवल आभूषण बल्कि सुरक्षित निवेश का प्रतीक माना जाता रहा है। परिवार इसे सामाजिक प्रतिष्ठा और भविष्य की जमा पूंजी दोनों रूपों में देखते हैं। पिछले कुछ वर्षों में सोने ने निवेशकों को उल्लेखनीय रिटर्न दिए हैं, जिससे आम लोगों के बीच इसकी मांग और बढ़ी है। बढ़ती कीमतों के चलते बाजार में सोना-चांदी खरीदने की होड़ भी देखी जा रही है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि निवेश के मामले में भावनाओं के बजाय संतुलन और रणनीति जरूरी है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) की चीफ रेगुलेटरी ऑफिसर कमला कंथाराज के अनुसार, सोने में निवेश करते समय ‘डाइवर्सिफिकेशन’ यानी निवेश का संतुलित बंटवारा बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपनी पूरी पूंजी केवल सोने में लगा देता है तो कीमतों में गिरावट की स्थिति में उसे भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
'एक ही टोकरी में न रखें सारे अंडे '
सिर्फ सोने में निवेश दे सकता भारी नुकसानः कमला कंथाराज
कमला कंथाराज ने समझाया कि निवेश का मूल सिद्धांत है-“एक ही टोकरी में सारे अंडे न रखें।” उनका कहना है कि आय का एक सीमित और तय हिस्सा ही सोने में निवेश करना अधिक सुरक्षित और व्यावहारिक रणनीति है। शेष राशि को अन्य निवेश विकल्पों जैसे इक्विटी, बॉन्ड, म्यूचुअल फंड या फिक्स्ड इनकम साधनों में बांटना जोखिम को कम करता है और दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करता है।सोना निवेश पोर्टफोलियो का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है लेकिन संतुलन और समझदारी ही सुरक्षित वित्तीय भविष्य की कुंजी है। हाल ही में आयोजित बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के प्रेस दौरे के दौरान पीआईबी चंडीगढ़-मुंबई एवं मीडिया प्रतिनिधियों से बातचीत में उन्होंने निवेश, वित्तीय साक्षरता और ठगी से बचाव के विषय पर भी विस्तार से जानकारी साझा की। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि किसी भी निवेश से पहले पूरी जानकारी प्राप्त करें, अधिक रिटर्न के लालच में न आएं और केवल अधिकृत व विश्वसनीय प्लेटफॉर्म के माध्यम से ही निवेश करें।
सोशल मीडिया के फर्जी दावे, फेसबुक-व्हाट्सऐप पर सबसे ज्यादा फ्रॉड
तेज रफ्तारी डिजिटल जमाने में हर कोई कम समय में जल्दी अमीर होने के सपने देख रहा है, खासकर युवा लोग इन लुभावने सपनों के आकर्षण में रहता है और इस आकर्षण का बड़ा जाल सोशल मीडिया पर दिखाए जाने वाले बड़े दावे हैं जो सैकड़ों लोगों को गारंटीड रिटर्न के लालच में फंसा रहे हैं और इस लालच में वह अपनी मेहनत की कमाई पूंजी भी गंवा रहे हैं इसीलिए निवेश करने से पहले सतर्कता और सही जानकारी रखना उतना ही महत्वपूर्ण है। कंथाराज ने चेतावनी देते कहा कि 12 प्रतिशत से अधिक रिटर्न का दावा करने वाले ज्यादातर प्लेटफॉर्म फर्जी होते हैं। आम लोग खासकर छोटे निवेशकों को यहां जागरूक रहने की जरूरत है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे व्हाट्सऐप, टेलीग्राम, यू-ट्यूब, फेसबुक आदि पर चल रहे तथा-कथित इन्वेस्टमेंट चैनलों के कारण लोग अपनी जीवन भर की पूंजी गंवा रहे हैं।

निवेश में लालच ही सबसे बड़ा दुश्मन
सीआरओ कमला कंथाराज के मुताबिक, आम निवेशक रोज़मर्रा में कुछ ऐसी गलतियां कर देते हैं जो उन्हें भारी नुकसान की ओर ले जाती हैं। सबसे बड़ी भूल यह है कि लोग अपना सारा पैसा एक ही जगह या एक साथ निवेश कर देते हैं। उन्होंने निवेश से जुड़े बहुत ही आसान से सुझाव दिए।
1. सबसे पहले यह समझ लें कि कोई भी 'गारंटीड प्रॉफिट' या 'पक्का शॉर्ट टिप्स' जैसी बात सच नहीं है। कोई भी वैध निवेश सालाना 12% से ज्यादा रिटर्न नहीं देता।
2. एक ही जगह सारा पैसा निवेश ना करना, कुछ रकम बचाकर रखना भी जरूरी। सोच-समझकर निवेश करें।
3. कर्ज लेकर निवेश ना करें, इससे दोहरा जोखिम रहेगा।
4. अपनी क्षमता और ज़रूरतों को ध्यान में रखकर निवेश करें।
5. जोखिम को कम करने के लिए डाइवर्सिफिकेशन जरूरी है।

मेहनत से कमाई पूंजी लावारिस क्यों?
कमला कंथाराज के अनुसार, भारतीय बैंकों और ईपीएफओ (EPFO) में ऐसे करोड़ों रुपये पड़े हैं जिसका कोई दावेदार ही नहीं हैं। इसका सबसे बड़ा कारण जनता का अपने ही पैसे के प्रति जागरुक ना होना है। उनके मुताबिक लोग निवेश तो करते हैं लेकिन यह तय ही नहीं करते कि उनके बाद पैसे का हकदार कौन होगा या किसे मिलेगा। इस पैसे की ना तो नॉमिनी दर्ज होती है और ना ही कोई वसीयत बनाई जाती है। नतीजा ना तो पैसा असली मालिक के परिवार को मिल रहा है और ना ही उस पैसा पर सरकार अपना अधिकार रहता है इसलिए हर निवेश और खाते में नॉमिनी जरूर डालें और इसे समय-समय पर अपडेट करें। सही जानकारी, अपडेट और रिकॉर्ड रखने से आपका पैसा कभी फंसा नहीं रहेगा। इस पैसे की वसीयत बनाना भी जरूरी है। सेविंग और संपत्ति का पूरा विवरण लिखित या डिजिटल रूप में सुरक्षित रखें।

आज की समझदार बचत ही कल की आर्थिक सुरक्षा, सेविंग में अनुशासन जरूरी
वित्तीय सुरक्षा केवल अधिक कमाई से नहीं, बल्कि अनुशासित बचत और सही योजना से सुनिश्चित होती है। कमला कंथाराज के अनुसार, यदि वित्तीय अनुशासन बचपन से सिखाया जाए तो भविष्य में आर्थिक मजबूती अपने-आप बनती चली जाती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि आज के समय में युवा और बच्चे छोटी-छोटी इच्छाओं पर नियमित रूप से खर्च करते हैं-जैसे फास्ट फूड, गैजेट्स या मनोरंजन। यदि इन्हीं खर्चों का एक हिस्सा बचत में बदला जाए और बच्चों को पॉकेट मनी के माध्यम से सेविंग की आदत डाली जाए तो लंबी अवधि में बड़ा फंड तैयार किया जा सकता है। उनका कहना था कि यदि कोई व्यक्ति 20–25 वर्ष की उम्र से नियमित और अनुशासित निवेश शुरू करे तो 30–35 वर्ष की उम्र तक एक करोड़ रुपये की पूंजी बनाना असंभव नहीं है,बशर्ते निवेश निरंतर और योजनाबद्ध हो। कमला कंथाराज ने जोर देकर कहा कि वित्तीय साक्षरता केवल निवेश तक सीमित नहीं है बल्कि यह जीवनशैली का हिस्सा होनी चाहिए। बचत, निवेश और जोखिम प्रबंधन को परिवार में खुलकर चर्चा का विषय बनाना चाहिए ताकि अगली पीढ़ी आर्थिक रूप से जागरूक बन सके।
आम लोगों की बड़ी गलतियां
बीएसई अधिकारियों ने उन सामान्य वित्तीय गलतियों की भी ओर ध्यान दिलाया जो अक्सर नौकरीपेशा और मध्यम वर्गीय परिवार अनजाने में कर बैठते हैं।
अपनी संपत्ति और सेविंग का पूरा रिकॉर्ड न रखना।
निवेश तो करना, लेकिन वसीयत और नॉमिनी न बनाना।
भविष्य की योजना को 'कल देखेंगे' पर छोड़ देना।