
नारी डेस्कः ईशा अंबानी हु-ब-हू अपनी मां नीता अंबानी की कॉपी हैं। ऐसी बहुत सी बातें हैं जिसे देखकर लोग कहते हैं ये जोड़ी लाइक मदर लाइक डॉटर है। सिर्फ फैशन और लुक्स ही नहीं ईशा अंबानी का नेचर और मदरहुड भी मां से मिलता हैं। दोनों ही ट्विंस बेबीज की मम्मी बनी वो भी आईवीएफ के जरिए। नीता अंबानी जिन्हें एक समय डॉक्टरों ने साफ कह दिया था कि वह कभी मां नहीं बन सकती और उस समय उनकी उम्र करीब 23 साल की थी और इस बात को सुनकर नीता अंबानी को गहरा सदमा लगा था लेकिन अपनी करीबी दोस्त और डॉ. फिरुजा पारिख की मदद से उन्होंने जुड़वा बच्चे कंसीव किए थे।

महिलाएं IVF ट्रीटमेंट लेती तो हैं लेकिन इसे सीक्रेट रखकर
ईशा अंबानी ने भी एक इंटरव्यू में कहा था कि वो और उनका जुड़वा भाई आकाश आईवीएफ बेबी हैं। शादी के 7 साल बाद नीता अंबानी ने आईवीएफ के जरिए जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था। नीता अंबानी की तरह उनकी बेटी ईशा अंबानी ने अपने ट्विंस बेबी और आईवीएफ ट्रीटमेंट पर खुलकर बात की हालांकि अभी भी बहुत जगह महिलाएं आईवीएफ ट्रीटमेंट लेती तो हैं लेकिन इसे सीक्रेट रखकर...क्योंकि समाज इसे आज भी तव्ज्जो नहीं दे रहा।

ईशा ने कहा- " मैंने IVF के जरिए कंसीव किया था। यह एक मुश्किल जर्नी थी। जब आप इससे गुज़र रहे होते हैं तो आप शारीरिक रूप से परेशान हो जाते है लेकिन इस पर शर्मिंदगी महसूस नहीं होनी चाहिए। अगर आज दुनिया में आधुनिक तकनीक है तो बच्चे पैदा करने के लिए इसका इस्तेमाल क्यों न किया जाए? हालांकि अभी भी महिलाएं गुप्त रूप से IVF चक्र से क्यों गुजरती रहती हैं जबकि इसमें उसे फिजिकली और मैंटली दोनों ही तरीके से साथ की जरूरत होती है।
ईशा ने यह भी कहा कि जब उन्होंने इस प्रोसेस को अपनाया तो उन्हें लगता है कि उनका रिश्ता अपनी मां के साथ और मजबूत हो गया क्योंकि उन्होंने ठीक वैसे ही महसूस किया जैसे उनकी मां नीता अंबानी ने ईशा और आकाश को कंसीव करते समय किया था। पति आनंद पीरामल से भी उन्हें पूरा सपोर्ट मिला, पति का भी उन्होंने तह दिल से धन्यवाद किया। उन्होंने कहा, “एक मां को बहुत ज्यादा प्रसव पीड़ा सहनी पड़ती है क्योंकि ब्रेस्टफीडिंग जैसी कुछ चीजें हैं जो केवल मां (वह) ही कर सकती हैं, लेकिन पैरेंटिंग के मामले में कई अन्य चीजें ऐसी भी हैं, जो पति और पत्नी दोनों कर सकते हैं और करनी भी चाहिए। मैं उनकी (आनंद) आभारी हूं। हां, वे डायपर बदलते हैं और बच्चों को फीड कराते हैं जिन रातों को मुझे देर तक जागना पड़ता है या काम के सिलसिले में बाहर जाना पड़ता है तो वह सुनिश्चित करते हैं कि वह आसपास रहें ताकि मुझे बुरा महसूस न हो।” ईशा की ये बातें उन महिलाओं को बहुत इंस्पायर्ड कर गई जो किसी हैल्थ इश्यूज के चलते नॉर्मल कंसीव नहीं कर पाती। ये प्रोसेस इतना सामान्य होना चाहिए कि महिला को इसे छिपाना ना पड़े बल्कि वह दूसरों को इस बारे में बता सकें।