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“शूटर दादी” प्रकाशी तोमर की हालत गंभीर, नाक की नस फटने से अस्पताल में भर्ती

  • Edited By vasudha,
  • Updated: 16 Mar, 2026 06:37 PM
“शूटर दादी” प्रकाशी तोमर की हालत गंभीर, नाक की नस फटने से अस्पताल में भर्ती

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले की रहने वाली सीनियर निशानेबाज प्रकाशी तोमर जिन्हें प्यार से “शूटर दादी”  के नाम से भी जाना जाता है वह इन दिनों काफी मुश्किल हालातों से गुजर रही हैं। उनकी नाक की नस फट गई है। गंभीर हालत के चलते उन्हें  नोएडा के अस्पताल में भर्ती कराया गया है।  उन्होंने उम्र के उस पड़ाव पर शूटिंग शुरू की, जब ज्यादातर लोग नई चीजें सीखने से कतराते हैं, और अपनी प्रतिभा से देश-दुनिया में पहचान बनाई।

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लोग शूटर दादी के लिए मांग रहे दुआएं

बताया जा रहा है कि निशानेबाज की हालत रविवार सुबह अचानक खराब हो गई जब वह घर के कामकाज निपटा रही थीं। नाक की नस फटने के कारण वह बेहोश होकर गिर पड़ीं। परिजन उन्हें लेकर तत्काल बागपत जिले के बड़ौत अस्पताल पहुंचे। वहां से उन्हें नोएडा के कैलाश हॉस्पिटल में रेफर कर दिया गया है। अस्पताल में उन्हें भर्ती कराया है। लोग उनके जल्द से जल्द ठीक होने की कामना कर रहे हैं। बता दें कि   13 सितंबर 2023 को भी उन्हें सांस लेने में दिक्कत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था।


60 साल की उम्र में सीखी शूटिंग 

प्रकाशी तोमर ने करीब 60 साल की उम्र में शूटिंग सीखना शुरू किया। दरअसल वे अपनी पोती को शूटिंग रेंज लेकर जाती थीं। वहीं उन्होंने खुद भी बंदूक उठाकर निशाना लगाया और सबको हैरान कर दिया। इसके बाद उन्होंने नियमित अभ्यास शुरू किया और कुछ ही समय में प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने लगीं। प्रकाशी तोमर ने नेशनल और कई ओपन शूटिंग प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर कई मेडल जीते। ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने के बावजूद उन्होंने समाज की कई रूढ़ियों को तोड़ा। आज वे खासकर गांवों की महिलाओं और बुजुर्गों के लिए प्रेरणा मानी जाती हैं। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि अगर हौसला मजबूत हो तो किसी भी उम्र में अपने सपनों को पूरा किया जा सकता है।

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फिल्म में भी दिखी उनकी कहानी

प्रकाशी तोमर और उनकी साथी निशानेबाज Chandro Tomar की जिंदगी से प्रेरित होकर बॉलीवुड में फिल्म Saand Ki Aankh भी बनाई गई थी। इस फिल्म में दिखाया गया कि कैसे दो ग्रामीण महिलाओं ने देर से शुरुआत करके भी शूटिंग की दुनिया में पहचान बनाई। प्रकाशी तोमर की कहानी यह बताती है कि सपनों को पूरा करने के लिए उम्र नहीं, बल्कि हिम्मत और मेहनत जरूरी होती है।
 

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