नारी डेस्क: कुछ लोगों को बचपन से ही नाखुन चबाने की आदत होती है। वो अपनी ये आदत बड़े होने पर भी छोड़ नहीं पाते और ये आदत इतनी खतरनाक हो जाती है कि गंभीर इंफेक्शन होने का डर रहता है। अगर आपको भी नेल बाइटिंग की आदत है तो सावधान हो जाईए, ये खबर आपके लिए है। हम आपको एक ऐसा मामला बताने जा रहे है, जिसे जानकर आपके होश उड़ जाएगे। हाल ही में एक 21 साल की गैबी स्वेर्ज़ेव्स्की को इस आदत की वजह से इतना गंभीर इंफेक्शन हो गया कि उसकी उंगली तक खतरे में पड़ गई। अब जानिए कितनी खतरनाक है नाखुन चबाने की आदत...
जानकारी के अनुसार, 21 साल की गैबी स्वेर्ज़ेव्स्की को नाखुन चबाने की आदत थी। इस आदत की वजह से उसे बहुत गंभीर इंफेक्शन हो गया और उसकी उंगली तक खतरे में पड़ गई। फिलहाल, वो ठीक है लेकिन उन्होंने मीडिया के जरिए अपना एक्सपीरियंस शेयर किया और लोगों से तुरंत नाखून चबाने की आदत को छोड़ने की अपील की है। क्यों कि वो नहीं चाहती कि जो दर्द उन्हें हुआ है, उस दर्द से कोई ओर गुजरे।

लोग क्यों चबाते है नाखुन?
नाखुन चबाने की आदत को मेडिकल भाषा में ओनिकोफैगिया (Onychophagia) कहा जाता है। यह एक पुरानी आदत या मानसिक स्थिति है, जो तनाव, चिंता या बोरियत के कारण होती है। यह 'बॉडी-फोकस्ड रिपीटिटिव बिहेवियर' (BFRB) के अंतर्गत आती है, जो आमतौर पर बच्चों और युवा वयस्कों में देखी जाती है। इसके कारण नाखून, क्यूटिकल और आसपास की त्वचा को नुकसान पहुँच सकता है।
कैसे होता है इंफेक्शन?
नाखुन चबाने की आदत धीरे-धीरे खतरनाक इंफेक्शन में बदल जाती है। जब नाखून के आसपास की त्वचा कट या फट जाती है, तो वहां से बैक्टीरिया शरीर के अंदर आसानी से प्रवेश कर सकते हैं। हमारे मुंह में सैकड़ों तरह के कीटाणु होते हैं, जब हम नाखून चबाते हैं, तो ये कीटाणु छोटे घावों के जरिए अंदर जाकर ‘पैरोनाइशिया’ नाम का बैक्टीरियल इंफेक्शन पैदा कर सकते हैं। इस युवती के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ था, उसकी इस आदत की वजह से उसे इंनफेक्शन हो गया था।
लक्षण
नेल बाइटिंग की वजह से होने वाली इंनफेक्शन की शुरुआत आमतौर पर हल्की लालिमा, सूजन और दर्द से होती है। लेकिन अगर समय पर ध्यान न दिया जाए, तो यह बढ़कर गंभीर रूप ले लेता है। कई मामलों में पस बन जाता है, दर्द बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और इंफेक्शन उंगली के अंदर तक फैल जाता है। जिससे उंगली काटने तक की नौबत भी आ सकती है।

इंफेक्शन का इलाज
इस इंफेक्शन में बहुत दर्द होता है। इलाज के लिए एंटीबायोटिक दवाएं भी देनी पड़ती है। कभी-कभी स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि डॉक्टरों को पस निकालने (इंसीजन और ड्रेनेज) की प्रक्रिया करनी पड़ सकती है, और कुछ मामलों में सर्जरी की भी जरूरत पड़ सकती है।
आदत छोड़ने के तरीके
नाखून हमेशा छोटे और साफ रखें
तेज टेस्ट वाले नेल पॉलिश लगाकर रखें
नाखून या आसपास की त्वचा को काटने या चबाने से बचें
अगर त्वचा कट जाए, तो उसे तुरंत साफ करके एंटीसेप्टिक लगाएं