नारी डेस्क : ईद हो या कोई भी त्योहार, मेहंदी लगाना हमेशा से शुभ और खुशियों का प्रतीक माना जाता है। खासकर ईद-अल-अधा जैसे त्योहार पर महिलाओं और लड़कियों में मेहंदी को लेकर अलग ही उत्साह देखने को मिलता है। हालांकि इस बार मेहंदी के ट्रेंड में बड़ा बदलाव नजर आ रहा है। जहां पहले भारी-भरकम और कोहनी तक भरे हुए अरबी डिजाइन महिलाओं की पहली पसंद हुआ करते थे, वहीं अब युवा पीढ़ी सिंपल, एलिगेंट और मिनिमलिस्टिक मेहंदी डिजाइनों को ज्यादा पसंद कर रही है। खास बात यह है कि इस साल ‘हेंगुआ’ नाम का नया और यूनिक डिजाइन तेजी से ट्रेंड में आ रहा है।

बदल रही है मेहंदी की पसंद
दुबई की मशहूर मेहंदी आर्टिस्ट का कहना है कि पिछले कुछ सालों में लोगों की पसंद में काफी बदलाव आया है। अब युवतियां भारी डिजाइन की जगह हल्के, साफ-सुथरे और स्टाइलिश पैटर्न पसंद कर रही हैं।
आजकल सबसे ज्यादा मांग
कलाई तक के फाइन डिजाइन
ज्वेलरी स्टाइल मोटिफ्स
बैक हैंड मिनिमल पैटर्न
सिंपल और क्लीन लुक वाली मेहंदी की देखी जा रही है।

परंपरागत डिजाइन का क्रेज अब भी कायम
हालांकि आधुनिक डिजाइनों का ट्रेंड बढ़ा है, लेकिन कुछ समुदायों में पारंपरिक मेहंदी डिजाइनों की लोकप्रियता अब भी बरकरार है। रस-अल-खैमाह की फ्रीलांस मेहंदी आर्टिस्ट मुहसीना यूसुफ बताती हैं कि युवा लड़कियां मॉडर्न डिजाइन पसंद करती हैं, जबकि अमीराती परिवार अब भी पारंपरिक खलीजी और अरबी डिजाइन ही बनवाना पसंद करते हैं।
क्या है ‘हेंगुआ’?
इस साल सबसे ज्यादा चर्चा ‘हेंगुआ’ डिजाइन की हो रही है। यह मेहंदी और नीले रंग के जगुआ का मिश्रण है। मेहंदी आर्टिस्ट के मुताबिक, ब्लू जगुआ पहले से ही लोकप्रिय था, लेकिन अब लोग हेंगुआ डिजाइन को लेकर काफी उत्साहित हैं। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में यह ट्रेंड और तेजी से बढ़ सकता है और अगले साल ईद तक इसकी डिमांड काफी ज्यादा हो सकती है।

ऑर्गेनिक मेहंदी को लेकर बढ़ी जागरूकता
मेहंदी आर्टिस्ट ने लोगो को केमिकल वाली मेहंदी से सावधान रहने की सलाह भी दी। उन्होंने बताया कि जल्दी रंग छोड़ने वाली कई मेहंदी कोन्स में हानिकारक केमिकल होते हैं, जिससे हाथों में जलन और एलर्जी की समस्या हो सकती है। उनका कहना है कि हमेशा ऑर्गेनिक मेहंदी का इस्तेमाल करें। सस्ते और केमिकल वाले कोन्स से बचें।। भले ही ऑर्गेनिक मेहंदी थोड़ा समय लेती हो, लेकिन यह त्वचा के लिए ज्यादा सही होती है।

ईद पर सबसे ज्यादा रहती है बुकिंग
मेहंदी आर्टिस्ट्स के मुताबिक ईद से पहले के तीन दिन सबसे ज्यादा व्यस्त रहते हैं। अब लोग सैलून जाने की बजाय घर पर मेहंदी लगवाना ज्यादा पसंद करते हैं। कई परिवार और दोस्त मिलकर ग्रुप बुकिंग कराते हैं, जहां एक साथ 10 या उससे ज्यादा लोगों को मेहंदी लगाई जाती है।

खुशी और पहचान का प्रतीक बनी मेहंदी
चाहे पारंपरिक खलीजी डिजाइन हों, मिनिमलिस्टिक पैटर्न हों या नया हेंगुआ ट्रेंड, मेहंदी आज भी महिलाओं के लिए खुशी, सुंदरता और पहचान का अहम हिस्सा बनी हुई है। ईद जैसे खास मौके पर मेहंदी सिर्फ एक डिजाइन नहीं, बल्कि उत्सव और परंपरा की खूबसूरत पहचान बन चुकी है।