नारी डेस्क : आंतों का कैंसर यानी कोलोरेक्टल कैंसर एक गंभीर बीमारी है, जो छोटी या बड़ी आंत में विकसित होकर धीरे-धीरे शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैल सकता है। खराब खानपान, जंक फूड, प्रोसेस्ड मीट, धूम्रपान, शराब और शारीरिक गतिविधि की कमी इसके खतरे को बढ़ा सकती है। डॉक्टरों के मुताबिक कुछ हेल्दी आदतें अपनाकर इस कैंसर के रिस्क को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
आंतों के कैंसर से बचने के लिए करें ये 5 काम
फाइबर से भरपूर डाइट लें : डॉक्टरों के अनुसार रोजाना कम से कम 30 ग्राम फाइबर का सेवन करना चाहिए। फाइबर आंतों को साफ रखने में मदद करता है और कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा कम कर सकता है। इसके लिए फल, सब्जियां, दालें और साबुत अनाज डाइट में शामिल करें।
प्रोसेस्ड और रेड मीट से दूरी बनाएं: बहुत ज्यादा प्रोसेस्ड मीट और रेड मीट खाने से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी प्रोसेस्ड मीट को कैंसर बढ़ाने वाले फूड्स की लिस्ट में शामिल कर चुका है।
खुद को एक्टिव रखें: रोजाना वॉक, एक्सरसाइज या कोई भी शारीरिक गतिविधि (Physical activity) करना जरूरी है। एक्टिव रहने से पाचन बेहतर रहता है और आंतों में हानिकारक तत्व ज्यादा देर तक जमा नहीं रहते।
शराब और धूम्रपान से बचें: शराब और स्मोकिंग दोनों ही कैंसर का खतरा बढ़ा सकते हैं। डॉक्टर सलाह देते हैं कि इन आदतों से दूरी बनाना बेहतर होता है।
समय पर कोलोनोस्कोपी करवाएं: 45 साल की उम्र के बाद कोलोनोस्कोपी जरूर करवानी चाहिए। इससे शुरुआती स्टेज में बीमारी का पता लगाया जा सकता है और इलाज आसान हो सकता है।
आंतों के कैंसर के सामान्य लक्षण
लंबे समय तक पेट दर्द रहना
मल में खून आना
बार-बार कब्ज या दस्त होना
अचानक वजन कम होना
कमजोरी और थकान महसूस होना
भूख कम लगना।

किन लोगों को ज्यादा खतरा?
कुछ लोगों में आंतों के कैंसर का खतरा ज्यादा हो सकता है
जैसे, परिवार में किसी को कोलोरेक्टल कैंसर रहा हो
मोटापा या डायबिटीज हो
लंबे समय से आंतों की बीमारी हो
ज्यादा उम्र के लोग
अनहेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने वाले लोग।
कैसे होती है जांच?
आंतों के कैंसर की जांच के लिए डॉक्टर मरीज की स्थिति और लक्षणों के आधार पर कई तरह के टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं। इनमें कोलोनोस्कोपी सबसे अहम जांच मानी जाती है, जिससे आंतों के अंदर की स्थिति को करीब से देखा जाता है। इसके अलावा सीटी स्कैन के जरिए शरीर के अंदर कैंसर के फैलाव की जानकारी मिलती है। ब्लड टेस्ट और स्टूल टेस्ट से शरीर में किसी असामान्य बदलाव या खून की मौजूदगी का पता लगाया जाता है। वहीं, बायोप्सी के जरिए टिश्यू का सैंपल लेकर यह पुष्टि की जाती है कि कैंसर है या नहीं।