
नारी डेस्क: हार्मोन को नियंत्रित करने, गर्भधारण रोकने और मासिक चक्र को नियमित बनाए रखने में मदद के लिए आमतौर पर गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल किया जाता है। जो महिलाएं ये गोलियां लेती हैं उनमें से कई हर चक्र के आखिर में होने वाली ब्लीडिंग को अक्सर एक सामान्य मासिक धर्म (पीरियड) मान लेते हैं। लेकिन वह इस बात से अनजान होते हैं कि यह ब्लीडिंग असल में मासिक धर्म नहीं है। चलिए समझते हैं इसके बारे में विस्तर से।

क्या होती है यह ब्लीडिंग?
डॉक्टरों के अनुसार, बर्थ कंट्रोल पिल्स लेते समय जो ब्लीडिंग होती है उसे “विथड्रॉल ब्लीडिंग” (Withdrawal Bleeding) कहा जाता है।Withdrawal Bleeding हार्मोनल गर्भनिरोधक के सेवन के दौरान या उन्हें रोकने पर होने वाला रक्तस्राव है, जो ब्रेक (placebo) सप्ताह में होता है। यह सामान्य पीरियड्स की तरह लग सकता है लेकिन हल्का (lighter) होता है, जो हार्मोन के स्तर में गिरावट के कारण होता है। यह गर्भावस्था का संकेत नहीं है, बल्कि शरीर की एक सामान्य प्रतिक्रिया है। यह आमतौर पर 21 दिनों तक सक्रिय हार्मोन वाली गोलियां लेने के बाद, अगले 7 दिनों के ब्रेक में हार्मोन कम होने के कारण होता है। यह आमतौर पर 4 से 7 दिनों तक रहता है।
असली पीरियड से कैसे अलग है?
सामान्य पीरियड तब होता है जबअंडाशय से अंडा रिलीज होता है (ओव्यूलेशन), गर्भाशय की परत बनती है और प्रेग्नेंसी न होने पर वह परत टूटकर ब्लीडिंग के रूप में निकलती है। लेकिन बर्थ कंट्रोल पिल्स लेने पर ओव्यूलेशन रुक जाता है, गर्भाशय की परत पतली रहती है, इसलिए जो ब्लीडिंग होती है, वह सिर्फ हार्मोन के रुकने के कारण होती है, न कि प्राकृतिक प्रक्रिया से। डॉक्टर बताते हैं कि यह ब्लीडिंग मेडिकल रूप से जरूरी नहीं होती । पहले इसे इसलिए शामिल किया गया था ताकि महिलाओं को लगे कि उनका शरीर “नॉर्मल साइकल” में है, लेकिन असल में यह शरीर की जरूरत नहीं है।

क्या इसका मतलब है कि शरीर में कोई समस्या है?
नहीं, यह पूरी तरह सामान्य है। अगर आप पिल्स ले रही हैं और ब्लीडिंग हो रही है या नहीं हो रही, दोनों ही स्थिति में यह सामान्य हो सकता है।हां अगर बहुत ज्यादा या असामान्य ब्लीडिंग हो, लंबे समय तक ब्लीडिंग बंद रहे और गर्भधारण का शक हो, तेज दर्द या अन्य असामान्य लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। बर्थ कंट्रोल पिल्स के दौरान होने वाली ब्लीडिंग को असली पीरियड समझने की गलती न करें। यह सिर्फ हार्मोनल बदलाव का असर है। किसी भी कन्फ्यूजन या समस्या में डॉक्टर से सलाह लेना सबसे सुरक्षित विकल्प होता है।