
नारी डेस्क : देवभूमि उत्तराखंड अपनी आध्यात्मिक विरासत और चमत्कारी मंदिरों के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। यहां एक ऐसा भी मंदिर है, जहां मूर्ति या प्रतिमा की नहीं, बल्कि अस्थियों की पूजा की जाती है। यह अनोखा और रहस्यमयी मंदिर भगवान कार्तिकेय को समर्पित Kartik Swami Temple है।
पहाड़ की चोटी पर बसा आस्था का केंद्र
यह मंदिर उत्तराखंड के Rudraprayag जिले के कनकचौरी गांव के पास ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। समुद्र तल से लगभग 3,050 मीटर की ऊंचाई पर बसे इस मंदिर से हिमालय की बर्फीली चोटियों का अद्भुत नजारा दिखाई देता है। खासकर सुबह के समय सूर्योदय का दृश्य श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर देता है।

क्यों है यह मंदिर इतना खास
कार्तिक स्वामी मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां किसी भी देवी-देवता की मूर्ति स्थापित नहीं है। मान्यता है कि मंदिर में मौजूद प्राकृतिक शिला भगवान Kartikeya की अस्थियों का प्रतीक है, जिनकी पूजा की जाती है। यही वजह है कि यह मंदिर पूरे देश में अपनी अनोखी पूजा परंपरा के लिए जाना जाता है।
स्कंद पुराण से जुड़ा है इतिहास
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, स्कंद पुराण में वर्णित क्राउंट पर्वत को वही स्थान माना जाता है, जहां भगवान कार्तिकेय ने तपस्या और ध्यान किया था। माना जाता है कि इस मंदिर का इतिहास लगभग 200 वर्ष पुराना है और यह त्याग, प्रेम और समर्पण का प्रतीक है।
कार्तिक स्वामी मंदिर की पौराणिक कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एक बार भगवान गणेश और कार्तिकेय के बीच प्रतियोगिता हुई। इस प्रतियोगिता में पराजित होने के बाद कार्तिकेय अत्यंत दुखी हो गए और हिमालय की ओर चले गए। उन्होंने अपने माता-पिता भगवान शिव और माता पार्वती के प्रति प्रेम और समर्पण दर्शाते हुए अपने शरीर का त्याग कर दिया। इसी कारण इस स्थान को कार्तिकेय की अस्थियों से जुड़ा हुआ माना जाता है।
सावन और शिवरात्रि में उमड़ती है भीड़
सावन के महीने और महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां विशेष पूजा-अर्चना और अनुष्ठान किए जाते हैं। श्रद्धालु कठिन ट्रैकिंग कर मंदिर तक पहुंचते हैं और मानते हैं कि यहां दर्शन करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। कार्तिक स्वामी मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, प्रकृति और त्याग का अद्भुत संगम है, जो हर श्रद्धालु को आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराता है।