
नारी डेस्क: उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर से एक बेहद दुखद और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। यहां एक किशोर, करण, को करीब चार महीने पहले एक आवारा कुत्ते ने काट लिया था। उस समय परिवार ने इसे सामान्य घटना समझकर इलाज शुरू तो किया, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण पूरा इलाज नहीं करवा सके। अब यही लापरवाही उसकी जिंदगी पर भारी पड़ रही है।
करण के पिता दिव्यांग हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर है। कुत्ते के काटने के बाद डॉक्टरों ने रेबीज से बचाव के लिए पूरी वैक्सीन कोर्स लेने की सलाह दी थी, लेकिन पैसों की कमी के चलते परिवार केवल दो ही डोज लगवा सका। जबकि रेबीज से पूरी सुरक्षा के लिए निर्धारित समय पर सभी डोज लेना बेहद जरूरी होता है। घटना के चार महीने बाद अचानक करण की तबीयत बिगड़ने लगी। उसमें रेबीज के अंतिम चरण के खतरनाक लक्षण दिखने लगे। वह अजीब तरह से व्यवहार करने लगा, कभी कुत्ते की तरह भौंकने लगता, तो कभी घबराहट और बेचैनी में इधर-उधर भागने लगता। यह सब देखकर परिवार बुरी तरह डर गया, क्योंकि यह वायरस अब उसके दिमाग को प्रभावित कर चुका था।
पहले परिवार करण को एक मंदिर ले गया, यह सोचकर कि शायद कोई चमत्कार हो जाए। लेकिन जब उसकी हालत और गंभीर होती गई, तो वे उसे तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद साफ कर दिया कि यह रेबीज का आखिरी स्टेज है और अधूरी वैक्सीन के कारण अब उसके बचने की संभावना लगभग ना के बराबर है। डॉक्टरों के अनुसार, रेबीज एक जानलेवा बीमारी है, जो एक बार लक्षण दिखाने के बाद लगभग असाध्य हो जाती है। अगर समय रहते पूरी वैक्सीन ली जाए, तो इसे पूरी तरह रोका जा सकता है। लेकिन अधूरा इलाज इस वायरस को शरीर में सक्रिय रहने का मौका देता है, जो बाद में जानलेवा साबित होता है।
यह घटना समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है। कुत्ते या किसी भी जानवर के काटने को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना और पूरी वैक्सीन कोर्स लेना बेहद जरूरी है, चाहे आर्थिक स्थिति कैसी भी हो। सरकार और समाज को भी ऐसे जरूरतमंद परिवारों की मदद के लिए आगे आना चाहिए, ताकि कोई और करण इस तरह अपनी जिंदगी न गंवाए।
इस दर्दनाक मामले ने यह साफ कर दिया है कि जागरूकता और सही समय पर इलाज ही रेबीज जैसी खतरनाक बीमारी से बचने का एकमात्र तरीका है।