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साल में सिर्फ एक ही दिन खुलता है ये मंदिर, यहां पट्टी बांधकर ही होती हैं भगवान की पूजा

  • Edited By vasudha,
  • Updated: 15 Apr, 2026 05:42 PM
साल में सिर्फ एक ही दिन खुलता है ये मंदिर, यहां पट्टी बांधकर ही होती हैं भगवान की पूजा

नारी डेस्क: भारत विविधताओं का देश है, जहां मंदिरों में स्थापित देवी-देवताओं के साथ ही विचित्र और गहरी मान्यताएं जुड़ी हैं। आज हम आपको उत्तराखंड के चमोली जिले के वाण गांव में स्थित लाटू देवता मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जो अत्यंत रहस्यमयी और प्राचीन मंदिर है। यह मंदिर उत्तराखंड की आराध्य देवी नंदा देवी के धर्म भाई को समर्पित है। यहा मान्यता है कि लाटू देवता नागराज के रूप में विराजमान हैं और मंदिर के कपाट साल में केवल एक बार बैसाखी पूर्णिमा को खुलते हैं।

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इस मंदिर की खासियत यह है कि यहां कोई भी भक्त सीधा दर्शन करने के लिए नहीं जा सकता। ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर में नागराज अपनी मणि के साथ विराजमान है और मणि की तेज रोशनी से किसी भी श्रद्धालु की आंखों की रोशनी जा सकती है। इस कारण मंदिर में प्रवेश से पहले पुजारी भक्तों की आंखों पर पट्टी बांध देते हैं। इस रहस्यमयी मंदिर में सालभर प्रवेश नहीं मिलता है। 

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इस मंदिर के प्रवेश द्वार वैशाख माह की पूर्णिमा के मौके पर खुलता है। सभी श्रद्धालु देवता के दूर से ही दर्शन करते हैं। लाटू मंदिर में ज्यादातक विष्णु सहस्त्रनाम और भगवती चंडिका का पाठ किया जाता है। मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि मंदिर में नागराज अपनी मणि के साथ रहते हैं, जिसे देख पाना आम लोगों के बस की नहीं है। पुजारी भी नागराज के रूप को देखकर डर न जाएं, इसलिए वे आंखों पर पट्टी बांधकर दरवाजा खोलते हैं और पूजा करते हैं। 

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यह मंदिर नंदा देवी राजजात यात्रा का 12वां पड़ाव है। : चमोली के वाण गांव में स्थित इस प्राचीन मंदिर परिसर में अब पशु बलि पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। लाटू देवता के बारे में यह कहा जाता है कि उन्होंने गलती से मदिरा पी ली थी, जिसके पश्चाताप में उन्हें यह स्थान प्राप्त हुआ।

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