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सिर्फ सिरदर्द नहीं, ये लक्षण भी हो सकते हैं Brain Tumor का संकेत

  • Edited By Monika,
  • Updated: 15 Jun, 2026 04:55 PM
सिर्फ सिरदर्द नहीं, ये लक्षण भी हो सकते हैं Brain Tumor का संकेत

नारी डेस्क : ब्रेन ट्यूमर का नाम सुनते ही ज्यादातर लोगों के मन में डर बैठ जाता है। कई बार अधूरी जानकारियों की वजह से इसके बारे में कई गलत धारणाएं फैली हुई हैं। हकीकत यह है कि ब्रेन ट्यूमर एक जटिल बीमारी है, लेकिन इससे जुड़े कई मिथक लोगों को जरूरत से ज्यादा डराने का काम करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बीमारी से ज्यादा नुकसान उसके बारे में फैली गलत जानकारी पहुंचा सकती है। आइए जानते हैं ब्रेन ट्यूमर से जुड़े कुछ आम मिथकों और उनकी सच्चाई के बारे में।

क्या हर ब्रेन ट्यूमर कैंसर होता है?

यह सबसे आम गलतफहमियों में से एक है। विशेषज्ञों के अनुसार, सभी ब्रेन ट्यूमर कैंसरयुक्त नहीं होते। कई ट्यूमर सौम्य (Benign) होते हैं, यानी वे शरीर के दूसरे हिस्सों में नहीं फैलते। हालांकि, ब्रेन के भीतर सीमित जगह होने के कारण ये ट्यूमर भी दबाव बनाकर बोलने, देखने, चलने, याददाश्त और संतुलन जैसी क्षमताओं को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए किसी ट्यूमर की गंभीरता केवल उसके कैंसरयुक्त होने से तय नहीं होती।

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क्या सिरदर्द हमेशा ब्रेन ट्यूमर का संकेत है?

कई लोग मानते हैं कि लगातार सिरदर्द होना ब्रेन ट्यूमर का सबसे बड़ा लक्षण है, लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है। हर सिरदर्द ब्रेन ट्यूमर की निशानी नहीं होता और न ही हर ब्रेन ट्यूमर का पहला लक्षण सिरदर्द होता है। कुछ मरीजों में दौरे पड़ना, नजर कमजोर होना, बोलने में कठिनाई, हाथ-पैरों में कमजोरी, संतुलन बिगड़ना या व्यवहार में बदलाव जैसे लक्षण पहले दिखाई दे सकते हैं।

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क्या ब्रेन ट्यूमर सिर्फ बुजुर्गों को होता है?

यह भी एक मिथक है कि ब्रेन ट्यूमर केवल बुजुर्गों में होता है। वास्तव में यह बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है। बच्चों, युवाओं और मध्यम आयु वर्ग के लोगों में भी अलग-अलग प्रकार के ब्रेन ट्यूमर देखे जाते हैं। इसलिए उम्र कम होने के कारण किसी भी गंभीर लक्षण को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

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क्या मोबाइल फोन से होता है ब्रेन ट्यूमर?

मोबाइल फोन और ब्रेन ट्यूमर के संबंध को लेकर लंबे समय से बहस जारी है। हालांकि, अब तक हुए बड़े वैज्ञानिक अध्ययनों में ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है जो यह साबित करे कि सामान्य रूप से मोबाइल फोन का इस्तेमाल सीधे ब्रेन ट्यूमर का कारण बनता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि संतुलित और सुरक्षित तरीके से मोबाइल का उपयोग करना हमेशा बेहतर होता है, लेकिन केवल मोबाइल इस्तेमाल करने से ब्रेन ट्यूमर होने का दावा वैज्ञानिक रूप से सिद्ध नहीं है।

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क्या ब्रेन ट्यूमर का मतलब जिंदगी खत्म होना है?

यह सबसे नुकसानदायक मिथकों में से एक है। आधुनिक चिकित्सा में हुई प्रगति के कारण आज ब्रेन ट्यूमर का इलाज पहले से कहीं अधिक प्रभावी हो चुका है। बेहतर ब्रेन इमेजिंग तकनीक, अत्याधुनिक सर्जरी, सटीक रेडिएशन थेरेपी और नई दवाओं की मदद से कई मरीज इलाज के बाद सामान्य और संतोषजनक जीवन जी रहे हैं।

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कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

अगर लंबे समय तक न्यूरोलॉजिकल लक्षण बने रहें
जैसे, बार-बार दौरे पड़ना
नजर कमजोर होना
लगातार संतुलन बिगड़ना
बोलने में कठिनाई
हाथ-पैरों में कमजोरी
व्यवहार में अचानक बदलाव
तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। समय पर जांच और सही इलाज से बेहतर परिणाम मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

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