नारी डेस्क: डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है, जो सिर्फ ब्लड शुगर बढ़ने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि शरीर के कई हिस्सों पर इसके संकेत दिखाई देने लगते हैं। अक्सर लोग डायबिटीज के लक्षणों को सिर्फ बार-बार प्यास लगने या पेशाब आने से जोड़कर देखते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसके शुरुआती संकेत त्वचा पर भी नजर आ सकते हैं। डॉक्टर के अनुसार, कई बार शरीर हमें पहले ही चेतावनी देने लगता है, लेकिन जानकारी की कमी के कारण लोग इन संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं। यदि समय रहते इन्हें पहचान लिया जाए, तो डायबिटीज और इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसी समस्याओं का जल्द पता लगाया जा सकता है।
गर्दन पर काले पैच हो सकते हैं चेतावनी का संकेत
डॉक्टर के मुताबिक यदि गर्दन, बगल या शरीर के कुछ हिस्सों पर काले और मोटे पैच दिखाई देने लगें और रगड़ने के बाद भी साफ न हों, तो इसे सिर्फ गंदगी समझने की गलती नहीं करनी चाहिए। मेडिकल भाषा में इस स्थिति को एकेंथोसिस निग्रिकेंस (Acanthosis Nigricans) कहा जाता है। यह अक्सर शरीर में बढ़े हुए इंसुलिन लेवल का संकेत माना जाता है। कई बार व्यक्ति का ब्लड शुगर सामान्य दिखाई देता है, लेकिन शरीर में इंसुलिन की मात्रा जरूरत से ज्यादा हो सकती है। ऐसे में यह त्वचा पर दिखाई देने वाला बदलाव भविष्य में डायबिटीज के बढ़ते खतरे की ओर इशारा कर सकता है।

गर्दन के आसपास छोटे-छोटे मस्से भी हो सकते हैं संकेत
अगर गर्दन, गले या अंडरआर्म्स के आसपास छोटे-छोटे स्किन टैग्स या मस्से दिखाई देने लगें, तो इसे भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे स्किन टैग्स कई बार इंसुलिन रेजिस्टेंस और हाई ब्लड शुगर से जुड़े हो सकते हैं। जब शरीर में इंसुलिन का स्तर लंबे समय तक बढ़ा रहता है, तो त्वचा की कोशिकाएं तेजी से बढ़ने लगती हैं, जिससे इस तरह के छोटे मस्से बनने लगते हैं।
क्यों दिखाई देते हैं त्वचा पर ये बदलाव
डॉक्टरों के अनुसार, शरीर में इंसुलिन का स्तर बढ़ने पर त्वचा की कोशिकाओं की वृद्धि भी तेज हो जाती है। यही वजह है कि कुछ लोगों की गर्दन काली पड़ने लगती है या त्वचा पर स्किन टैग्स विकसित होने लगते हैं। हालांकि हर व्यक्ति में ये लक्षण दिखाई दें, ऐसा जरूरी नहीं है। लेकिन यदि ऐसे बदलाव लगातार नजर आ रहे हैं, तो ब्लड शुगर और इंसुलिन लेवल की जांच करवाना समझदारी हो सकती है।
बार-बार पेशाब आना भी हो सकता है शुरुआती संकेत
डायबिटीज के शुरुआती लक्षणों में बार-बार पेशाब आना भी शामिल है। जब खून में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है, तो किडनी अतिरिक्त ग्लूकोज को बाहर निकालने के लिए ज्यादा मेहनत करती है। इसी वजह से व्यक्ति को सामान्य से ज्यादा बार पेशाब आने लगता है।

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अत्यधिक प्यास लगना
बार-बार पेशाब आने से शरीर में पानी की कमी होने लगती है। इस कमी को पूरा करने के लिए शरीर बार-बार प्यास का संकेत देता है। यदि बिना किसी विशेष कारण के लगातार प्यास लग रही है, तो इसे भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
आंखों की रोशनी पर भी पड़ सकता है असर
ब्लड शुगर बढ़ने का असर आंखों पर भी दिखाई दे सकता है। कई लोगों को धुंधला दिखने लगता है या आंखों में भारीपन महसूस होता है। लंबे समय तक अनियंत्रित डायबिटीज आंखों की गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है।

बिना वजह वजन कम होना
कुछ लोगों में डायबिटीज की शुरुआत के दौरान अचानक वजन कम होने लगता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शरीर ऊर्जा के लिए फैट और मांसपेशियों का इस्तेमाल करने लगता है। यदि खानपान सामान्य होने के बावजूद वजन तेजी से घट रहा है, तो इसकी जांच करानी चाहिए।
घाव का देर से भरना
डायबिटीज का एक सामान्य संकेत यह भी है कि चोट या घाव जल्दी ठीक नहीं होते। खासकर पैरों में लगी चोट को भरने में ज्यादा समय लग सकता है। ऐसा ब्लड सर्कुलेशन और शरीर की हीलिंग क्षमता प्रभावित होने के कारण होता है।
हाथ-पैरों में झनझनाहट और सुन्नपन
ब्लड शुगर लंबे समय तक बढ़ा रहने पर नसों पर असर पड़ सकता है। इसके कारण हाथों और पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन या जलन जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं।
हर समय थकान महसूस होना
डायबिटीज के मरीजों में अक्सर कमजोरी और थकान की शिकायत रहती है। शरीर ग्लूकोज का सही तरीके से उपयोग नहीं कर पाता, जिससे पर्याप्त ऊर्जा नहीं बन पाती और व्यक्ति दिनभर थका हुआ महसूस कर सकता है।
कब डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए
यदि गर्दन पर काले पैच, छोटे मस्से, बार-बार प्यास लगना, पेशाब ज्यादा आना, अचानक वजन कम होना या लगातार थकान जैसे लक्षण नजर आएं, तो इन्हें सामान्य समझकर नजरअंदाज न करें। समय पर ब्लड शुगर और अन्य जरूरी जांच करवाने से बीमारी का जल्द पता लगाया जा सकता है और आगे होने वाली जटिलताओं से बचा जा सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता और समय पर जांच ही डायबिटीज से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।