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पैरों में टाइटनेस के साथ दिखें ये 2 संकेत तो हो जाएं सतर्क, नसों में Blood Clot का इशारा

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 25 Jul, 2026 10:52 AM
पैरों में टाइटनेस के साथ दिखें ये 2 संकेत तो हो जाएं सतर्क, नसों में Blood Clot का इशारा

नारी डेस्क:  पैरों में दर्द, जकड़न या भारीपन जैसी समस्याओं को अक्सर लोग सामान्य थकान या मांसपेशियों की परेशानी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन कई बार यही लक्षण शरीर में एक गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, पैरों की नसों में खून का थक्का जमना यानी डीप वेन थ्रोम्बोसिस (Deep Vein Thrombosis - DVT) ऐसी ही एक स्थिति है, जिसका समय रहते इलाज न किया जाए तो यह जानलेवा भी साबित हो सकती है। यदि यह थक्का टूटकर फेफड़ों तक पहुंच जाए, तो मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति पैदा हो सकती है।

क्या होता है डीप वेन थ्रोम्बोसिस

डीप वेन थ्रोम्बोसिस एक ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर की गहरी नसों, खासकर पैरों की नसों में खून का थक्का बनने लगता है। शुरुआत में इसके लक्षण हल्के हो सकते हैं या कई बार बिल्कुल भी महसूस नहीं होते। यही वजह है कि अधिकतर लोग इसे पहचान नहीं पाते और बीमारी धीरे-धीरे गंभीर रूप ले लेती है।  पैरों में होने वाले कुछ बदलावों को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। अगर समय पर जांच और इलाज हो जाए, तो गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।

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पैरों में टाइटनेस महसूस होना

डीप वेन थ्रोम्बोसिस का सबसे सामान्य लक्षण पिंडलियों में असामान्य टाइटनेस या जकड़न महसूस होना है। कई लोगों को ऐसा लगता है जैसे पैर की त्वचा खिंच रही हो या मांसपेशियां बहुत ज्यादा तनी हुई हों। यह परेशानी बिना किसी भारी व्यायाम या चोट के भी हो सकती है। यदि यह एहसास लगातार बना रहे, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

त्वचा का रंग बदलना

जब नसों में खून का थक्का जम जाता है, तो प्रभावित हिस्से में रक्त प्रवाह सामान्य नहीं रह पाता। इसके कारण पैर की त्वचा का रंग बदल सकता है। कई बार त्वचा लाल, नीली या हल्की बैंगनी दिखाई देने लगती है। यदि अचानक त्वचा के रंग में बदलाव नजर आए, तो इसे सामान्य समस्या मानकर अनदेखा नहीं करना चाहिए।

पैर का गर्म महसूस होना

खून का थक्का बनने के कारण प्रभावित हिस्से में सूजन और सूक्ष्म स्तर पर सूजन संबंधी प्रतिक्रिया (Inflammation) हो सकती है। ऐसे में पैर का एक हिस्सा सामान्य से ज्यादा गर्म महसूस होने लगता है। यदि पैर में गर्माहट के साथ दर्द या जकड़न भी हो, तो तुरंत जांच करानी चाहिए।

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क्यों खतरनाक हो सकता है ब्लड क्लॉट

विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि नसों में बना खून का थक्का अपनी जगह से निकलकर फेफड़ों तक पहुंच जाए, तो यह पल्मोनरी एंबोलिज्म (Pulmonary Embolism) का कारण बन सकता है। यह एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें मरीज की जान को भी खतरा हो सकता है।

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फेफड़ों तक थक्का पहुंचने पर दिख सकते हैं ये लक्षण

यदि ब्लड क्लॉट फेफड़ों तक पहुंच जाए, तो मरीज को अचानक सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। छाती में दर्द महसूस हो सकता है, जो गहरी सांस लेने पर और बढ़ जाता है। इसके अलावा दिल की धड़कन तेज होना, बिना वजह लगातार खांसी आना और खांसी के साथ खून आना भी पल्मोनरी एंबोलिज्म के संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में बिना देर किए तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए।

खून का थक्का आखिर बनता कैसे है

खून का थक्का शरीर की एक प्राकृतिक प्रक्रिया का हिस्सा है। जब शरीर में कहीं चोट लगती है, तो खून बहना रोकने के लिए रक्त कोशिकाएं और प्रोटीन मिलकर जेल जैसी संरचना बना लेते हैं, जिसे ब्लड क्लॉट कहा जाता है। लेकिन जब बिना किसी जरूरत के नसों के अंदर थक्का बनने लगे, तो यह रक्त प्रवाह को बाधित कर सकता है और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।

किन लोगों में ज्यादा होता है खतरा

कुछ लोगों में डीप वेन थ्रोम्बोसिस का खतरा अधिक रहता है। लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहने वाले लोग, शारीरिक गतिविधि कम करने वाले, धूम्रपान करने वाले, मोटापे से ग्रस्त व्यक्ति और बढ़ती उम्र के लोगों में इसकी संभावना ज्यादा होती है। इसके अलावा बड़ी सर्जरी के बाद लंबे समय तक बेड रेस्ट करने वाले मरीजों में भी ब्लड क्लॉट बनने का जोखिम बढ़ सकता है।

कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें

यदि पैरों में लगातार टाइटनेस, सूजन, त्वचा का रंग बदलना या पैर का असामान्य रूप से गर्म महसूस होना जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच और इलाज से डीप वेन थ्रोम्बोसिस का सफलतापूर्वक इलाज किया जा सकता है और पल्मोनरी एंबोलिज्म जैसी गंभीर जटिलताओं से बचाव संभव है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ऐसे किसी भी लक्षण के दिखने पर स्वयं इलाज करने के बजाय तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। 
  
 

 
 

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