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Nari

60 Min की नींद कम होने से सेहत खराब ही नहीं एक्सीडेंट भी बढ़ते हैं, डॉक्टरों ने दी चेतावनी

  • Edited By vasudha,
  • Updated: 22 Jun, 2026 04:21 PM
60 Min की नींद कम होने से सेहत खराब ही नहीं एक्सीडेंट भी बढ़ते हैं, डॉक्टरों ने दी चेतावनी

नारी डेस्क: ऐसी संस्कृति में जहां कड़ी मेहनत और भाग-दौड़ को बहुत महत्व दिया जाता है, नींद अक्सर वह पहली चीज होती है जिसकी हम कुर्बानी दे देते हैं। काम या पढ़ाई के लिए देर रात तक जागना या दिन का ज़्यादा से ज़्यादा फ़ायदा उठाने की कोशिश करना प्रोडक्टिव लग सकता है, और कई लोग नींद न पूरी कर पाने को एक सम्मान की बात मानते हैं।  विशेषज्ञों ने समझाया कि पूरी आठ घंटे की नींद लेना आपकी सेहत के लिए सबसे जरूरी निवेशों में से एक क्यों है।


लाखों लोगों अपनी नींद नहीं करते पूरे

डॉक्टर बताते हैं कि नींद का एक घंटा कम होने से भी शरीर पर कितना असर पड़ सकता है। वे 'डेलाइट सेविंग टाइम' (daylight saving time) की वैश्विक घटना का उदाहरण देते हुए समझाते हैं कि नींद हमारी सेहत, काम करने की क्षमता और कुल मिलाकर हमारी भलाई पर कितना गहरा असर डालती है। नींद का सिर्फ एक घंटा कम होने से भी लाखों लोगों और उनकी रोजमर्रा की जिंदगी पर दूरगामी असर पड़ सकता है।  70 देशों में 1.6 अरब से ज़्यादा लोग साल में दो बार इस बदलाव का सामना करते हैं; जब गर्म मौसम की शुरुआत में 'डेलाइट सेविंग टाइम' के तहत घड़ियों को एक घंटा आगे किया जाता है, तो अक्सर शरीर की नींद और जागने की प्राकृतिक लय बिगड़ जाती है।


डेलाइट सेविंग टाइम क्या है?

डेलाइट सेविंग टाइम (DST) का मतलब है गर्म महीनों के दौरान घड़ियों को एक घंटा आगे बढ़ाना ताकि अंधेरा देर से हो। यह दिन की रोशनी के एक घंटे को सुबह से हटाकर देर दोपहर या शाम में ले जाता है, जिससे यह जागने के आम समय के साथ बेहतर तालमेल बिठा पाता है और इससे ऊर्जा की बचत भी हो सकती है। डेलाइट सेविंग टाइम की वजह से नींद का सिर्फ़ एक घंटा कम होने से आपके शरीर पर ऐसे असर पड़ सकते हैं जिन पर शायद आप तुरंत ध्यान न दें। हर वसंत में, जब घड़ियां एक घंटा आगे बढ़ाई जाती हैं, तो हार्ट अटैक के मामलों में बढ़ोतरी होती है, सड़क दुर्घटनाएं ज़्यादा होती हैं और लोगों की सोचने-समझने और फ़ैसला लेने की क्षमता पर बुरा असर पड़ सकता है। दिलचस्प बात यह है कि जब पतझड़ में घड़ियां पीछे की जाती हैं और वह खोया हुआ घंटा वापस मिल जाता है, तो इनमें से कई असर उलटे होते हुए दिखते हैं।


साठ मिनट की नींद का शरीर पर होता है ये असर

 डेटा से पता चलता है कि जिस दिन हमारी नींद का एक घंटा कम होता है, उसके अगले दिन हार्ट अटैक के मामलों में 24 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है और पतझड़ में जिस दिन हमें नींद के लिए एक घंटा ज़्यादा मिलता है, उस दिन हार्ट अटैक के मामलों में लगभग 21 प्रतिशत की कमी आती है। बात यहीं खत्म नहीं होती। सड़क दुर्घटनाएं और काम की जगह पर होने वाली चोटें भी बढ़ जाती हैं। यहां तक कि अदालती फैसलों पर भी इसका असर पड़ता है। नींद कम होने के अगले दिन फेडरल जज ज़्यादा सख़्त सज़ा सुनाते हैं, जबकि नींद का एक घंटा ज़्यादा मिलने के बाद वे ज़्यादा नरम फ़ैसले सुनाते हैं । इन सब बातों से पता चलता है कि आपका शरीर नींद पर कितना निर्भर है। नींद कोई विलासिता की चीज़ नहीं, बल्कि एक जैविक ज़रूरत है; यह आपके शरीर को हर दिन आराम करने, रिकवर होने और खुद को ठीक करने के लिए ज़रूरी समय देती है।आपका दिल, आपके रिफ़्लेक्स और आपकी फ़ैसला लेने की क्षमता ये सब साठ मिनट की नींद पर निर्भर करते हैं। 

 नोट: यह लेख सिर्फ़ जानकारी देने के मकसद से है और इसे पेशेवर मेडिकल सलाह का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। 
 

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