18 MARWEDNESDAY2026 7:04:18 PM
Life Style

Sanjay Dutt की मां Nargis का बचपन एक कोठे में बीता था, नानी की एक गलती कहे या किस्मत

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 18 Mar, 2026 02:35 PM

 नारी डेस्क: संजू बाबा ऐसे स्टार हैं जिनके माता-पिता भी अपने जमाने के सुपरस्टार्स थे। नरगिस और सुनील दत्त को आज भी लोग याद करते हैं लेकिन इनसे पहले भी संजय दत्त के घर में एक नायाब हीरा था जिनकी बदौलत,  उनकी मां नरगिस सुपरस्टार बनी थी, वो थी संजय दत्त की नानी जो उनसे भी कही ज्यादा बेहद खूबसूरत महिला थी लेकिन इस खूबसूरत महिला की लाइफस्टोरी काफी  संघर्षों भरी व रोचक रही, चलिए आपको बताते हैं।

भारत को अपनी पहली महिला संगीतकार मिलीं 

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो संजय दत्त की मां नरगिस का पालन-पोषण, कोलकाता के एक कोठे में हुआ था। वो एक ऐसी तवायफ मां की बेटी थी जिसके गाने सुनने का शौक मुगल तक रखते थे लेकिन ये कोई देह व्यापार वाले कोठे नहीं थे। इन कोठों पर सिर्फ ठुमरी और गजलें पेश की जाती थीं। इसी कोठे से भारत को अपनी पहली महिला संगीतकार मिलीं थीं। नरगिस की मां जद्दनबाई ही भारत की पहली फीमेल म्यूजिक डायरेक्टर बनी थी और उसी जद्दन बाई के नाती है संजय दत्त।

शादी के दिन ही वह विधवा हो गई थी ...

लेकिन जद्दनबाई और उनकी मां दलीपाबाई का बेकग्राउंड एक ब्राह्मण परिवार से था लेकिन किस्मत ने उनकी जिंदगी में कुछ और ही लिख दिया। बंटवारे से पहले इलाहाबाद के एक कोठे में रहने वाली दलीपाबाई, नरगिस की नानी थी। दलीपाबाई, शुरू से कोठे से ताल्लुक नहीं रखती थी। दरअसल, अपनी शादी के दिन ही वह विधवा हो गई थी और एक हादसे ने उन्हें कोठे पर पहुंचा दिया था। दलीपाबाई की शादी के बाद उनकी विदाई लेकर बारात गांव के पास पहुंची तो डाकुओं ने हमला कर दिया। दूल्हे को गोली मारकर, सारा दहेज और सोना लूट लिया गया था। ससुराल वालों ने उन्हें अभागन और मनहूस कहा। लगातार उन्हें प्रताड़ना भी मिली। एक दिन नदी किनारे वह गुनगुनाते हुए कपड़े धो रही थी तो गांव पहुंची मंडली की नजर उन पर पड़ी और उन्होंने दलीपा की आवाज सुनकर उन्हें साथ चलने को कहा। दलीपा दुखी थी इसलिए वह भी उनके साथ जाने को राजी थी लेकिन उस मंडली ने दलीपा को इलाहाबाद के एक कोठे पर बेच दिया, जिसके बाद दलीपाबाई वहां से कभी निकल ही नहीं पाई।

PunjabKesari

जद्दनबाई की 3 शादियां हुई थी

वही कोठे पर ही काम करने वाले  सारंगी वादक मियां जान से उनकी शादी हुई और वह ब्राह्मण से मुस्लिम बन गई। शादी के बाद जद्दनबाई हुसैन का जन्म हुआ। दलीपाबाई ने अपनी बेटी को अपना हर गुण परवरिश में दिया और एक दिन वो बेटी अपनी मां से ज्यादा फेमस हो गई। जद्दनबाई की 3 शादियां हुई थी। पहले पति गुजराती बिजनेसमैन नरोत्तम दास थे। उन्हें लोग बच्ची बाबू के नाम से भी जानते थे। जद्दन के लिए उन्होंने इस्लाम कबूला और शादी की थी। दोनो का एक बेटा हुआ अख्तर हुसैन लेकिन कुछ सालों बाद वह जद्दन और बेटे को छोड़ कर चला गया। उसके बाद कोठे में ही हरमोनियम बजाने वाले मास्टर उस्ताद इरशाद मीर खान से जद्दन बाई की दूसरी शादी हुई और इस शादी से भी उन्हें बेटा हुआ जिसका नाम अनवर हुसैन रखा गया लेकिन ये शादी भी नहीं चली, दोनों अलग हो गए।

ये भी पढ़ें:Sunil Grover ने की ऐसी Acting कि कादर खान को याद कर Emotional हो गए फैंस

 बॉलीवुड की फेमस हीरोइन बनी थी नरगिस  

अंग्रेजों की छापेमारी से तंग आकर जद्दन ने बनारस छोड़ा और कोलकाता आ गई, क्योंकि उन्हें लगता था कि वह क्रांतिकारियों को पनाह देती हैं... फिर उन्होंने कोलकत्ता के कोठे पर गाना शुरू कर दिया। यहां उन्हें लखनऊ के एक रईस परिवार का शख्स मिला, जिनका नाम था मोहन बाबू जो जहाज के जरिए कोलकाता से लंदन डॉक्टरी करने जाने वाला था लेकिन जहाज के रवाना होने में देरी हुई तो वह शाम गुजारने के लिए जद्दन बाई के कोठे पर जा पहुंचे। जद्दन बाई को देखने के बाद मोहन बाबू ने उनसे शादी करने का मन बना लिया। मोहन बाबू भी जद्दन के लिए अब्दुल राशिद बन गए थे। उन्होंने इस्लाम कबूला और शादी की। इस शादी से उनके घर बेटी हुई जिनका नाम था फ़ातिमा राशिद जो बाद में बॉलीवुड की फेमस हीरोइन नरगिस बनी।

PunjabKesari

मोहन बाबू  चाहते थे नरगिस डॉक्टर बने 

कुछ सालों बाद जद्दनबाई ने संगीत की शिक्षा ली और देखते ही देखते इनके गाए गाने देशभर में पसंद किए जाने लगे। वहीं से उन्हें राजा गोपीचंद फिल्म में हीरो की मां रोल ऑफर हुआ,  इस तरह एक्टिंग की दुनिया में भी उनकी एंट्री हो गई और कोठे से उनका नाता टूट गया। उन्होंने इंसान और शैतान फिल्म की और कुछ सालों बाद परिवार को लेकर बॉम्बे शिफ्ट हो गईं। जद्दन ने अपना प्रोडक्शन हाउस खोला और फिल्में बनाना शुरू किया। अपने दोनों बेटों को फिल्मों में उतारा लेकिन वह फ्लॉप रहे और इससे उन्हें काफी नुकसान हुआ। मोहन बाबू जो कि शादी के लिए डॉक्टर बनने का सपना छोड़ चुके थे, वह चाहते थे कि उनकी बेटी नरगिस डॉक्टर बने लेकिन मां पर कर्ज ही इतना था कि उन्होंने बेटी नरगिस को फिल्मों में लाना जरूरी समझा।

PunjabKesari

फिर 6 साल की नरगिस ने फिल्मों में चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर काम करना शुरू किया। 14 साल की उम्र में उन्हें फिल्म तकदीर से पहचान मिली। जद्दन बेटी को सुपरस्टार बने देखना चाहती थी लेकिन उनका ये सपना अधूरा रह गया क्योंकि जद्दन को कैंसर हो गया था। उन्हें मुंबई के बाबा कब्रिस्तान में दफन किया गया। नरगिस सुपरस्टार हीरोइन बनी और उन्होंने सुनील दत्त से शादी की। साल 1981 में नरगिस की मौत भी कैंसर से हुई और उन्हें भी अपनी मां जद्दनबाई की कब्र के पास ही दफनाया गया। मां बेटी दोनों ने ही अपनी-अपनी जिंदगी में काफी संघर्ष किया था।

क्या आप पहले से ही संजय दत्त की मां और नानी की बेकग्राउंड स्टोरी जानते थे तो हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।  

Related News