
नारी डेस्क: बॉलीवुड एक्टर संजय दत्त 27 अप्रैल को राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) के सामने पेश हुए। यह पेशी 'सरके चुनर तेरी सरके' गाने में कथित अश्लीलता और फूहड़पन को लेकर जारी समन के जवाब में हुई। सुनवाई के दौरान, दत्त ने बताया कि उन्हें गाने के बोल, अनुवाद, रचनात्मक बनावट या अंतिम प्रस्तुति के बारे में पहले से कोई जानकारी, भागीदारी या नियंत्रण नहीं था। उन्होंने कहा कि उनकी भूमिका केवल एक एक्टर के तौर पर अपने अनुबंध की शर्तों के तहत अभिनय करने तक ही सीमित थी।

वकील हेमंत शाह के नेतृत्व में अपनी कानूनी टीम के साथ पेश होते हुए, उन्होंने (संजय दत्त) आयोग के सामने पूरी ईमानदारी से माफ़ी मांगी और महिलाओं की गरिमा व सामाजिक मूल्यों के प्रति अपना सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने स्वेच्छा से एक लिखित वादा भी किया कि वह आने वाले शैक्षणिक वर्ष में 50 लड़कियों की पढ़ाई का खर्च उठाएंगे, खासकर महाराष्ट्र के नागपुर में रहने वाले आदिवासी समुदायों की लड़कियों का। इस वादे के पालन की रिपोर्ट तीन महीने के भीतर आयोग को देनी होगी। वकील हेमंत शाह सहित अपनी कानूनी टीम के ज़रिए, उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि भविष्य में उनके पेशेवर कामों में ऐसे सुरक्षा उपाय शामिल किए जाएंगे, जिनसे यह सुनिश्चित हो सके कि उनसे जुड़ा कोई भी कलात्मक काम महिलाओं, बच्चों या किसी भी व्यक्ति का अपमान न करे।

सुनवाई के बाद, दत्त का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील हेमंत शाह ने मीडिया वालों से कहा- "संजय दत्त आज राष्ट्रीय महिला आयोग के सामने पेश हुए। महिलाओं और आयोग के प्रति अपने गहरे सम्मान के चलते, उन्होंने कहा कि उन्हें गाने के बोलों के बारे में जानकारी नहीं थी। फिर भी, बिना किसी शर्त के उन्होंने माफ़ी मांगी है और स्वेच्छा से आदिवासी समुदाय के 50 बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाने की पेशकश भी की है। उन्होंने बताया कि जब यह गाना रिकॉर्ड किया गया था, तब यह किसी दूसरी भाषा में रिकॉर्ड हुआ था।" सुनवाई की प्रक्रिया के दौरान, एक्टर का प्रतिनिधित्व वकीलों अक्षय राणा, सौरभ पाल, काव्या रॉय चौधरी, विशाल मान, ऐश्वर्या, आशुतोष कुमार तिवारी, ओजस कौशिक और सौरभ राजपूत ने भी किया। सुनवाई खत्म होने के बाद, जांच में पूरा सहयोग देने के बाद उन्हें आयोग परिसर से बाहर निकलते हुए देखा गया।