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क्या आप कपड़े धोते समय जरूरत से ज्यादा डिटर्जेंट डाल रहे हैं? तो पहले पढ़ ले ये खबर

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 16 Apr, 2026 05:14 PM
क्या आप कपड़े धोते समय जरूरत से ज्यादा डिटर्जेंट डाल रहे हैं? तो पहले पढ़ ले ये खबर

नारी डेस्क:  भारतीय घरों में कपड़े धोना सिर्फ एक काम नहीं, बल्कि एक  दिनचर्या जैसा होता है बाल्टी भर कपड़े, पानी में भरपूर डिटर्जेंट और उम्मीद कि कपड़े एकदम साफ और चमकदार निकलें। लेकिन अक्सर हम एक छोटी-सी गलती कर बैठते हैं कपड़ो में ज्यादा खुशबू  और उनकी  वो अच्छे से साफ़ हो जाए इस चक्र में जरूरत से ज्यादा डिटर्जेंट  डाल देते हैं और यहीं से समस्या शुरू होती है। चलिए आपको बताते हैं ज्यादा डिटर्जेंट इस्तेमाल करने के नुकसान के बारे में........

ज्यादा डिटर्जेंट  ज्यादा सफाई? सच कुछ और है

ज्यादातर लोग मानते हैं कि ज्यादा डिटर्जेंट डालने से कपड़े ज्यादा साफ होंगे, लेकिन ऐसा नहीं है। जरूरत से ज्यादा डिटर्जेंट कपड़ों पर पूरी तरह से धुल नहीं पाता और एक पतली परत छोड़ देता है। यही परत बाद में धूल, पसीना और बदबू को पकड़ लेती है। नतीजा कपड़े साफ दिखने के बजाय भारी, कड़े और कभी-कभी बदबूदार लगने लगते हैं।

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हार्ड वॉटर की वजह से बढ़ती है यह आदत

मुंबई, दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु, चेन्नई जैसे कई शहरों में हार्ड वॉटर की समस्या आम है। ऐसे पानी में साबुन जल्दी काम नहीं करता, इसलिए लोग सोचते हैं कि डिटर्जेंट बढ़ाने से सफाई बेहतर होगी। खासकर जब कपड़ों पर जिद्दी दाग हों जैसे खाने के निशान या मिट्टी तो लोग मात्रा दोगुनी तक कर देते हैं। लेकिन इससे फायदा कम और नुकसान ज्यादा होता है।

मशीन और कपड़ों दोनों को होता है नुकसान

ज्यादा डिटर्जेंट सिर्फ कपड़ों को ही नहीं, आपकी वॉशिंग मशीन को भी नुकसान पहुंचाता है। झाग ज्यादा बनने से मशीन के अंदर अवशेष जमा होने लगते हैं, जिससे पाइप जाम हो सकते हैं और मशीन की लाइफ कम हो जाती है। लंबे समय में यह छोटी-सी आदत बड़े रिपेयर खर्च में बदल सकती है।

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पानी और पैसे दोनों की बर्बादी

जब डिटर्जेंट ज्यादा होता है तो उसे निकालने के लिए ज्यादा बार रिंस करना पड़ता है। इससे पानी की खपत बढ़ती है, जो पहले से ही कई शहरों में एक बड़ी समस्या है। साथ ही, जरूरत से ज्यादा डिटर्जेंट इस्तेमाल करना सीधे-सीधे पैसों की बर्बादी भी है।

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पाउडर बनाम लिक्विड डिटर्जेंट

भारत में ज्यादातर घरों में पाउडर डिटर्जेंट इस्तेमाल होता है, लेकिन कई बार यह पूरी तरह घुलता नहीं है। इसके छोटे-छोटे कण कपड़ों पर रह जाते हैं और रोएं (लिंट) बढ़ा सकते हैं। वहीं, लिक्विड डिटर्जेंट जल्दी घुल जाता है, कपड़ों पर कोई अवशेष नहीं छोड़ता और कम मात्रा में भी असरदार सफाई करता है। यही वजह है कि अब कई लोग धीरे-धीरे लिक्विड डिटर्जेंट की ओर बढ़ रहे हैं।

कितना डिटर्जेंट सही है?

आमतौर पर 5–7 किलो कपड़ों के लिए मशीन वॉश में 2–3 बड़े चम्मच (करीब 30–60 ml) डिटर्जेंट काफी होता है। हाथ से धोने पर इससे भी कम मात्रा पर्याप्त रहती है। अगर दाग ज्यादा हैं, तो पहले उन्हें अलग से साफ कर लें इससे डिटर्जेंट डालने की जरूरत नहीं पड़ेगी। आजकल फ्रंट-लोड वॉशिंग मशीनें ज्यादा इस्तेमाल हो रही हैं, जो कम पानी में काम करती हैं। इनमें ज्यादा डिटर्जेंट डालने से झाग बढ़ जाता है और अंदर जमा होने लगता है। ऐसे में कम झाग वाले लिक्विड डिटर्जेंट बेहतर विकल्प होते हैं।

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छोटा बदलाव, बड़ा फर्क

सही मात्रा में डिटर्जेंट इस्तेमाल करना कोई मुश्किल काम नहीं है, बस थोड़ी सी जागरूकता की जरूरत है। नापकर डिटर्जेंट डालना, सही प्रोडक्ट चुनना और जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल से बचना ये छोटे-छोटे बदलाव आपके कपड़ों, मशीन और पानी तीनों की बचत कर सकते हैं। आखिरकार, कपड़े धोना सिर्फ साफ-सफाई का काम नहीं, बल्कि समझदारी का भी है। सही तरीका अपनाकर आप अपने रोजमर्रा के इस काम को और बेहतर बना सकते हैं।

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