नारी डेस्क: बॉलीवुड की मशहूर कोरियोग्राफर और डायरेक्टर फराह खान ने हाल ही में अपने बचपन और परिवार के संघर्षों को लेकर एक बेहद भावुक खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि कैसे एक समय उनका परिवार पूरी तरह कंगाल हो गया था और उनके पिता की मौत के समय उनकी जेब में सिर्फ 30 रुपये थे।
फिल्म फ्लॉप होते ही बर्बाद हो गया परिवार
फराह खान ने बताया कि उनके पिता कामरान खान एक फिल्ममेकर थे और एक बड़ी फिल्म बनाने के लिए उन्होंने अपनी पूरी जमा-पूंजी लगा दी थी। उन्होंने घर तक गिरवी रख दिया था। लेकिन जब फिल्म रिलीज हुई, तो वह बुरी तरह फ्लॉप हो गई। फराह के अनुसार, शुक्रवार को फिल्म रिलीज हुई और रविवार तक पूरा परिवार कंगाल हो गया। इस एक फैसले ने उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल दी।

पिता की हालत और परिवार का डर
फराह ने बताया कि आर्थिक तंगी के बाद उनके पिता धीरे-धीरे शराब की लत में डूबते चले गए। हालत इतनी खराब हो गई थी कि शाम होते ही घर में डर का माहौल बन जाता था। उन्होंने कहा कि उन्हें हमेशा डर रहता था कि रात में क्या होगा, क्योंकि उनके पिता का व्यवहार शराब के बाद अनियंत्रित हो जाता था।
मौत के समय जेब में थे सिर्फ 30 रुपये
फराह खान ने बेहद भावुक होकर बताया कि जब उनके पिता का निधन हुआ, तब उनकी जेब में केवल 30 रुपये थे। यहां तक कि परिवार के पास अंतिम संस्कार के लिए भी पैसे नहीं थे। परिवार को कर्ज लेकर और लोगों से मदद मांगकर उनके पिता का अंतिम संस्कार करना पड़ा।
13 साल तक काम नहीं किया, घर से निकलना बंद
फिल्म के फ्लॉप होने के बाद उनके पिता इतने टूट गए थे कि उन्होंने घर से बाहर निकलना बंद कर दिया। उन्होंने करीब 13 साल तक कोई काम नहीं किया। इस दौरान परिवार की स्थिति और भी खराब होती चली गई और आखिरकार उनके माता-पिता अलग हो गए।

मां ने संभाली जिम्मेदारी, होटल में किया काम
फराह की मां मेनका ईरानी बच्चों को लेकर अलग हो गईं और परिवार की जिम्मेदारी उठाई। उन्होंने एक होटल में हाउसकीपिंग सुपरवाइजर के तौर पर काम किया, ताकि बच्चों का पालन-पोषण हो सके। फराह और उनके भाई साजिद खान को भी कम उम्र में काम करना पड़ा।
बचपन में मिला नजरअंदाज होने का दर्द
फराह ने यह भी बताया कि उनके माता-पिता एक बेटे की इच्छा रखते थे, जिसके कारण उन्हें बचपन में नजरअंदाज किया गया। भाई के जन्म के बाद परिवार का ध्यान ज्यादा उसी पर चला गया। हालांकि, फराह को यह भी विश्वास था कि उनके पिता उन्हें प्यार करते थे, लेकिन हालात और सोच की वजह से वह इसे महसूस नहीं कर पाईं।

दारा सिंह ने पहचाना टैलेंट
फराह को बचपन से ही डांस का शौक था। एक बार जब दारा सिंह उनके घर आए, तो उन्होंने फराह को डांस करते देखा और उनके टैलेंट की तारीफ की। उन्होंने फराह के पिता से कहा कि उन्हें फिल्मों में काम करने देना चाहिए, लेकिन उस समय पिता ने मना कर दिया। बाद में हालात बिगड़ने पर फराह ने डांस ग्रुप जॉइन किया और फिल्मों में बैकग्राउंड डांसर के रूप में काम शुरू किया।
‘मैं नेपो किड नहीं हूं’
फराह खान ने साफ कहा कि वह “नेपो किड” नहीं हैं, क्योंकि उन्होंने अपनी जिंदगी में हर चीज संघर्ष और मेहनत से हासिल की है। फराह खान की कहानी इस बात का उदाहरण है कि कठिन हालात और गरीबी के बावजूद मेहनत और हिम्मत से सफलता हासिल की जा सकती है।
आज वह बॉलीवुड की सफल हस्तियों में शामिल हैं, लेकिन उनका यह संघर्ष भरा सफर लोगों को प्रेरित करता है