नारी डेस्क: आज के समय में कैंसर सिर्फ एक बीमारी नहीं, बल्कि एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है। भारत में हर साल इसके मामलों में बढ़ोतरी हो रही है। डॉक्टरों का मानना है कि बदलती जीवनशैली, गलत खानपान, तनाव, धूम्रपान और शारीरिक गतिविधि की कमी इसके पीछे बड़े कारण हैं। आइए आसान और मानवीय भाषा में समझते हैं कि भारत में इस समय कौन-कौन से कैंसर सबसे ज्यादा देखे जा रहे हैं और उनसे बचाव कैसे किया जा सकता है।
ब्रेस्ट कैंसर
भारत में इस समय ब्रेस्ट कैंसर सबसे ज्यादा पाया जाने वाला कैंसर बन चुका है। पहले यह सिर्फ महिलाओं में अधिक देखा जाता था, लेकिन अब पुरुषों में भी इसके मामले सामने आ रहे हैं। बदलती जीवनशैली, देर से शादी, कम स्तनपान, मोटापा, हार्मोनल बदलाव और बढ़ती उम्र इसके बड़े कारण माने जाते हैं। कई बार शुरुआत में इसके लक्षण साफ नजर नहीं आते, लेकिन स्तन में गांठ, आकार में बदलाव, त्वचा में सिकुड़न या निप्पल से डिस्चार्ज जैसे संकेत दिख सकते हैं। अच्छी बात यह है कि अगर समय पर जांच हो जाए तो इसका इलाज संभव है। नियमित सेल्फ एग्जामिनेशन, मैमोग्राफी और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना बेहद जरूरी है।

माउथ कैंसर
भारत में माउथ कैंसर के मामले भी बहुत ज्यादा हैं, खासकर पुरुषों में। इसका सबसे बड़ा कारण तंबाकू चबाना, गुटखा, पान मसाला और धूम्रपान है। मुंह में लंबे समय तक रहने वाला घाव, सफेद या लाल धब्बे, बोलने या निगलने में परेशानी इसके शुरुआती लक्षण हो सकते हैं। कई लोग इन संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे बीमारी गंभीर रूप ले लेती है। अगर तंबाकू की आदत छोड़ दी जाए तो इस कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। नियमित डेंटल चेकअप भी मददगार साबित हो सकता है।
सर्वाइकल कैंसर
सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाला एक आम कैंसर है, जो ज्यादातर एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) संक्रमण से जुड़ा होता है। यह बीमारी धीरे-धीरे विकसित होती है और शुरुआती चरण में अक्सर कोई खास लक्षण नहीं देती। असामान्य ब्लीडिंग, पेल्विक दर्द या संबंध के दौरान दर्द इसके संकेत हो सकते हैं। अच्छी बात यह है कि एचपीवी वैक्सीन और नियमित पाप स्मीयर टेस्ट से इसे काफी हद तक रोका जा सकता है। जागरूकता और समय पर जांच इस बीमारी से बचाव की कुंजी है।
लंग्स कैंसर
लंग्स यानी फेफड़ों का कैंसर मुख्य रूप से धूम्रपान से जुड़ा होता है। सिगरेट, बीड़ी या हुक्का पीने वाले लोगों में इसका खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसके अलावा प्रदूषण और सेकेंड हैंड स्मोक भी जोखिम बढ़ाते हैं। लगातार खांसी, खून आना, सांस लेने में दिक्कत और सीने में दर्द इसके सामान्य लक्षण हैं। सबसे अहम बात यह है कि धूम्रपान छोड़ने से इस कैंसर का खतरा काफी कम हो सकता है। साफ वातावरण और नियमित हेल्थ चेकअप भी जरूरी हैं।

कोलन कैंसर
कोलन या बड़ी आंत का कैंसर शहरी इलाकों में तेजी से बढ़ रहा है। इसका संबंध गलत खानपान से है, जैसे कम फाइबर वाला भोजन, ज्यादा प्रोसेस्ड और रेड मीट, जंक फूड और शारीरिक गतिविधि की कमी। मोटापा और डायबिटीज जैसी समस्याएं भी जोखिम बढ़ाती हैं। लंबे समय तक कब्ज, मल में खून या पेट दर्द इसके संकेत हो सकते हैं। अगर संतुलित आहार, फल-सब्जियां और नियमित व्यायाम को जीवन का हिस्सा बनाया जाए तो इस कैंसर के खतरे को कम किया जा सकता है।
क्यों बढ़ रहा है कैंसर का खतरा?
कैंसर अचानक होने वाली बीमारी नहीं है। यह धीरे-धीरे शरीर में बदलावों के कारण विकसित होता है। आनुवंशिक कारणों के अलावा हमारी रोजमर्रा की आदतें भी इसमें अहम भूमिका निभाती हैं। तंबाकू और शराब का सेवन, मोटापा, तनाव, असंतुलित आहार, नींद की कमी और फिजिकल एक्टिविटी न होना शरीर को अंदर से कमजोर बनाता है। लंबे समय तक रहने वाली सूजन या संक्रमण भी कैंसर के खतरे को बढ़ा सकते हैं।
बचाव ही सबसे बड़ा उपाय
कैंसर से बचाव के लिए जरूरी है कि हम अपनी जीवनशैली में छोटे-छोटे लेकिन असरदार बदलाव करें। रोज कम से कम 30 मिनट व्यायाम करें, संतुलित और पौष्टिक भोजन लें, तंबाकू और शराब से दूरी बनाए रखें और नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं। महिलाओं को समय-समय पर स्क्रीनिंग टेस्ट जरूर करवाना चाहिए।

याद रखें, जागरूकता और समय पर जांच ही कैंसर से लड़ाई में हमारी सबसे बड़ी ताकत है। स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर हम इस गंभीर बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम कर सकते हैं।