नारी डेस्क: घर की सुंदरता की शुरुआत पैरों के नीचे से, यानी फ़्लोर से होती है। अक्सर लोग दीवारों के रंग और फर्नीचर पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन फ़्लोर को नजरअंदाज कर देते हैं। एक इंटीरियर डिजाइनर और वास्तु सलाहकार के रूप में मेरा अनुभव है कि सही टाइल और सही रंग न केवल घर को आकर्षक बनाते हैं, बल्कि घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह भी बढ़ाते हैं। साल 2026 में फ़्लोर और टाइल्स के चलन में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अब केवल सुंदरता ही नहीं, बल्कि शांति, संतुलन और सीमलेस लुक पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
टाइल ड्रेंचिंग — 2026 का प्रमुख ट्रेंड
आजकल दुनिया भर में 'टाइल ड्रेंचिंग' का बहुत क्रेज है। इसका मतलब है एक ही तरह की टाइल को फ़्लोर
से शुरू करके पूरी दीवार तक लगा देना।
इसके लाभ:
⦁ इससे कमरा बड़ा और लग्ज़री दिखाई देता है।
⦁ टाइल्स के जोड़ (जॉइंट) न दिखने से फ़्लोर और दीवार एक जैसे नजर आते हैं, जो आंखों को बहुत सुकून देता है।
⦁ पूरा कमरा एक जैसा और शांत अनुभव देता है।
⦁ छोटा बाथरूम भी फाइव स्टार स्पा जैसा लुक दे सकता है।

डिजाइन सुझाव: अगर आपका बाथरूम छोटा है, तो जैसे बेज, ऑफ-व्हाइट या हल्का ग्रे चुनें, हल्के रंग की टाइल्स के साथ 'टाइल ड्रेंचिंग' ट्राई करें । टाइल्स के बीच भरने वाला मसाला (ग्राउट) भी उसी रंग का रखें ताकि फ़्लोर सीमलेस लगे।
बड़े आकार की टाइल्स — कम जोड़, ज्यादा सुकून
आजकल छोटे आकार की टाइल्स की जगह बड़े आकार की टाइल्स का उपयोग बढ़ रहा है। 8 बाय 4 फीट या उससे बड़ी टाइल्स घर को आधुनिक और साफ-सुथरा रूप देती हैं।
फायदे:
⦁ कम जोड़ दिखाई देते हैं
⦁ घर खुला और व्यवस्थित लगता है
⦁ सफाई आसान होती है
वास्तु सुझाव: वास्तु के अनुसार, फ़्लोर पर जितने कम जोड़ होंगे, ऊर्जा का प्रवाह उतना बेहतर होगा। सीमलेस फ़्लोर मानसिक शांति और स्थिरता बढ़ाता है।

वुडन फिनिश और एस.पी.सी. फ्लोरिंग
यदि आप घर को गर्माहट और आरामदायक अनुभव देना चाहते हैं, तो एस.पी.सी. (स्टोन प्लास्टिक कंपोजिट) फ्लोरिंग अच्छा विकल्प है। यह लकड़ी जैसा दिखता है, लेकिन पानी से खराब नहीं होता और लंबे समय तक टिकाऊ रहता है।
वास्तु दृष्टि से: बेडरूम में लकड़ी जैसा फ़्लोर ‘पृथ्वी तत्व’ को दर्शाता है। इससे रिश्तों में स्थिरता और अपनापन बढ़ता है।

दिशा के अनुसार फ़्लोर का रंग चुनें
एक वास्तु कंसल्टेंट के तौर पर मेरी सलाह है कि दिशाओं के हिसाब से ही रंगों का चुनाव करें:
• उत्तर दिशा: यहाँ हल्के नीले या सफेद रंग की फ्लोरिंग करियर में तरक्की लाती है।
• पूर्व दिशा: यहाँ क्रीम या ऑफ-व्हाइट रंग स्वास्थ्य के लिए अच्छा है।
• दक्षिण-पश्चिम: इस दिशा के कमरों में पीले या भूरे शेड्स की टाइल्स लगाने से घर में स्थिरता आती है।
डिज़ाइनर की सलाह
1. मैचिंग ग्राउट : टाइल्स के बीच भरी जाने वाली सीमेंट (Grout) का रंग टाइल से मिलता-जुलता रखें ताकि फर्श एक जैसा दिखे।
2. एंटी-स्किड टाइल्स : बुजुर्गों और बच्चों की सुरक्षा के लिए बाथरूम और किचन में हमेशा मैट फिनिश वाली टाइल्स ही लगाएं।
3. साफ-सफाई: टूटी हुई टाइल्स को तुरंत बदलें। वास्तु में टूटा हुआ फ़्लोर तरक्की में रुकावट माना जाता है।
4. प्राकृतिक रोशनी के अनुसार टाइल का रंग चुनें।
साल 2026 में फ़्लोर और टाइल्स केवल सजावट का हिस्सा नहीं, बल्कि घर की पहचान बन चुके हैं। टाइल ड्रेंचिंग, बड़े आकार की टाइल्स और प्राकृतिक रंगों का चलन घर को आधुनिक, शांत और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर बना सकता है। यदि सही योजना और वास्तु संतुलन के साथ फ़्लोर चुना जाए, तो आपका घर वास्तव में “सपनों का आशियाना” बन सकता है।
लेखक: रक्षा सेठी, इंटीरियर डिज़ाइनर एवं वास्तु विशेषज्ञ इंदौर