
नारी डेस्क: चीन ने बच्चों के खिलाफ यौन अपराध करने वालों के लिए सख्त रुख अपनाया है। अब ऐसे अपराधियों को सीधे फांसी की सजा दी जाएगी। इस कदम का मकसद न केवल अपराधियों में डर पैदा करना है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा को हर हाल में सुनिश्चित करना भी है। न्यायालयों ने कहा है कि इंटरनेट या किसी भी माध्यम से नाबालिगों का शोषण करने वाले अपराधियों को कोई रियायत नहीं मिलेगी। यह फैसला चीन में बच्चों के प्रति अपराधों के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों पर सख्त रुख
चीन की न्यायिक शाखा ने स्पष्ट कर दिया है कि बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों को बिना किसी क्षमा या नरमी के गंभीरता से लिया जाएगा। न्यायालय और प्रोक्यूरिएट (अभियोजन) ने कहा है कि इंटरनेट का उपयोग कर नाबालिगों (जूनियर्स) को ऑनलाइन लुभाना, नग्न तस्वीरें या विडियो भेजने के लिए मजबूर करना, या उन्हें नग्न बातचीत के लिए प्रेरित करना बच्चों के खिलाफ यौन उत्पीड़न माना जाएगा। ऐसे मामलों में आरोपी को कड़ी सजा दी जाएगी।
ऑनलाइन यौन उत्पीड़न को अपराध के रूप में माना गया
नई व्याख्या में खास तौर पर यह भी बताया गया है कि ऑनलाइन माध्यम से बच्चों को नग्न चैट करने या नग्न फ़ोटो/वीडियो भेजने को मजबूर करना भी यौन उत्पीड़न की श्रेणी में आता है। इससे पहले ऐसा माना जाता था कि अगर शारीरिक संपर्क न हुआ हो तो कुछ मामलों में सजा कम हो सकती है, लेकिन अब कानून ने इसे स्पष्ट तौर पर अपराध बताया है।
यौन उत्पीड़न से होने वाले नुकसान को समझा गया
न्यायाधीशों ने कहा है कि बच्चों को ऑनलाइन परेशान करना या उनका यौन शोषण उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डालता है। ऐसे मामलों में अपराधी को सिर्फ जेल नहीं, बल्कि कठोर सजा भी दी जाएगी, विशेषकर जब अपराध में बच्चों को चोट, आत्म‑हानि की स्थिति या खुले तौर पर वीडियो/तस्वीरें अपलोड करना शामिल हो।

अदालतों ने पहले भी कड़े फैसले दिए
चीन में पहले भी यौन अपराधों के मामलों में सख्त कार्रवाई हुई है। उदाहरण के लिए, कुछ आरोपियों को फांसी की सजा तक दी जा चुकी है, खासकर जब उन्होंने बच्चों को ऑनलाइन लुभा कर यौन शोषण किया और उसके वीडियो फैलाए। यह दिखाता है कि न्यायालय इस मुद्दे को कितना गंभीरता से लेता है।
बच्चों की सुरक्षा के लिए न्यायिक सुधार
चीन के शीर्ष न्यायिक अधिकारियों का मानना है कि तकनीक और इंटरनेट के बढ़ते उपयोग के कारण बच्चों को नई चुनौतियों और खतरों का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए ऐसे अपराधों पर “जीरो टॉलरेंस” (शून्य सहनशीलता) नीति अपनाई जा रही है ताकि बच्चों की सुरक्षा को हर लिहाज़ से सुनिश्चित किया जा सके।