नारी डेस्क : आज के समय में सोशल मीडिया का इस्तेमाल लगभग हर किसी की जिंदगी का हिस्सा बन गया है। ऐसा लगता है जैसे सोशल मीडिया न हो तो जिंदगी अधूरी सी लगती है। लेकिन बड़ी चिंता की बात यह है कि अब बच्चे भी इस डिजिटल दुनिया के शिकार बन रहे हैं। AI तकनीक मूल रूप से हमारी मदद के लिए बनाई गई थी, ताकि हम उससे काम करवा सकें और जानकारी हासिल कर सकें। लेकिन कई लोग इसका गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। हाल ही में सामने आए मामलों में देखा गया है कि AI का प्रयोग करके नाबालिगों और महिलाओं की तस्वीरों को बिना अनुमति अश्लील फोटो और वीडियो में बदला जा रहा है। पेरेंट्स, अगर आप अपने बच्चों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। आपके बच्चों की सुरक्षा के लिए अब सतर्क होना समय की जरूरत बन गई है।
X और Grok AI पर लीगल नोटिस
इंडिया में X और Grok AI को लेगल नोटिस भेजा गया है। इसका कारण यह है कि इनके AI मॉडल ने लड़कियों की असली तस्वीरों को, जिसमें केवल 14 साल की एक्ट्रेस की तस्वीर भी शामिल थी, बिकिनी और न्यूड इमेज में बदल दिया। जैसा हुआ, लोगों ने मासूम तस्वीरें इंटरनेट पर शेयर कीं और AI ने इन्हें बिना किसी सहमति के डीपफेक में बदल दिया।

नाबालिग और असली महिलाओं की सुरक्षा का सवाल
इस मामले में सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने शिकायत दर्ज कराई कि सरकार ने AI कंपनियों को 72 घंटे में कार्रवाई करने के लिए समय दिया, वरना कानूनी सुरक्षा हटा दी जाएगी। यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि हमारे बच्चों की तस्वीरें कितनी आसानी से गलत हाथों में जा सकती हैं। चाहे वह बर्थडे पार्टी की फोटो हो, बीच वेकेशन की या स्कूल इवेंट की।
पेरेंटिंग 2026: डिजिटल सुरक्षा के लिए तीन जरूरी कदम
इस डिजिटल दुनिया में बच्चों की सुरक्षा के लिए पेरेंट्स को तीन कदम उठाने चाहिए।
ऑडिट करें अपनी पोस्ट का: अपने इंस्टाग्राम और फेसबुक अकाउंट की जांच करें। क्या पोस्ट पब्लिक हैं? आपके बच्चे की तस्वीरें कौन देख सकता है?
प्राइवेसी सेटिंग्स बदलें: अकाउंट्स को प्राइवेट करें, टैगिंग बंद करें, और लोकेशन डेटा ऑफ करें।
परिवार से बात करें: दादा-दादी, रिश्तेदार, या अन्य लोग बिना पूछे बच्चे की तस्वीरें पोस्ट कर रहे हैं? अभी यह बातचीत करें और नियम तय करें।

ओवरशेयरिंग का खतरा
आज की सोशल मीडिया संस्कृति में हर प्यारी फोटो परमानेंट डिजिटल डेटा बन जाती है। AI तकनीक सहमति की परवाह नहीं करती, और आपका बच्चा सोशल मीडिया पर होने के लिए खुद अनुमति नहीं दे सकता। इसलिए पेरेंट्स, हमें सच में यह सवाल करना चाहिए, क्या हम लाइक्स और परफेक्ट सोशल मीडिया एस्थेटिक के लिए ओवरशेयरिंग कर रहे हैं?
बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा सिर्फ माता-पिता की जागरूकता पर निर्भर करती है। अपनी पोस्ट की जांच करें, प्राइवेसी सेटिंग्स अपडेट करें और परिवार में नियम बनाएं। यह कोई डर फैलाने वाली खबर नहीं, बल्कि 2026 की डिजिटल पेरेंटिंग की जरूरत है।