
नारी डेस्क : पाकिस्तान से भारत आई Seema Haider एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह है उनका छठा बच्चा। सीमा हैदर ने ग्रेटर नोएडा के एक अस्पताल में बेटे को जन्म दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक मां और नवजात दोनों स्वस्थ हैं। परिवार में खुशी का माहौल है और बधाइयों का सिलसिला जारी है। हालांकि, इस खुशखबरी के साथ एक गंभीर सवाल भी खड़ा हो गया है। दरअसल, सीमा हैदर ने 11 महीने पहले एक बेटी को जन्म दिया था, और इतने कम अंतर में दो बच्चों का होना मेडिकल नजरिए से कितना सुरक्षित है, इस पर विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं।
11 महीने का गैप क्यों माना जाता है जोखिम भरा?
हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर पहली डिलीवरी के 6 से 12 महीने के भीतर दोबारा गर्भ ठहर जाए, तो इससे मां और बच्चे दोनों की सेहत पर असर पड़ सकता है। स्वास्थ्य जानकारी देने वाली अंतरराष्ट्रीय मेडिकल वेबसाइट Mayo Clinic के अनुसार, बहुत कम गैप में गर्भधारण करने से ये जोखिम बढ़ सकते हैं।

37 हफ्तों से पहले डिलीवरी (Preterm Birth)
बच्चे का जन्म के समय कम वजन
नवजात में सांस और विकास से जुड़ी समस्याएं
मां में एनीमिया (खून की कमी) का खतरा
कमजोरी और पोषक तत्वों की कमी।
मां की सेहत पर क्यों पड़ता है असर?
डिलीवरी और ब्रेस्टफीडिंग के दौरान महिला के शरीर से आयरन, फोलेट और कैल्शियम जैसे जरूरी पोषक तत्व काफी हद तक खत्म हो जाते हैं।
अगर शरीर को रिकवरी का पूरा समय न मिले और जल्दी दूसरी प्रेग्नेंसी हो जाए।
तो थकान बढ़ जाती है
गर्भावस्था जटिल हो सकती है
प्रसव के दौरान परेशानी का खतरा बढ़ जाता है।

बहुत कम और बहुत ज्यादा गैप दोनों ही सही नही
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सिर्फ कम अंतर ही नहीं, बल्कि बहुत ज्यादा गैप भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जाता।
5 साल से ज्यादा गैप होने पर
हाई ब्लड प्रेशर
कठिन प्रसव
प्रेग्नेंसी से जुड़ी जटिलताओं का खतरा
इसी वजह से ज्यादातर डॉक्टर एक बच्चे के जन्म के बाद 18 से 24 महीने का अंतर रखने की सलाह देते हैं।
हर महिला के लिए नियम अलग हो सकता है
डॉक्टरों का कहना है कि हर महिला की शारीरिक स्थिति अलग होती है।
इन मामलों में गैप को लेकर विशेष सावधानी जरूरी होती है।
उम्र 35 साल से ज्यादा
पहले प्रीमैच्योर डिलीवरी
सी-सेक्शन
पहले से कोई गंभीर बीमारी
ऐसी स्थिति में बिना डॉक्टर की सलाह के दोबारा प्रेग्नेंसी प्लान करना जोखिम भरा हो सकता है।

सीमा हैदर के मामले ने एक बार फिर इस अहम मुद्दे को सामने ला दिया है कि कम अंतर में बच्चों का जन्म सिर्फ खुशी नहीं, सेहत से जुड़ा बड़ा फैसला भी है। एक्सपर्ट्स साफ कहते हैं कि मां और बच्चे दोनों की सुरक्षा के लिए सही समय और मेडिकल सलाह बेहद जरूरी है।