
नारी डेस्क : होली रंगों का त्योहार है और फाल्गुन पूर्णिमा को बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। यह भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसमें लोग एक-दूसरे को रंग लगाते हैं, नए कपड़े पहनते हैं और मिठाइयां बांटकर खुशियां मनाते हैं। लेकिन भारत की सांस्कृतिक विविधता के चलते, होली सिर्फ रंग और गुलाल तक ही सीमित नहीं है। देश के विभिन्न हिस्सों में लोग इसे पानी, मिट्टी, राख, सब्जियां, लड्डू, फूल, गाय का गोबर, लठमार और यहां तक कि आग से भी खेलते हैं। जी हां, भारत में एक ऐसा गांव भी है जहां लोग सुरक्षा और परंपरा के साथ आग के बीच होली मनाते हैं, जो इस त्योहार को और भी अनोखा और साहसिक बना देता है।

मल्कार्नेम गांव की अनोखी परंपरा
दक्षिण गोवा के पणजी से लगभग 80 किलोमीटर दूर स्थित मल्कार्नेम गांव अपने अनोखे उत्सव के लिए प्रसिद्ध है। यहां के लोग अपने शरीर पर गर्म अंगारे बरसाते हुए होली खेलते हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और इसे देखने वाले अक्सर हैरान रह जाते हैं। कई राज्यों में होली का त्यौहार अगले दिन ‘होलिका दहन’ से शुरू होता है, जिसे बुराई के अंत का प्रतीक माना जाता है। लेकिन मल्कार्नेम गांव में लोग इसे बिल्कुल अलग तरीके से मनाते हैं। यहां होली केवल रंगों और खुशियों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह साहस, धैर्य और परंपरा का प्रतीक भी है।
आग से होली खेलने का साहसिक उत्सव
गांव के लोग त्योहार के दौरान अपने शरीर पर अंगारों को सहन करते हैं और आग से खेलते हैं। यह दृश्य सुनने में भले ही डरावना लगे, लेकिन स्थानीय लोग इसे अपनी सांस्कृतिक पहचान और श्रद्धा का हिस्सा मानते हैं। हर साल, लोग इस उत्सव में भाग लेकर अपनी बहादुरी और परंपरा के प्रति सम्मान का परिचय देते हैं। यह अनोखी होली पूरे भारत में अपनी अलग पहचान रखती है और दिखाती है कि कैसे एक ही त्योहार को अलग-अलग रीति-रिवाजों और परंपराओं के माध्यम से मनाया जा सकता है।