
नारी डेस्क: साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को लगने जा रहा है, इस दिन होली होने के चलते लोग असमंजस में पड़ गए हैं कि इस दिन रंग खेले या नहीं। ऐसे में एक भक्त ने सुप्रसिद्ध संत प्रेमानंद जी महाराज ने चंद्र ग्रहण को लेकर सवाल किया कि इस दिन क्या करना चाहिए और क्या नहीं। इस पर महाराज जी ने ऐसी बातें की जिससे लोगों की शंका दूर हो गई।
प्रेमानंद जी महाराज जी ने सूतक काल में रंग खेलने या शोर-शराबा करने से साफ इंकार कर दिया, उन्होंने कहा- ये सब महापाप की श्रेणी में आता है, क्योंकि यह समय ईश्वर भक्ति और संयम का होता है, न कि उल्लास का। महाराज जी का कहना है कि इस दौरान बाहरी वातावरण में अशुद्धि (नकारात्मक ऊर्जा) बढ़ जाती है, इससे बचने का सबसे अचूक उपाय नाम जाप है। उन्होंने कहा कि आप चाहें तो अपने इष्ट देव का नाम लें, गुरु मंत्र का जाप करें या गायत्री मंत्र पढ़ें।
प्रेमानंद जी का कहना है कि ग्रहण खत्म होने के बाद भी लगभग आधे घंटे तक जप जारी रखना चाहिए। इसके अलावा महाराज जी कहते हैं कि होली आनंद का त्योहार है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हम किसी की इच्छा के विरुद्ध रंग लगाएं। उन्होंने कहा- जहां मर्यादा टूटती है, वहां उत्सव पाप में बदल सकता है। किसी पर जबरदस्ती रंग डालना, अभद्र व्यवहार करना या नशे में धुत होकर गलत आचरण करना होली की भावना के विपरीत है।
महाराज जी अक्सर कहते हैं कि जैसे हम बाहर के रंगों से शरीर को रंगते हैं, वैसे ही हमें भीतर के अहंकार, क्रोध और ईर्ष्या को भी धोना चाहिए। अगर मन साफ नहीं हुआ तो रंग उतर जाएंगे, पर दोष नहीं उतरेंगे। त्योहार के नाम पर भांग या शराब का सेवन कई बार विवाद और दुर्घटनाओं का कारण बनता है। महाराज जी का कहना है कि सच्ची मस्ती भक्ति और प्रेम में है, न कि नशे में। उन्होंने कहा- अगर हम मर्यादा, संयम और सद्भाव बनाए रखें, तो होली सच में आनंद और आशीर्वाद का कारण बनती है।